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कैंसर की रोकथाम के लिए प्रयोग हो सकेगी हाइपरटेंशन की मेडिसिन

लेटेस्ट By एजेंसी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 03, 2013
कैंसर की रोकथाम के लिए प्रयोग हो सकेगी हाइपरटेंशन की मेडिसिन

जानिए इस नये शोध के बारे में, कैसे ब्‍लड प्रेशर की दवा से कैंसर जैसी घातक बीमारी की रोकथाम में मिलेगी मदद।

Blood Pressure Medications Will Help Treat Cancerअब ब्‍लड प्रेशर की दवा से कैंसर की रोकथाम में मदद मिलेगी। आमतौर पर ब्लड प्रेशर के लिए इस्तेमाल होने वाली एक दवा कैंसर से लड़ने में मददगार साबित हो सकती है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, लोसार्टन नामक यह मेडिसिन ट्यूमर की रक्त वाहिकाओं को खोलती है जिससे कैंसर रोगियों को लाभ मिल सकता है। शोधकर्ताओं ने पया कि कैंसर की परंपरागत दवाओं के साथ ही लोसार्टन के इस्तेमाल से मरीजों की उम्र बढ़ सकती है।

 

नेचर कम्युनिकेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक इसका सफल परीक्षण चूहों पर हो चुका है। अब डॉक्टरों की योजना अग्नाशय के कैंसर के रोगियों को लोसार्टन देने की है।

 

कैंसर का इलाज बहुत मुश्किल है, कैंसरग्रस्‍त लोगों में केवल 5 प्रतिशत ही इस बीमारी के होने के बाद मात्र पांच साल तक जिंदा रह पाते हैं। इसकी खास वजह यह है कि इस बीमारी के दस रोगियों में केवल एक के ट्यूमर का ही ऑपरेशन संभव हो पाता है।

 

अमरीका में मेसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के जांचकर्ता ऐसे स्वयंसेवी मरीजों को भर्ती कर रहे हैं जिनके अग्नाशय के कैंसर का ऑपरेशन संभव नहीं है। इन मरीजों पर लोसार्टन और कीमोथेरपी के संयोजन वाली नई दवा का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि यह ईलाज पूरी तरह कारगर है या नहीं इस पर संशय है।

 

लोसार्टन से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है, जिससे वो अधिक खून का संचार कर पाती हैं और इससे दबाव कम हो जाता है। मेसाचुसेट्स के दल ने पाया कि इस दवा से स्तन और अग्नाशय कैंसर से पीड़ित चूहों को फायदा मिला।

 

इसका प्रयोग करने से ट्यूमर में और उसके आसपास रक्त के प्रवाह में सुधार देखा गया। इस स्थिति में लक्ष्य तक अधिक मात्रा में कीमोथेरपी की दवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। सिर्फ प्रचलित कीमोथेरपी इलाज के बजाए चूहों को यह इलाज दिया गया और वो लंबे समय तक जिंदा रहे।


कैंसर रिसर्च यूके की एम्मा स्मिथ ने इस बारे में बताया, "चूहों पर किया गया यह रोचक अध्ययन इस बात पर रोशनी डालता है कि हाईपरटेंशन की दवाएं आखिर क्यों कीमोथेरपी के असर को बढ़ा सकती हैं। लेकिन अभी तक हम यह नहीं जानते हैं कि वो ठीक उसी तरह इंसानों पर भी काम करेंगी।"

 

 

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