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    हाइपोथायराइडिज्‍म के प्राकृतिक उपचार के लिए प्रोटीन और विटामिन युक्‍त आहार है जरूरी

    हाइपरथायरायडिज्‍़म By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 06, 2013
    हाइपोथायराइडिज्‍म के प्राकृतिक उपचार के लिए प्रोटीन और विटामिन युक्‍त आहार है जरूरी

    hypothyroidism ka prakritik upchaar in hindi : हाइपोथायराइडिज्‍म से बचाव के लिए प्राकृतिक उपचार बहुत कारगर है, जानिए प्राकृतिक उपचार में क्‍या-क्‍या आते हैं।

    थायराइड इंडोक्राइन ग्रंथि है जो गले में होती है। छोटी सी यह ग्रं‍थि शरीर के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है, शरीर का स्‍वास्‍थ्‍य इस ग्रंथि पर भी निर्भर करता है। यह ग्रंथि शरीर में हार्मोन का स्राव करती है। यह ग्रंथि शरीर को ऊर्जा पदान कर मेटाबॉलिज्‍म को सुचारू करती है। थायराइड रोग को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

    Hypothyroidism Natural Treatmentहाइपोथायरायडिज्म की समस्‍या तब होती है जब थायरॉयड ग्‍लैंड शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करता है। इसे थायराक्सिन हार्मोन कहते हैं, इसकी कमी के बिना शरीर की गति धीमी पड़ जाती है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना हाइपोथायरायडिज्म के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। आइए हम आपको हाइपोथाइराइड के इलाज के लिए प्राकृतिक उपचार के बारे में बताते हैं।

    हाइपोथाइराइडिज्‍म के लिए प्राकृतिक उपचार


    प्रोटीन का सेवन

    हाइपोथायराइडिज्‍म की समस्‍या से निपटने के लिए प्रोटीन का ज्‍यादा सेवन करें। प्रोटीन आपके शरीर के सभी अंगों में थायराइड हार्मोन के संचार को सुचारु करता है। नट्स जैसे बादाम और अखरोट ज्‍यादा खायें। मटन, मछली और अंडे में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। चना, मटर, मूंग, मसूर, उड़द, सोयाबीन, राजमा, गेहूं आदि में प्रोटीन मौजूद होता है।

     

    कैफीन और शुगर

    हाइपोथायराइडिज्‍म के उपचार के लिए शुगर और कैफीन का सेवन कम कर दें। इसके अलावा आटा जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन भी कम मात्रा में करें, इससे भी शुगर की मात्रा बढ़ती है। अनाज वाले कार्बोहाइड्रेट पदार्थों का सेवन कम करें और ऐसी सब्जियां खायें जिसमें स्‍टार्च कम हो।

     

    मोटापा है दोस्‍त

    हालांकि मोटापा कई बीमारियों का कारण बनता है, लेकिन हाइपोथायराइडिज्‍म से ग्रस्‍त लोगों के लिए मोटापा दोस्‍त है। लेकिन कोलेस्ट्रॉल हार्मोनल रोगों की तरफ ले जाने वाला रास्ता है। यदि आपका फैट और कोलेस्ट्रॉल असामान्य रूप से बढ़ रहा है तो आप हार्मोनल असंतुलन को गले लगा रहे हैं और थायरइड होने की संभावना को बढ़ा रहे हैं। इसके लिए ऑलिव ऑयल, घी, नाशपाती, मछली, बादाम और अखरोट, पनीर, दही और नारियल का दूध फैट के अच्‍छे स्रोत हैं।

     

    पोषक तत्‍व

    हालांकि पोषक तत्वों की कमी से थायराइड नहीं होता है, लेकिन पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों की कमी से थायराइड के लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए विटामिन डी, आयरन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, सेलेनियम, जिंक, विटामिन ए, विटामिन बी और आयोडीन खाने में शामिल कीजिए।

     

    आयोडीन है जरूरी

    थायराइड की समस्‍या के लिए आयोडीन की कमी काफी हद तक जिम्‍मेदार होता है। ऐसा माना जाता है कि आयोडीन की कमी से भी थायराइड होता है। अंडे, शतावरी, मशरूम, पालक, तिल के बीज, और लहसुन से भी आयोडीन प्राप्त होता है। समुद्री मछलियों में भी आयोडीन होता है।

     

    ओमेगा-3 फैटी एसिड

    हाइपोथायराइडिज्‍म के उपचार के लिए ओमेगा3 फैटी एसिड का सेवन कीजिए। मछली (खासकर समुद्री मछलियों में), ग्रास फेड पशु उत्पाद में, सन बीज और अखरोट में ओमेगा-3 पाया जाता है। यह ऐसे हारमोंस को रोकता है जिनसे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और कोशिकाओं का विकास होता है। यह थायरॉयड के लिए खतरा बनने वाले हार्मोंस को रोकता है।

     

    इनसे बचें

    गोईट्रोजेंस के प्रति जागरूक रहें और गोईट्रोजेंस वाले खाद्य- पदार्थों का ज्यादा सेवन करने से बचें, इससे थायरॉयड ग्रंथि प्रभावित होती है। गोईट्रोजेंस वाले पदार्थों में ब्रसेल्‍स, स्‍प्राउट्स, ब्रोकोली, गोभी, फूलगोभी, शलजम, बाजरा, पालक, स्ट्रॉबेरी, आड़ू, मूंगफली, मूली और सोयाबीन आदि शामिल हैं।


    ये भी खायें

    ग्लूटाथिओनयुक्‍त आहार खायें, यह एंटीऑक्सीडेंट है जो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। यह इम्यून सिस्टम को ठीक और नियंत्रित करने की क्षमता भी प्रदान करता है। यह थायरॉयड ऊतको की रक्षा भी करता है। शतावरी, आड़ू, नाशपाती, लहसुन, स्क्वैश, अंगूर और कच्चे अंडे आदि में ग्लूटाथिओन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

     

    आंत की जांच

    हाइपथायराइडिज्‍म की समस्‍या होने पर आंतों की जांच करायें। 20 प्रतिशत से ज्यादा थायराइड फंक्शन आंत के हेल्दी बैक्टीरिया की आपूर्ति पर निर्भर करते हैं, इसलिए प्रोबायोटिक्स (यह वह बैक्टीरिया है जो आंत के लिए अच्छा है) को सप्लीमेंट के रूप में लेना अच्छी बात है।

     

    थकान और तनाव

    एड्रिनल थकान का ध्यान रखें, थायराइड और एड्रिनल ग्रंथि में गहरा संबंध है इसलिए एड्रिनल के कुछ लेवल्स के बिना भी हाइपोथायरायडिज्म होना असामान्य है। तनाव बिलकुल ना लें, क्‍योंकि थायराइड का सीध संबंध आपकी तनाव प्रतिक्रिया से भी है।

     

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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