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भ्रमण प्राणायाम के फायदे

योगा By Devendra Tiwari , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 30, 2016
भ्रमण प्राणायाम के फायदे

bhraman pranayam in hindi : भ्रमण प्राणायाम घूमने वाला प्राणायाम कहते हैं। इसे कैसे करें और इसके नियमित अभ्‍यास से क्‍या फायदें हैं, इसके बारे में इस लेख में चर्चा करते हैं।

Quick Bites
  • भ्रमण प्राणायाम का अभ्‍यास टहलते हुए कर सकते हैं।
  • शुरूआत में इसका अभ्‍यास आघे घंटे ही कीजिए।  
  • इस प्राणायाम को साफ-स्‍वच्‍छ जगहों पर ही करें।
  • यह कई बीमारियों से बचाकर आपको स्‍वस्‍थ रखता है।

शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए प्राणायाम भी कर सकते हैं। प्राणायाम भी कई तरह के होते हैं, उनमें से एक है भ्रमण प्राणायाम। भ्रमण यानी टहलना, यानी ऐसा प्रणायाम जो टहलते हुए किया जा सकता है। इसलिए इसे भ्रमण यानी घूमने वाला प्राणायाम कहते हैं। इसे कैसे करें और इसके नियमित अभ्‍यास से क्‍या फायदें हैं, इसके बारे में इस लेख में चर्चा करते हैं।

bhraman pranayam in hindi


भ्रमण प्राणायाम कैसे करें  

भ्रमण प्राणायाम करते हुए शरीर को सीधा रखें और सांस धीरे-धीरे लें। सांस लेते हुए मन में 1 से 4 तक की गिनती करें और पूर्ण रूप से सांस लेने के बाद ही सांस छोड़ें। मन में संख्या की गिनती करें। इस प्राणायाम में सांस लेने से अधिक समय सांस छोड़ने में लगाना चाहिए। इस क्रिया में पहले चलते हुए सांस को 4 से 5 कदम तक रोक कर रखें और फिर छोड़ें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस रोकने की क्षमता को बढ़ाते हुए 10 से 15 बार तक करें। शुरूआत में इस क्रिया का अभ्‍यास आघे घंटे तक कीजिए। यानी टहलने की शुरुआत में 2 मिनट, बीच में 2 मिनट और अंत में 2 मिनट तक अभ्यास करें। इसके बाद समय को बढ़ाते हुए 4-4 मिनट पर 3 बार करें।


इस बात का ध्‍यान रखें  

भ्रमण प्राणायाम को को साफ स्वच्छ सड़कों, पार्कों या मैदानों में ही करें। यह अधिक उम्र की महिलाओं और पुरुषों के लिए अधिक लाभकारी है। इसका अधिक फायदा लेने के लिए भोजन पौष्टिक और सही समय पर करें।


सावधानी बरतें

सांस लेने व छोड़ने की क्रिया सामान्य रूप से करें। इसके अभ्यास को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही बढ़ाएं। इस प्राणायाम के अभ्यास के समय सीने के बाईं ओर जरा सा भी दर्द महसूस हो तो समझ लें कि अभ्यास आपकी शारीरिक क्षमता से अधिक हो रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ समय तक अभ्यास बंद करके आराम करें और ठीक होने के बाद दुबारा इसे शुरू करें।


इसके फायदे  

इसके अभ्यास से फेफड़ों में मजबूती आती है। इसका अभ्यास प्रतिदिन करने से तपेदिक, टीबी यानी क्षयरोग, प्लूरिसी, श्‍वांस संबंधी बीमारी, टायफाइड, इन्फ्लूएंजा जैसे रोगों से बचाव होता है। इसका अभ्‍यास करने से दिल मजबूत होता है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी कम होती है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है। इसके अभ्यास से बालों के सभी रोग भी खत्म होते हैं।

इस लेख से संबंधित किसी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए आप यहां पोस्‍ट/कमेंट कर सकते है।

Image Source : Getty

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Written by
Devendra Tiwari
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 30, 2016

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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