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पेट की चर्बी बढ़ा सकती है दिल की बीमारियों का खतरा, जानें एक्सपर्ट की राय

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By नीरा ढिंगरा , विशेषज्ञ लेख / Oct 03, 2018
पेट की चर्बी बढ़ा सकती है दिल की बीमारियों का खतरा, जानें एक्सपर्ट की राय

दुनियाभर के आंकड़े बताते हैं कि इंसानों में मौत का सबसे बड़ा कारण कार्डियोवस्कुलर डिजीज यानी दिल की बीमारियां हैं। हर 10 में से 7 भारतीयों को मोटापे के कारण दिल की बीमारियों का खतरा होता है। इससे बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी बहुत जरूरी है।

दुनियाभर के आंकड़े बताते हैं कि इंसानों में मौत का सबसे बड़ा कारण कार्डियोवस्कुलर डिजीज यानी दिल की बीमारियां हैं। साल 2016 में दिल की बीमारियों से लगभग 17 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। 1990 के मुकाबले 2016 में भारत में दिल की बीमारियों से मरने वालों की संख्या 34 गुना ज्यादा बढ़ गई थी। ये आंकड़े बताते हैं कि हमें दिल के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग रहने की जरूरत है। भारतीय लोगों में दिल की बीमारियों का एक प्रमुख पेट की चर्बी है। हर 10 में से 7 भारतीयों को मोटापे के कारण दिल की बीमारियों का खतरा होता है। इससे बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी बहुत जरूरी है।

क्या है बेली फैट?

कई बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति पूरे शरीर से दुबला-पतला या सामान्य लगता है मगर उसके कमर के आस-पास चर्बी जमा होती है। इस तरह की चर्बी टाइट कपड़े पहनने पर बाहर से दिखाई देती है। इसी को बेली फैट कहते हैं। पेट के आस-पास चर्बी जमने से मेटाबॉलिक डिसआर्डर्स शुरू हो जाते हैं, खासकर कार्डियक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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कैसे पता लगाएं कि आपके पेट और कमर पर चर्बी है?

पेट की चर्बी को जांघ या हिप्स की चर्बी से ज्यादा खतरनाक माना जाता है। आपके पेट या कमर में कितनी चर्बी जमा है, इसका पता लगाना है तो आप कमर नापने वाले मीटर का प्रयोग कर सकते हैं। भारतीयो में आमतौर पर पुरुषों के लिए 90 सेन्टी मीटर या इससे ज्यादा और महिलाओं के लिए 80 सेन्टीमीटर या इससे ज्यादा कमर होना खतरे की घंटी माना जाता है। इसके अलावा इसका पता लगाने के लिए आप वेस्ट टू हिप (WHR) रेशियो निकाल सकते हैं। 0.85 से ज्यादा WHR महिलाओं के लिए और 1.0 से ज्यादा WHR पुरुषों के लिए खतरनाक हो सकता है और इसके कारण दिल की बीमारियों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

पेट की चर्बी और दिल की बीमारियां

हार्ट यानी दिल हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि ये पूरे शरीर को ऑक्सीजन और पोषक तत्व सप्लाई करता है। इसलिए इसका स्वस्थ रहना जरूरी है। ऐसे कई कारण हैं, जिनसे हार्ट को फंक्शन करने में परेशानी होती है, उन्हीं में से एक पेट की बढ़ हूई चर्बी भी है।
आपके पेट के आस-पास जितनी ज्यादा चर्बी जमा होगी, दिल की बीमारियों का खतरा भी उतना ही ज्यादा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मोटापे के कारण ट्राईग्लिसराइड्स और एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ जाता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर भी सामान्य से ज्यादा तेज हो जाता है। एलडीएल के बढ़ने से ट्राईग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल मिलकर धमनियों में प्लाक बना लेते हैं। इन प्लाक के कारण धमनियां सकरी हो जाती हैं और रक्त को हृदय तक पहुंचने में परेशानी होती है। यही हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है।

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भारतीयों में क्यों ज्यादा होती है पेट की चर्बी?

ज्यादातर भारतीय लोगों में पेट की चर्बी और मोटापे का कारण अनुवांशिक होता है। इसलिए हमें पेट की चर्बी कम करने और मोटापा घटाने के लिए एक्सरसाइज और डाइट दोनों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि भारतीय खान-पान भी इस प्रकार का है कि इससे मोटापा घटाना आसान नहीं है। भारतीय खान-पान में शुगर (चीनी) का प्रयोग बहुत होता है। ज्यादातर भारतीय त्यौहार बिना मिठाई और मीठी चीजों के अधूरे हैं। इसके अलावा भारतीय खानों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे- बासमती चावल, तेल में छने-बने आहार, मैदा आदि का प्रयोग भी खूब होता है।

पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या करें?

आपको बता दें कि फ्राईड चीजें अपने आप में कोई समस्या नहीं हैं और न ही मोटापे का कारण बनती हैं मगर इसे फ्राई करने के लिए जिस तेल का इस्तेमाल किया जाता है उसमें सैचुरेटेड फैट बहुत ज्यादा होता है। इसलिए जानवरों से प्राप्त होने वाले फैट जैसे- मक्खन, क्रीम, पनीर आदि का इस्तेमाल बहुत ज्यादा नहीं करना चाहिेए। इसके अलावा यह भी बहुत जरूरी है कि आप सस्ते वेजिटेबल ऑयल (वनस्पति तेल) का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसमें हाइड्रेजेनेटेड फैट होता है। इस तरह का सैचुरेटेड फैट पैकेटबंद आहारों, बिस्किट, कंफेक्शनरी, फ्रेंच फाइज और अन्य फास्ट फूड्स से मिलता है। ये फैट खतरनाक होता है क्योंकि इससे शरीर में एलडीएल की मात्रा बढ़ जाती है।

आपको ऐसे तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें PUFA(पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड) और MUFA(मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड) की मात्रा ज्यादा हो। इनके प्रयोग से एलडीएल का लेवल कम रहता है।

अमेरिकन हार्ट एसोशियन की एजवाइजरी (2015-2020) के अनुसार अगर आप सैचुरेटेड फैट की जगह पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड का प्रयोग करते हैं, तो इससे दिल की बीमारियों की संभावना 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

यह पहले ही बताया जा चुका है कि बेली फैट बढ़ने से रक्त में एलडीएल और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इसे घटाने के लिए आपको रोजाना थोड़ी शारीरिक मेहनत (फिजकल एक्टिविटी) करनी चाहिए और खान-पान में सावधानी रखनी चाहिए। इससे आपका दिल लंबे समय तक स्वस्थ रहेगा।

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