कैंसर में दूध से एलर्जी

Updated at: May 11, 2012
कैंसर में दूध से एलर्जी

कैंसर के मरीजों का पाचन तंत्र बहुत कमजोर होता है इसलिए लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या होती है

Nachiketa Sharma
कैंसरWritten by: Nachiketa SharmaPublished at: May 11, 2012

कैंसर के मरीजों में लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या तब होती है, जब उनका शरीर दूध को पचा नहीं पाता है। लैक्टोज दूध के उत्पादों जैसे- पनीर और आइसक्रीम में पाया जाता है। कैंसर के मरीजों में लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण सामान्य से गंभीर तक हो सकते हैं। लैक्टोज असहिष्णुता के कारण मरीज को कब्ज, पेट में ऐंठन और डायरिया की समस्या हो जाती है। कैंसर के मरीजों में इलाज के बाद यह समस्या एक सप्ताह या एक महीने तक रहती है। लेकिन कभी-कभी लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या जीवन भर के लिए हो जाती है।

 

क्या है लैक्टोज असहिष्णुता –
दूध की एलर्जी को लैक्टोज असहिष्णु‍ता कहते हैं। लैक्टोज प्राकृतिक शुगर की तरह है, जो कि दूध के उत्पादों में पाया जाता है। लैक्टोज दूध के उत्पादों जैसे – पनीर, दही, आइसक्रीम आदि में पाया जाता है। लैक्टोज असहिष्णु‍ता की समस्या पेट में होती है। इसके कारण पेट में दर्द, पेट में सूजन, पेट का फूलना शुरू हो जाता है। लैक्टोज असहिष्णुता के कारण उल्टी, दस्त, मिचली, खाना न पचने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ज्यादातर यह समस्या छोटे बच्चों को होती है लेकिन बडे़ लोगों में पेट की बीमारी के ईलाज के बाद यह समस्या शुरू हो जाती है।

 


 
कैंसर मरीजों में लैक्टोज असहिष्णुता के कारण –

  • कैंसर के मरीज जब रेडिएशन थेरेपी से पेट या श्रोणि का उपचार करवाते हैं तो उनको लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या होती है।
  • कभी-कभी यह समस्या पेट की सर्जरी या पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाली एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग करने के कारण भी हो जाती है।
  • कैंसर के मरीजों का पाचन तंत्र बहुत कमजोर होता है इसलिए लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या होती है।

 

लैक्टोज असहिष्णुता को रोकने के उपाय -

  • कैंसर के मरीजों को पेट की सर्जरी या रेडिएशन थेरेपी कराने के बाद दूध के उत्पादों का सेवन करने से बचना चाहिए ।
  • अगर दूध के उत्पाद का सेवन करना चाहते हैं, तो कोशिश यह कीजिए कि उस उत्पाद में लैक्टोज की मात्रा कम हो या ऐसे खाद्य-पदार्थों का सेवन कीजिए जो लैक्टोज मुक्त हो।  
  • कैंसर के मरीज लैक्टोज मुफ्त या कम लैक्टोज वाले दूध के उत्पादों को चुनें। बाजार में कम लैक्टोज वाले दूध और आइसक्रीम मिल जाएंगे।
  • लैक्टोज असहिष्णुता को रोकने के लिए कैंसर के मरीजों को सोया या चावल के उत्पादों का प्रयोग करना चाहिए ।
  • दही और पनीर में लैक्टोज की मात्रा कम होती है। कैंसर के मरीज दूध उत्पादों में दही और पनीर का सेवन कर सकते हैं।

 

पेट के कैंसर के मरीज कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी से इलाज कराने के बाद दूध के उत्पादों का सेवन कम कर दें। कैंसर के मरीज अपनी आहार योजना में लैक्टोज मुक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन करें। लैक्टोज असहिष्णुता की समस्या से निपटने के लिए अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लीजिए।

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