गर्भ में ही हो जाती है बुढ़ापे की शुरुआत

Updated at: Apr 25, 2016
गर्भ में ही हो जाती है बुढ़ापे की शुरुआत

इंसान के बूढ़े होने की प्रक्रिया मां के गर्भ में ही शुरू हो जाती है। ये एक तरह की मेडिकल बीमारी जैसी है जिसके प्रति थोड़ी सी सावधानी बरत कर नवजात के बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।

Gayatree Verma
लेटेस्टWritten by: Gayatree Verma Published at: Apr 25, 2016

अगर आप हमेशा अपनी बढ़ रही उम्र को लेकर चिंता में रहते हैं तो आपकी चिंता बेकार है। हाल ही में आई एक रिसर्च से पता चला है कि इंसान के बुढ़ापे की शुरुआत गर्भ में ही हो जाती है। यह रिसर्च ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने की है। इस रिसर्च की अगुवाई प्रोफेसर डीनो जुसानी ने की।

 

टेलोमेरस से पता चलती है उम्र

इंसान के डीएनए का डेटा क्रोमोजोम पर दर्ज होता है। इंसान के शरीर में क्रोमोजोम के 23 जोड़े होते हैं और क्रोमोसोम के आखिरी छोर को टेलोमेरस कहते हैं। टेलोमेरस क्रोमोसोम को बांधकर रखने का काम करता है। जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है टेलोमेरस छोटा होने लगता है। टेलोमेरस की लंबाई से उम्र का पता लगाया जा सकता है। इस पर ही वैज्ञानिकों ने शोध कर ये बात सबके सामने लाई है कि रक्त कणिकाओं में मौजूद टेलोमेरस की लंबाई के जरिये बुढ़ापे की रफ्तार भी जानी जा सकती है।

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दी है चेतावनी

इस रिसर्च का हवाला देते हुए वैज्ञानिकों ने चेताया है कि गर्भावस्था के समय अगर मां के खून में ऑक्सीजन की कमी होती है तो इससे सीधे शिशु का स्वास्थ्य प्रभावित होगा। प्रिएक्लमेशियाग्रस्त महिलाओं और धूम्रपान करने वाली महिलाओं के खून में ऑक्सीजन स्वस्थ महिलाओं की तुलना में कम होता है।
इस रिसर्च में गर्भवती चुहियाओं को कई समूहों में विभाजित किया गया। एक समूह की चुहियों को लगातार 7 फीसदी कम ऑक्सीजन दी गई। जब इन बच्चों के बच्चे बड़े हुए तो उनके टेलोमेरस छोटे थे। ऐसे में उन्हें दिल की बीमारियां अन्य दूसरे चूहों के बच्चों की तुलना में जल्दी हुईं।

 

कम था हृदय रोग का खतरा

शोध के दौरान जिन चुहियों को गर्भावस्था के दौरान एंटीऑक्सीडेंट की खुराक दी गई उनके बच्चों में हृदय रोग का खतरा कम था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जुसानी नतीजों को समझाते हुए कहते हैं, "हम जानते हैं कि जीन आसपास के वातावरण से प्रभावित होते हैं, जैसे धूम्रपान, मोटापा, व्यायाम की कमी, इससे हृदय के रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

 

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