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Teenager बच्चों के साथ कभी ना करें ऐसा बर्ताव, हो सकता है खतरनाक!

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 10, 2017
Teenager बच्चों के साथ कभी ना करें ऐसा बर्ताव, हो सकता है खतरनाक!

बच्चों का जि़द करना स्वाभाविक है। अगर उनकी मांगें पूरी न की जाएं तो अपनी बात मनवाने के लिए वे रोने-चिल्लाने जैसी हरकतें करते हैं। 

बच्चों का जि़द करना स्वाभाविक है। अगर उनकी मांगें पूरी न की जाएं तो अपनी बात मनवाने के लिए वे रोने-चिल्लाने जैसी हरकतें करते हैं। अगर आप कहीं शॉपिंग पर जा रहे हैं तो उससे पहले एक लिस्ट जरूर बनाएं। जिसमेंं बच्चों की मांगे जरूर शामिल करें। अगर उसे कुछ लेना है तो उस वस्तु का नाम लिस्ट में दर्ज करवा दें। साथ ही बच्चों को पहले ही बता दें कि उसे सिर्फ यही चीजें खरीदनी हैं। इसके अलावा उसे कुछ और नहीं दिलवाया जाएगा। उसकी ऐसी आदत को किसी भी हाल में बढ़ावा न दें। अगर आप एक बार उसकी बात मान लेंगी तो वह ऐसी हरकतों को अपना हथियार बना लेंगे।

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इकलौते बच्चों की समस्या

अक्सर इकलौते बच्चे अपनी हार स्वीकार नहीं पाते। ऐसे में पेरेंट्स का फर्ज़ बनता है कि वो अपने बच्चे को समझाएं कि जीवन में हार-जीत और खुशी-गम का आना-जाना लगा रहता है। आप उसके साथ नियमित रूप से क्वॉलिटी टाइम बिताएं। उसे दूसरे बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। उसके मन में यह विश्वास जगाएं कि जीत की तरह हार भी सहज है। चाहे वह जीते या हारे दोनों ही स्थितियों में आप उसे भरपूर प्यार देंगी। 

परफेक्ट बनने के लिए ना कहें

कोई भी बच्चा हर काम में परफेक्ट नहीं होता। इसलिए आप अपने बच्चे की अन्य योग्यताओं को उभारने की कोशिश करें। हो सकता है कि उसे परफेक्ट बनाने की कोशिश में आप उसे बार-बार रोकते-टोकते हों और उसके हर काम में गलतियां निकालती हों। ध्यान रहे कि वह अभी टीनएज में है। लगातार ऐसा करने पर वह आपसे दूर हो जाएगा और आपके साथ उसका भावनात्मक बंधन कमजोर पड़ सकता है। 

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बात-बात पर ना टोकें

किसी भी काम के लिए अपने बच्चों को बार-बार टोकना छोड़ दें। इससे चिढ़कर वह आपकी बातों को नज़रअंदाज़ करने लगेगी। अनुशासित करने के लिए उसे प्यार से समझाएं कि घर के कुछ कार्यों को लेकर आप उससे कुछ अपेक्षाएं रखती हैं। जब वह अपने छोटे-छोटे कार्यों से आपकी उम्मीदें पूरी करती है तो आपको बेहद खुशी होती है। आप उसके साथ बातचीत करके उसकी सहमति के आधार पर घरेलू कार्यों के लिए दो-तीन नियम बनाएं और उनका सही ढंग से पालन करने को कहें। जब वह अनुशासन के नियमों का अच्छी तरह पालन करे तो उसे शाबाशी देना न भूलें।

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