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ब्रूगाडा सिंड्रोम है गंभीर हृदय रोग

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 22, 2014
ब्रूगाडा सिंड्रोम है गंभीर हृदय रोग

आमतौर पर ब्रूगाडा सिंड्रोम की समस्‍या विरासत में मिलती है। यह समस्‍या तब होती है जब दिल की विद्युतीय गतिविधि बाधित होने पर ब्रूगाडा सिंड्रोम की समस्‍या होती है।

ब्रूगाडा सिंड्रोम असामान्‍य लेकिन दिल के लिए एक गंभीर स्थिति है। इस समस्‍या में अक्‍सर बेहोशी या दिल की धड़कन  असामान्‍य रूप से तेज हो जाती है। यह समस्‍या तब होती है जब दिल की विद्युतीय गतिविधि बाधित हो जाती है। ब्रूगाडा सिंड्रोम आमतौर पर विरासत में मिलती है।

हर किसी को ब्रूगाडा सिंड्रोम होने पर अतालता (दिल में मांसपेशी संकुचन की एक असामान्य दर) का अनुभव नहीं होता है लेकिन जब यह होता है तो बहुत घातक हो सकता है।

 

brugada syndrome in hindi

ब्रूगाडा सिंड्रोम के लक्षण

ब्रूगाडा सिंड्रोम में चेतावनी के संकेत आमतौर पर (उम्र 30-40) वयस्कता में शुरू होते है, लेकिन यह बचपन में जल्‍दी भी प्रकट हो सकते है। इसके लक्षणों में शामिल हैं, बेहोश होना, दिल का दौरा, हृदय की गिरफ्तारी - यानी जब सामान्य दिल की ताल दिल की धड़कन को रोकने का कारण बनती है। और कभी-कभी दिल जोर से धड़कने लगता है।

 

यह कैसे घातक हो सकता है?

यह तब बहुत अधिक घातक हो जाता है जब कभी कभी, असामान्य दिल की ताल वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन (हृदय के संकुचन में तेजी की बेबुनियाद श्रृंखला) का नेतृत्व करती है।

अधिकांश समय में इसे विद्युत को सही किए बिना सामान्‍य दिल की ताल पर वापस नहीं लौटाया जा सकता। और आमतौर पर यह दिल को पम्पिंग रोकने का कारण बनता है।  

ब्रूगाडा सिंड्रोम युवा में अचानक हृदय संबंधी मौत का कारण बनता है। और आमतौर पर अचानक अतालता मृत्यु सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण होती है। कुछ मामलों में इसे अचानक शिशु मृत्‍यु सिंड्रोम का कारण समझा जाता है जो छोटी उम्र में बच्‍चों की मौत का एक प्रमुख कारण है। अफसोस की बात यह है कि ब्रूगाडा सिंड्रोम से होने वाली ज्‍यादातर मौतें बिना किसी चेतावनी संकेत के होती है।  

 

कौन प्रभावित होता है?

ब्रूगाडा सिंड्रोम आमतौर पर युवा और मध्‍यम आयु वर्ग के पुरुषों को प्रभावित करता है। हालांकि यह महिलाओं को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन सेक्‍स हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरोन, जो इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता हैं, इसलिए महिलाओं की तुलना में पुरुषों के संकेत दिखने की अधिक संभावना होती है।

 

symptoms of brugada syndrom in hindi

ब्रूगाडा सिंड्रोम के कारण

ब्रूगाडा सिंड्रोम के साथ किसी के भी दिल की संरचनात्मक सामान्य होती है, लेकिन बिजली की गतिविधि के साथ समस्याएं हो सकती हैं। इसके मूल कारण को ठीक से समझने के लिए, हृदय कोशिकाओं के काम का पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

प्रत्येक हृदय की मांसपेशी कोशिका की सतह पर छोटे छिद्र या आयन चैनल होते हैं। ये खुले और बंद छिद्र सोडियम, कैल्शियम और पोटेशियम परमाणु (आयनों) कोशिकाओं को अंदर और बाहर विद्युत चार्ज करने देते है।  

आयनों का यह मार्ग दिल की विद्युत गतिविधि उत्पन्न करता है। यह विद्युत संकेत नीचे से दिल के ऊपर तक फैलते हैं और दिल से अनुबंध होकर रक्त को पंप करते हैं।  

 

विरासत में मिला ब्रूगाडा सिंड्रोम

वंशानुगत ब्रूगाडा सिंड्रोम के साथ लोगों को उनके माता पिता में से किसी एक से उत्परिवर्तित (बदला) जीन विरासत में मिलाता है।

 

एक्वायर्ड ब्रूगाडा सिंड्रोम

ब्रूगाडा सिंड्रोम के साथ सभी लोगों को इस जीन उत्परिवर्तन नहीं होता, और इसके लिए हमेशा एक परिवार का इतिहास जिम्‍मेदार नहीं होता है। कुछ लोग को ब्रूगाडा़ सिंड्रोम होता है लेकिन इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि, अतालता, एनजाइना, उच्च रक्तचाप और अवसाद के लिए इस्‍तेमाल की जाने वाली दवाएं इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा, कैल्शियम या पोटेशियम का असामान्य रूप से उच्च स्तर और पोटेशियम का असामान्य रूप से निम्न स्तर का ब्रूगाडा सिंड्रोम का कारण होता है।

 

इसका पता कैसे लगाया जाता है?

आमतौर पर दिल ताल और आनुवंशिक हृदय की समस्याओं में माहिर हृदय रोग विशेषज्ञ जांच द्धारा इस बीमारी पता लगाता है। इसके लिए वह ईसीजी और जेनेटिक परीक्षण करता है। ईसीजी में ताल और दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है। जबकि जेनेटिक परीक्षण में दोषपूर्ण SCN5A जीन की पहचान की जाती है।

Image Courtesy : Getty Images

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