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कान बहने की समस्या हो सकती है खतरनाक, जानें कारण और इलाज

कान की समस्‍या By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 24, 2018
कान बहने की समस्या हो सकती है खतरनाक, जानें कारण और इलाज

कान बहने की समस्या शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग की कार्य प्रणाली को क्षतिग्रस्त कर देती है। आइए जानते हैं इस समस्या का कारण और इलाज।

Quick Bites
  • नजरअंदाज न करें कान बहने की समस्या।
  • संक्रमण के कारण बहते हैं कान।
  • शुरुआत में दवाओं से ठीक की जा सकती है समस्या।

आवाजें सुनने के लिए कान जरूरी हैं, ये बात आपको भी पता है। मगर क्या आप जानते हैं कि कान आपके शरीर का संतुलन बनाने में भी मददगार होते हैं। कान बहने की समस्या शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग की कार्य प्रणाली को क्षतिग्रस्त कर देती है। आइए जानते हैं इस समस्या का कारण और इलाज।

गंभीर है कान बहने की समस्या

कान बहने की समस्या को हल्के ढंग से लेना सेहत के लिए भारी यानी नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस समस्या से कान के पर्दे में छेद हो जाता है और इससे रोगी बहरा भी हो सकता है। हम कान बहने की समस्या के प्रति सचेत तभी होते हैं, जब यह समस्या गंभीररूप धारण कर लेती है। कान बहने की समस्या के गंभीर परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि कानों की छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज न किया जाए।

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अनदेखी ठीक नहीं

आमतौर पर कान से मवाद आने को मरीज गंभीरता से नहीं लेता। इसे अत्यंत गंभीरता से लेकर नाक, कान व गला विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए अन्यथा यह कभी-कभी गंभीर रोग जैसे मेनिनजाइटिस या दिमागी बुखार आदि को उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। कान में मवाद की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, किंतु प्राय: यह एक वर्ष से छोटे बच्चों या ऐसे बच्चों में ज्यादा होती है जो मां की गोद में ही रहते हैं यानी जो छोटे बच्चे बैठ नहीं सकते या करवट नहीं ले सकते।

कान से मवाद आने का कारण

कान से मवाद आने का स्थान मध्य कान (कान का मध्यवर्ती भाग) में संक्रमण है। मध्य कान में सूजन होकर, कान का पर्दा फटकर मवाद आने लगता है। मध्य कान में संक्रमण पहुंचने के तीन रास्ते हैं, जिसमें 80 से 90 प्रतिशत कारण गले से कान को जोड़ने वाली नली है। इसके अलावा नाक और गले की सामान्य सर्दी-जुकाम, टांसिलाइटिस, खांसी आदि कारणों से मध्य कान में संक्रमण पहुंच जाता है। 

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सर्जरी है कान बहने का इलाज

शुरुआती दौर में कान बहने का इलाज एंटीबॉयोटिक और ओरल दवाओं से किया जा सकता है, जो अस्थायी समाधान है। स्थायी समाधान के लिए रोगी को सर्जिकल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है। सर्जरी की ये प्रक्रियाएं इस प्रकार हैं।

  • मायरिंगोप्लास्टी: एक सरल सर्जरी है। यह सर्जरी कान में हुए छोटे छेद की समस्या का बेहतर इलाज करती है। इसमें कान के पीछे की त्वचा को कान के नए पर्दे के रूप में लगाया जाता है।
  • टिम्पैनोप्लास्टी: यह सर्जरी आमतौर पर सामान्य बेहोशी की स्थिति में की जाती है। इस सर्जरी में पर्दे के साथ सुनने की हड्डी को भी बदला जाता है।
  • मसटॉइडेक्टमी: सर्जरी की यह प्रक्रिया सामान्य बेहोशी के तहत की जाती है। इस सर्जरी के माध्यम से कान के पीछे की जो हड्डी गल जाती है, उसे निकाल दिया जाता है।

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Written by
Anurag Gupta
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJul 24, 2018

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