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बौद्ध विधियों से अपने दैनिक जीवन को ऐसे बनायें खुशहाल

तन मन By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 11, 2016
बौद्ध विधियों से अपने दैनिक जीवन को ऐसे बनायें खुशहाल

बौद्ध शिक्षाओं में उल्लेख है कि हमारे जीवन की जो भी परेशानियां हैं, वे कुछ विशेष कारणों की वजह से हैं। इसलिए हमें बेहद ईमानदारी व गहनता से अन्तरावलोकन करना चाहिए कि दरअसल हमारे जीवन की वे कौन सी समस्याएं हैं जिनका हम सामना कर रहे हैं।

Quick Bites
  • बौद्ध धर्म में दुखों और उन्हें काबू करने के उपायों की जानकरी।
  • उद्देश्य, दुखों पर विजय प्राप्त करने में लोगों की मदद करना है।
  • चार आर्य सत्य से जीवन को सरल और आनंदमय बनाया जा सकता है।
  • यह खोज निकालना चाहिए कि हमारी समस्याओं के कारण क्या हैं।

बौद्ध धर्म में दुखों और उन्हें काबू करने के उपायों के बारे में काफी बात की गई है। गौर से समझा जाए तो बुद्ध की अधिकांश शिक्षाओं का उद्देश्य जीवन के दुखों पर विजय प्राप्त करने में लोगों की मदद करना है। बौद्ध शिक्षाओं में उल्लेख है कि हमारे जीवन की जो भी परेशानियां हैं, वे कुछ विशेष कारणों की वजह से हैं। इसलिए हमें बेहद ईमानदारी व गहनता से अन्तरावलोकन करना चाहिए कि दरअसल हमारे जीवन की वे कौन सी समस्याएं हैं जिनका हम सामना कर रहे हैं। तो चलिये आज बौद्ध की ऐसी ही कुछ लाभदायक विधियों के बारे में समझने की कोशिश करते हैं, जिनका पालन कर हम अपने दैनिक जीवन को खुशहाल बना सकते हैं -

 

चार आर्य सत्य

चार आर्य सत्य का पालन कर जीवन को सरल और आनंदमय बनाया जा सकता है। दरअसल बुद्ध की पहली शिक्षा को “चार आर्य सत्य” के नाम से जाना जाता है। इसका अर्थ होता है, चार ऐसे तथ्य जिन्हें सभी अभिज्ञ जन, जो यथार्थ को समझते हैं, सही मानते हैं। और ये चार सत्य निम्न प्रकार से हैं -

  • यथार्थ दुख जिनका हम सभी मनुष्य सामना करते हैं।
  • इन दुखों के यथार्थ कारण।
  • यदि इन यथार्थ दुखों को सच्चे अर्थ में समाप्त किया जा सके ताकि ये दुख हमें फिर कभी पीड़ित न कर सकें तो कैसा हो।
  • ज्ञान, आचरण आदि की वह रीति जिसका पालन करने से सभी दुखों से हमारी मुक्ति सम्भव है।

 

Buddha Methods in Daily Life in Hindi

 

 

समस्याओं का ईमानदारी से अवलोकन

हममें से बहुत से लोगों के लिए अपने जीवन की असल समस्याओं को जान पाना कोई बहुत आसान प्रक्रिया नहीं है। दरअसल अपने जीवन के कठिनाई वाले पलों का ईमानदारी से अवलोकन करना बेहद पीड़ादायक होता है। बड़ी संख्या में लोग इस पक्ष को अस्वीकार करने की स्थिति में रहते हैं। वे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते कि वे समस्याओं (उदाहरण के लिए किसी अस्वस्थ सम्बंध की समस्या) का सामना कर रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके वे दुख भोग रहे होते हैं। लेकिन हम अन्तरावलोकन करने के बाद बात को सिर्फ “मैं दुखी हूं” के स्तर पर नहीं छोड़ सकते हैं। हमें गहराई में झांक कर देखना चाहिए कि दरअसल परेशानियां क्या हैं।

 

हमारी परेशानियों के यथार्थ कारण

हमें पड़ताल करके यह खोज निकालना चाहिए कि हमारी समस्याओं के कारण क्या हैं। समस्याएं खुद, अकारण तो नहीं होती हैं। उनके पीछे कोई न कोई वजह तो जरूर होना चाहिए, और ऐसे बहुत सी वजहें होती भी हैं जो किसी स्थिति को परेशानी भरा बनाती हैं। उदाहरण के तौर पर, जब किसी सम्बंध में व्यक्तित्व के आधार हुए झगड़ों में इसके अलावा स्थिति को और बदतर बनाने वाले और भी कारक हो सकते हैं, जैसे आर्थिक कारण, बच्चों से सम्बंधित समस्याएं या दूसरे सम्बंधियों से जुड़ी समस्याएं आदि। कई तरह की परिस्थितियां समस्या को बढ़ा रही हो सकती हैं। लेकिन बुद्ध के अनुसार हमें अपनी समस्याओं के गहनतम कारण को जानने के लिए गहरे, और गहरे जाना होगा और, हमारी समस्याओं का सबसे गहरा कारण वास्तविकता के बारे में हमारा भ्रम या अज्ञान है।

 

हमारी समस्याओं का यथार्थ अंत

समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म कर देना सम्भव है, और ऐसा करने के लिए हमें समस्याओं को उत्पन्न करने वाले कारणों को दूर करना होगा। अगर ईंधन ही नहीं होगा तो आग भी नहीं लगेगी और बुद्ध के अनुसार इन समस्याओं से इस प्रकार मुक्त होना सम्भव है कि वे दुबारा न लौट सकें। हमारे लिए दुख पैदा करने वाली समस्या का कारण यह भी हो सकता है कि हम हर समय चिन्ता करते हैं। कोई भी चिन्तामग्न (अनायास करणों की) रहते हुए खुश नहीं रह सकता है। भारत के महान बौद्ध आचार्य शांतिदेव ने कहा था कि अगर आप किसी ऐसी मुश्किल हों जिसे बदलने के लिए आप कुछ कर सकते हैं, तो फिर चिन्ता करने की क्या जरूरत है? बस, उस स्थिति को बदल दीजिए। चिन्ता करने से तो कोई फयदा होने नहीं वाला है। और, अगर आप उस स्थिति को बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं, तो फिर चिन्ता करने से भी क्या फायदा? यहां भी चिन्ता करने से कोई फायदा नहीं होगा। इस तरह चिन्ता को लेकर हमारे मन में भ्रम की स्थिति होती है, और इसलिए हम चिन्ता करते रहते हैं। आशय यह है कि चिन्ता करने से कोई लाभ नहीं हैं।

 

लेकिन बौद्ध विधियां यह भी नहीं कहती कि आप चुपचाप अपनी समस्याओं को स्वीकार कर लें और समस्याओं में ही जीते रहें। क्योंकि यह भी कोई समाधान नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से हम खुद को असहाय महसूस करते हैं, जहां हमारे हाथ में कुछ नहीं है, इसलिए हम हार मान लेते हैं और स्थिति को बदलने की कोशिश भी नहीं करते हैं। अपनी समस्याओं से जूझकर उन पर विजय पाने का प्रयास करना बेहद जरूरी है। अगर हम अपने प्रयत्न में बहुत सफल न भी हो पाएं तब भी हमें यह तसल्ली रहती है कि कम से कम हमने प्रयास तो किया।

 

Image Source - Getty

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Written by
Rahul Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJan 11, 2016

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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