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पित्‍त को संतुलित रख सुधारिये पाचन क्रिया

एक्सरसाइज और फिटनेस By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 17, 2014
पित्‍त को संतुलित रख सुधारिये पाचन क्रिया

पित्‍त एक तरल पदार्थ है जो पाचनक्रिया को सुधारता है, इसके असंतुलन से पेट में कब्‍ज और गैस की शिकायत के साथ-साथ मस्तिष्‍क भी प्रभावित होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाये रखना जरूरी है।

पित्‍त, वात और कफ शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं, इसमें पित्‍त और वात लगभग एक जैसे होते हैं। लेकिन इन तीनों में सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण पित्‍त है जो सीधे पाचन क्रिया को भी सुचारु करता है। कई बार पेट में गैस बनना और सिर में दर्द जैसी समस्‍या इसके कारण होती है।

यह एक तरल पदार्थ होता है जो पाचनक्रिया को दुरुस्‍त रखता है। यह आंतों को उसके कार्य को करने में मजबूती प्रदान करता है तथा उन्हें क्रियाशील बनाए रखता है। पित्त शरीर के अन्य पाचक रसों को भी उद्दीप्त करता है अर्थात उनकी कार्यशीलता को बढ़ाता है। इसलिए इसका संतुलन बनाये रखना बहुत जरूरी है। इस लेख में पित्‍त को संतुलित रखने के तरीकों के बारे में विस्‍तार से जानिये।

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क्‍या है पित्‍त

यह एक प्रकार का पाचक रस है लेकिन यह विष भी होता है। पित्त क्षारमय तथा चिकनाई युक्त लसलसा पदार्थ होता है तथा इसका रंग सुनहरा तथा गहरा पिस्तई युक्त होता है। इसका स्वाद कड़वा होता है। पाचनक्रिया में पित्त का कार्य महत्वपूर्ण होता है। यह पाचक रसों को क्रियाशील बनाता है, साथ ही जब यह पित्ताशय में होता है तो उसमें सड़न रोकने की शक्ति नहीं होती है, लेकिन आंतों में पहुंचकर यह खाद्य-पदार्थों को जल्द सड़ने से रोकता है। यदि किसी प्रकार से आंतों में पित्त का पहुंचना रोक दिया जाए तो खाद्य-पदार्थ बहुत ही जल्द सड़कर गैस उत्पन्न करने लगेंगे और पेट की कई समस्‍यायें होने लगेंगी।

इसके अलावा यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है। पित्‍त लिवर में बनता है और गाल ब्‍लैडर में जमा होता है। इसमें 80-90 प्रतिशत पानी होता है और शेष 10-20 प्रतिशत सॉल्‍ट, फैट, मस्‍कस और इनऑरगेनिक सॉल्‍ट होता है। पित्‍त जूस का उत्‍पादन और उत्‍सर्जन, शरीर के क्रियाकलाप पर निर्भर करता है। लिवर में किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर भी पित्‍त का स्राव होता है। इसकी अधिकता के कारण व्‍यक्ति को मतली और उल्‍टी आ सकती है। कुछ मामलों में इसका रोगी मेंटल डिप्रेशन में चला जाता है।

स्‍वस्‍थ दिनचर्या अपनायें

अगर शरीर में पित्‍त की मात्रा ज्‍यादा बनने लगी है तो आपको कई दिक्‍कतें होगी, इसके लिए बेहतर होगा कि अपनी जीवनशैली में सुधार लायें। सुबह समय पर उठकर व्‍यायाम करके ब्रेकफास्‍ट करें। खान-पान पर विशेष ध्‍यान दें, भरपूर नींद लें, बाहर के खाने से बचें। अपनी दिनचर्या का कड़ाई से पालन करें तो पित्‍त की समस्‍या नहीं होगी।

फैटी फूड्स

आप जो भी खा रहे हैं उसकी गुणवत्‍ता पर ध्‍यान दें और यह जांच लें कि वह आपके पित्‍त के लिए सही है या नहीं। वसा युक्‍त फूड को खाने से परहेज करें। वसा युक्‍त भोजन को पचाने में शरीर को ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है और उससे शरीर को कई नुकसान भी पहुंचते है। जंक फूड, चीज फूड और सुगरयुक्‍त आहार का सेवन करने से बचें।

पानी है जरूरी

पानी पीने से शरीर हाईड्रेट रहता है और आपके शरीर में कम मात्रा में पित्‍त का स्राव होता है। दिन में एक बार में अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ी देर में थोड़-थोड़ा पानी पियें। अगर आप हल्‍का गुनगुना पानी पियेंगे तो इससे अधिक लाभ होगा और आपकी पाचन क्रिया भी दुरूस्‍त रहेगी। इसके साथ ही आपको कई प्रकार समस्‍याएं जैसे - मतली आना, जुकाम नहीं होगी।

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एसिड बनाने वाले आहार

अगर आपके शरीर में पित्‍त रस बहुत ज्‍यादा बनता हो, तो आपको अपने भोजन में हर उस चीज को नहीं खाना चाहिये जो पेट में एसिड बनाएं। खट्टे फल, अचार, नींबू-पानी आदि पीने से परहेज करें, ये पेट में एसिड बनाते हैं।

अधिक नमक से बचें

नमक का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें, क्‍योंकि यह इससे आपका पित्‍त प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा अधिक नमक खाने से ब्‍लड प्रेशर भी बढ़ सकता है।

नियमित व्‍यायाम

सभी बीमारियों की एक आसान दवा होती है एक्‍सरसाइज करना। नियमित रूप से व्‍यायाम करने से शरीर में बनने पित्‍त रस की मात्रा में कमी आती है और शरीर स्‍वस्‍थ रहता है।

अगर आपको लगता है कि आपके पेट में अधिक पित्‍त बन रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। क्‍योंकि यह कई समस्‍याओं का कारण बन सकता है, इसके लिए एक बार चिक्त्सिक से जरूर संपर्क करें।

 

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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