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स्तनपान से शिशुओं में ब्‍लड कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप का जोखिम होता है कम

नवजात की देखभाल
By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 21, 2019
स्तनपान से शिशुओं में ब्‍लड कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप का जोखिम होता है कम

स्तनपान से बच्चों में ब्लड कैंसरमधुमेह और उच्च रक्तचाप का जोखिम कम हो जाता है। साथ ही स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता का भी विक

Quick Bites
  • स्तनपान से बच्चों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम।
  • स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता का होता है विकास।  
  • मोटापा  बढ़ने के डर से स्तनपान नहीं कराती महिलाएं।

स्तनपान महिलाओं और नवजातों दोनों के लिए ही फायदेमंद साबित होता है। स्तनपान कराने से बच्चों में ब्लड कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता का भी विकास होता है। स्तनपान की दर में वृद्धि के साथ बच्चों में दस्त संबंधी आधी बीमारियों और सांस संबंधी सभी संक्रमणों में से एक चौथाई को रोका जा सकता है। 

 

धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑनकोलॉजी (ब्रेस्ट कैंसर स्पेशलिस्ट) सीनियर कंसलटेंट डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मां का दूध केवल पोषण ही नहीं, बल्कि जीवन की धारा है। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शिशु को पहले छह महीने तक केवल स्तनपान पर ही निर्भर रखना चाहिए। यह शिशु के जीवन के लिए जरूरी है, क्योंकि मां का दूध सुपाच्य होता है और इससे पेट की गड़बड़ियों की आशंका नहीं होती। 

उन्होंने कहा,  ''मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। इसका कारण यह है कि स्तनपान करानेवाली मां और उसके शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता बहुत मजबूत होता है। इसके अलावा मां के दूध में कई प्रकार के प्राकृतिक रसायन भी मौजूद होते हैं।'' 

मौजूदा वक्त में माताएं बच्चों को स्तनपान कराने से कतराती हैं

माताओं के बच्चों को स्तनपान कराने से कतराने पर डॉक्टर अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्तनपान से महिलाओं में मोटापा सामान्य होता है, जिस कारण शहरों व महानगरों की महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराने से कतराती है। इसी वजह से शहरों में स्तनपान की दर में वृद्धि कम होती है। 

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बच्चों को स्तनपान कराने से होती है कई बीमारियां दूर

बच्चों को स्तनपान कराने से उनमें किसी भी बीमारी के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही स्तनपान कराने से बच्चों में ब्लड कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है। स्तनपान से बच्चे में दमा और कान की बीमारी को नियंत्रण किया जा सकता है, क्योंकि मां का दूध शिशु की नाक और गले में प्रतिरोधी त्वचा विकसित करने में मदद करता है।

जिन बच्चों को स्तनपान कराया जाता है वे आगे चलकर इंटेलिजेंस टेस्ट में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

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स्तनपान करने से बच्चों में विकसित होती हैं कई क्षमताएं 

स्तनपान कराने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। मां के दूध में कई ऐसे विटामिन होते हैं जो बच्चा के दिमाग का विकास करते है। इसके साथ ही बच्चों को स्तनपान कराने से उनकी दृष्टि भी विकसित होती है। 

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Written by
जितेंद्र गुप्ता
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागApr 21, 2019

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