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    कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के कारण, लक्षण और उपचार

    मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 27, 2016
    कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के कारण, लक्षण और उपचार

    सीजोफ्रेनिया में दिखने वाले विशेष लक्षणों को कैटेटोनिक कहा जाता है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए ये लेख पढ़ें।

    सीजोफ्रेनिया के मरीजों में कुछ विशेष तौर से दिखने वाले लक्षण कैटेटोनिक कहे जाते है। इसमें व्यकि्त ज्यादा चलता फिरता नहीं है और किसी भी निर्देशों का पालन नहीं कर पाता है।इसकी चरमता पर ऐये व्यकि्त मोटर की गतिविधियों की अत्यधिक और अजीब सी आवाज निकालकर नकल उतारते है। इसे कैटेटोनिक उत्साह (catatonic excitement) कहा जाता है।

    कैटेटोनिक सीजोफ्रेनिया के लक्षण

    इलाज में मार्डन तकनीकी की वजह से पहले की तुलना में अब कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया कम पाया जाता है। सिजोफ्रेनिया की बजाय कैटेटोनिक को न्यूरोडेवलेपमेंटल (एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने के समय प्रभावित करती है), साइकोटिक बाइपोलर, और डिप्रेसिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक बीमारियों मे ज्यादा देखा जाता है। कैटेटोनिया को रोगी को अत्यधिक और कम मोटर गतिविधि के बीच में देखा जा सकता है। माडर्न तकनीकी की वजह से कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के मरीज अपने लक्षणों को आसानी से समझने लगे है, जिससे उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो गई है।

    इनमें से कोई भी तीन लक्षण होने पर कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया की पहचान होती है।

    • सदमा - किसी भी तरह की साईकोमोटर psychomotor गतिविधि और पर्यावरण के साथ कोई बातचीत नहीं करना।
    • धनुस्तंभ - असामान्य आसन को अपना लेना
    • मोम जैसी आकृति- अगर मरीज की बांह को डॉक्टर एक मुद्रा मे रखता है तो मरीज उसको दोबारा हटाये जाने तक उसी मुद्रा मे रखें रहता है।
    • गूंगापन - सीमित मौखिक प्रतिक्रिया
    • नकारात्मकता - निर्देश व बाहरी उत्तेजनाओं को कम या कोई जवाब नहीं देना
    • पोस्चरिंग-भार के विपरित मुद्रा को धारण करना
    • व्यवहार-अजीब और अतिरंजित कार्यों को करना
    • स्टिरियोटाइप-बिना किसी कारण और मतलब के एक सा काम करते रहना
    • व्याकुलता-बिना किसी कारण के परेशान रहना
    • किसी और की आवाज निकालना व मुंह बनाना

     

    कैटेटोनिक सीजोफ्रेनिया के कारण

    • जेनेटिक्स- सिजोफ्रेनिया का इतिहास रखने वाले परिवार में इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा ज्यादा रहता है।
    • वायरल संक्रमण - हाल के कुछ अध्ययनों  के अनुसार  वायरल संक्रमण  के कारण बच्चों में एक प्रकार का पागलपन के विकास होने की संभावना ज्यादा रहती है।
    • भ्रूण कुपोषण - अगर गर्भावस्था के दौरान भ्रूण कुपोषण से ग्रस्त है, वहाँ एक प्रकार का पागलपन विकसित होने का अधिक खतरा है।
    • प्रारंभिक जीवन के दौरान तनाव - प्रारंभिक जीवन मेंगंभीर तनाव के कारण एक प्रकार के पागलपन के विकास होने का खतरा रहता है।
    • जन्म के समय माता-पिता की आयु - ज्यादा उम्र के माता पिता के बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा रहती है।

     

    कैटेटोनिक सीजोफ्रेनिया का इलाज

    • सीजोफ्रेनिया एक ऐसी स्थिति है जो सारी जिंदगी रहती है, हालांकि कैटेटोनिक लक्षण हमेशा रहे ऐसा जरूरी नहीं है।  सिजोफ्रेनिया के मरीजों को एक स्थायी आधार पर उपचार की आवश्यकता होती है ; यहां तक ​​कि जब लक्षण गायब हो जाये और रोगी को लगने लगे वे बेहतर हो गए हैं। सभी प्रकार के  सिजोफ्रेनिया का इलाज एक ही तरीके से किया जाता है। बीमारी के तथ्यों, गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तरीकों में अंतर हो सकता है।
    • बेंजोडियाजेपाइंस (Benzodiazepines)- ये वर्ग की दवाईयां ट्रैंक्विलाइज़र कहलाती है जो दिमाग को शांत करने में मदद करती है। ये खासतौर से कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के ली होती है। यह नसों में इंजेक्शन के जरिए दी जाती है और बहुत तेजी से अपना असर दिखाती है। ज्यादा समय तक इस दवा का सेवन लत का शिकार भी बना सकता है। इस का प्रयोग कुछ समय के लिए ही करना चाहिए।
    • बार्बीटयूरेट्स (Barbiturates)- इस तरह की दवाएं दर्दनाशक और शांति देने वाली होती है। इसका प्रभाव हल्की बेहोशी से लेकर एनेस्थीशिया जितना होता है। बार्बीटयूरेट्स का प्रयोग  कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के इलाज के तौर पर किया जाता है।


    सामान्य तौर पर 15 से 35 वर्ष के लोग इससे ग्रसित होते हैं। विश्‍व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि आने वाले समय में इस रोग से संबंधित रोगियों की संख्या बहुत ज़्यादा ब़ढ जाएगी। यह बीमारी पुरुष और महिला, दोनों में समान रूप से होती है।

     

    Image Source-Getty 

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