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कैंसर को सूंघ सकती है नई तकनीक

लेटेस्ट By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 19, 2012
कैंसर को सूंघ सकती है नई तकनीक

नए शोध से ऐसी तकनीक विकसित की गई है जो कैंसर के खर्च को आठ गुना कम करेगी।

 

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Title -  कैंसर को सूंघ सकती है नई तकनीक



वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो आपकी सांसों को सूंघकर कैंसर के बारे में पता लगा सकती है। साथ ही मशीन यह जानकारी भी देगी कि आगे और जांच कराने की जरूरत है या नहीं। इस तकनीक की सबसे कमाल की बात यह है कि इसके जरिए न सिर्फ कैंसर के इलाज में लगने वाला वक्त कम हो जाएगा, बल्कि दावों पर यकीन करें तो यह इलाज पर होने वाले खर्च को भी आठ गुना तक कम कर देगा। 

शिकागो में आयोजित ‘अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल आंकोलॉजी’ में प्रदर्शित इस तकनीक का नाम ‘कैंसर डिटेक्टिंग ब्रेथ एनालाइजर’ है। अभी इसके क्लिनिकल परीक्षण का इंतजार किया जा रहा है। इससे स्तन और फेफडे के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। 

इस तकनीक को विकसित करने वाले ‘जार्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे कैंसर की जांच के दौरान होने वाले खर्च को तो कम किया ही जा सकेगा साथ ही साथ उसमें लगने वाले समय, सिटी स्कैन और मेमोग्राफी के समय होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। 

अनुसंधानकर्ता चार्लेने बायर का कहना है कि मैं ऐसी तकनीक का विकास करना चाहता हूं जो कि सस्ती और सामान्य हो। उनका कहना है कि इस तकनीक में मरीज की सांस को एक विशेष कंटेनर में भरकर जांच किया जाता है। बेयर का कहना है कि यह तकनीक कैंसर के जांच के खर्च को आठ गुना कम कर देगा। 

cancer cellवैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो आपकी सांसों को सूंघकर कैंसर के बारे में पता लगा सकती है। साथ ही मशीन यह जानकारी भी देगी कि आगे और जांच कराने की जरूरत है या नहीं। इस तकनीक की सबसे कमाल की बात यह है कि इसके जरिए न सिर्फ कैंसर के इलाज में लगने वाला वक्त कम हो जाएगा, बल्कि दावों पर यकीन करें तो यह इलाज पर होने वाले खर्च को भी आठ गुना तक कम कर देगा। 

 

शिकागो में आयोजित ‘अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल आंकोलॉजी’ में प्रदर्शित इस तकनीक का नाम ‘कैंसर डिटेक्टिंग ब्रेथ एनालाइजर’ है। अभी इसके क्लिनिकल परीक्षण का इंतजार किया जा रहा है। इससे स्तन और फेफडे के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। 

 

इस तकनीक को विकसित करने वाले ‘जार्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे कैंसर की जांच के दौरान होने वाले खर्च को तो कम किया ही जा सकेगा साथ ही साथ उसमें लगने वाले समय, सिटी स्कैन और मेमोग्राफी के समय होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। 

 

अनुसंधानकर्ता चार्लेने बायर का कहना है कि मैं ऐसी तकनीक का विकास करना चाहता हूं जो कि सस्ती और सामान्य हो। उनका कहना है कि इस तकनीक में मरीज की सांस को एक विशेष कंटेनर में भरकर जांच किया जाता है। बेयर का कहना है कि यह तकनीक कैंसर के जांच के खर्च को आठ गुना कम कर देगा। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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