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परवीन बाबी को था सिजोफ्रेनिया रोग, जानें कैसे हुई थी इस मानसिक रोग का शिकार

अन्य़ बीमारियां By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 04, 2019
परवीन बाबी को था सिजोफ्रेनिया रोग, जानें कैसे हुई थी इस मानसिक रोग का शिकार

परवीन बाबी को कई दशकों से उन्हें याद रखने की दूसरी वजह महेश भट्ट की फिल्म 'वो लम्हे' में दिखाई गई परवीन की छवि और प्रेरणा भी है। इस फिल्म के निर्माता महेश भट्ट ने दावा किया था कि यह उनकी यादों पर आधारित (जब वे एक रिश्ते में थे) फिल्म है। आज एक्ट्र

बॉलीवुड की मशहूर ग्लैमर एक्ट्रेस रह चुकी परवीन बाबी हिंदी फिल्म जगत की एक ऐसी एक्ट्रेस थीं जिनके आत्मविश्वास, खूबसूरती, पर्सनेलिटी और अदाओं के आगे आज भी शायद कोई एक्ट्रेस टिक पाए। इन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक नई क्रांति लाने के लिए आज भी याद किया जाता है। 70s और 80s की नंबर वन एक्ट्रेस ज़ीनत अमान और परवीन बाबी का लुक और व्यवहार उस समय की लगभग सभी अभिनेत्रियों से काफी अलग था। इन अभिनेत्रियों का लाइफस्टाइल और पहनावा ऐसा था कि ये उस समय की सबसे बोल्ड और अट्रेक्टिव एक्सेसिस में गिनी जाती थी। परवीन बाबी में इतना आत्मविश्वास था कि लोग इनसे ईर्ष्या करने को मजबूर हो जाते थे।

अगर दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा के लिए आज हॉलीवुड में काम करना और डॉलर्स में पैसे कमाना आसान हो गया है तो इसके लिए कहीं न कहीं इन्हें परवीन बाबी को ही धन्यवाद कहना चाहिए। परवनी बाबी अपने समय में एक ऐसा चेहरा बनकर उभरी थी जिनके साथ बॉलीवुड के साथ साथ हॉलीवुड और अन्य देशों की फिल्म इंडस्ट्री भी काम करने के लिए उत्सुक थी। लेकिन दुख की बात यह है कि पैसा, नाम और शौहरत होने के बाद भी परवनी अंदर से काफी अकेली थी। वह इस चमकती दुनिया में इतनी विरान थी कि भयंकर मानसिक रोग से जूझ रही थी।

कई दशकों से उन्हें याद रखने की दूसरी वजह महेश भट्ट की फिल्म 'वो लम्हे' में दिखाई गई परवीन की छवि और प्रेरणा भी है। इस फिल्म के निर्माता महेश भट्ट ने दावा किया था कि यह उनकी यादों पर आधारित (जब वे एक रिश्ते में थे) फिल्म है। आज एक्ट्रेस परवीन बाबी की 69वीं बर्थ एनिवर्सिरी पर हम आपको बता रहे हैं कि फिल्मी जगत की चमकती और चहकती दुनिया में भी वह इतनी अकेली और तन्हा थीं कि एक ऐसे मानसिक रोग से जूझ रही थी जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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सिजोफ्रेनिया नामक और परवीन बाबी

डॉक्टरों का कहना था कि परवनी को सिजोफ्रेनिया नामक एक भयंकर मानसिक बीमारी है। इसी बीमारी की वजह से अजीब अजीब हरकते करती थीं। यह बीमारी किसी व्यक्ति को तब होती है जब वह अंदर से काफी अकेला और डरा हुआ होता था। परवीन के साथ भी कुछ ऐसा ही था, जिस वजह से वह इस रोग की चपेट में आईं। डॉक्टर्स कहते थे कि परवीन की हालात बहुत बिगड़ी हुई है ऐसे में अगर उन्हें सही करना मुमकिन है तो उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक देने होंगे लेकिन उनके ब्वॉयफ्रेंड महेश भट्ट इस चीज के सख्त खिलाफ थे। तमाम इलाज के बावजूद परवीन की ये बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स और तमाम इंटरव्यू में इस बात का भी दावा किया जाता है कि परवीन बाबी डायबिटीज और गैंगरीन नामक बीमारी से भी जूझ रही थी। इस बीमारी के चलते ही उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। 20 जनवरी, 2005 को परवीन बाबी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी मौत किसी बीमारी से हुई या उन्होंने आत्महत्या की, यह बात आज भी एक राज बनी हुई है।

जानें क्या है सिजोफ्रेनिया रोग

सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का सटीक पता लगाना अब भी वैज्ञानिकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा ने इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित इम्पासिज नामक उपकरण तैयार किया है। परीक्षण के दौरान इस उपकरण ने सिजोफ्रेनिया के 87 फीसद मरीजों में बीमारी का सटीक पता लगाया। सिजोफ्रेनिया के मरीज वास्तविक दुनिया से कट जाते हैं। इस बीमारी से ग्रसित दो मरीजों के लक्षण हर बार एक जैसे नहीं होते। ऐसे में इस बीमारी का पता लगाना कठिन हो जाता है। भारतवंशी वैज्ञानिक सुनील कलमाडी का कहना है कि एआई तकनीक से इसका सटीक पता लग सकता है। इम्पासिज को सिजोफ्रेनिया से ग्रसित ऐसे मरीजों का डाटा लेकर बनाया गया है जो उस वक्त कोई दवा नहीं ले रहे थे। इससे शुरुआत में बीमारी का पता लग सकता है।

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सिजोफ्रेनिया के लक्षण

इलाज में मार्डन तकनीकी की वजह से पहले की तुलना में अब कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया कम पाया जाता है। सिजोफ्रेनिया की बजाय कैटेटोनिक को न्यूरोडेवलेपमेंटल (एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने के समय प्रभावित करती है), साइकोटिक बाइपोलर, और डिप्रेसिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक बीमारियों में ज्यादा देखा जाता है। कैटेटोनिया के रोगी को अत्यधिक और कम मोटर गतिविधि के बीच में देखा जा सकता है। माडर्न तकनीकी की वजह से कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के मरीज अपने लक्षणों को आसानी से समझने लगे है, जिससे उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो गई है।

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