Baby's First Bath: शिशु को सिंक में नहलाएं या बाथ टब में? जानें शिशु के पहले स्नान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

Updated at: Mar 17, 2020
Baby's First Bath: शिशु को सिंक में नहलाएं या बाथ टब में? जानें शिशु के पहले स्नान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

नहाते समय आपके बच्चे की हर समय देखरेख की जानी चाहिए। पानी के आसपास नवजात को अकेले कभी न छोड़ें।

Pallavi Kumari
नवजात की देखभालWritten by: Pallavi KumariPublished at: Mar 17, 2020

अपने बच्चे को नहलाना कई माता-पिता के लिए एक खास और बेहद खूबसूरत अनुभव होता है। यह बंधन बेहद शानदार होता है, क्योंकि आपके छोटे से नए परिवार के सदस्य को पहली बार नहला रहे होते हैं। पर कई लोगों के मन में नवजात बच्चे को नहाने को लेकर कई सारे प्रश्न उठते रहते हैं। अधिकांश लोगों का पहला प्रश्न तो यही होता है कि नवजात शिशुओं को अपना पहला स्नान कब करना चाहिए? तो आपको बता दें कि आपके बच्चे के पहले स्नान का समय पिछले कुछ वर्षों में बदला है। पहले जहां अधिकांश संस्थान जन्म के एक या दो घंटे के भीतर ही बच्चों को नहलाते थे, लेकिन अब कई लोग अपनी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जन्म के 24 घंटे बाद तक बच्चे के पहले स्नान में देरी करने की सिफारिश करता है या कम से कम जन्म के 6 घंटे तक तो बच्चे को बिलकुल भी नहाना नहीं चाहिए। 

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नवजात शिशुओं को हर दिन स्नान की आवश्यकता नहीं होती है। उन्हें शायद ही कभी पसीना आता हैं या गंदे हो जाते हैं जिन्हें अक्सर स्नान करने की आवश्यकता होती है। इसलिए बच्चे के पहले वर्ष के दौरान प्रति सप्ताह सिर्फ तीन बार ही उसे स्नान करवाएं। अधिक बार स्नान करने से आपके बच्चे की त्वचा सूख सकती है।

शिशु के पहले स्नान में देरी क्यों करें?

शरीर का तापमान और ब्लड शुगर में कमी

जिन शिशुओं को तुरंत स्नान कराया जाता है, उनके अचानक ठंड विकसित हो सकती है। प्रारंभिक स्नान के मामूली तनाव से कुछ बच्चों को रक्त शर्करा (हाइपोग्लाइसीमिया) में गिरावट की संभावना हो सकती है।

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बॉन्डिंग और ब्रेस्टफीडिंग

बच्चे को जल्दी ही नहाना भी त्वचा की देखभाल, मां-बच्चे की बॉन्डिंग और स्तनपान की सफलता में बाधा डाल सकता है। पहले दो घंटे के भीतर स्नान करने वालों की तुलना में बच्चे के पहले स्नान में 12 घंटे की देरी को करने वालों की संख्या बढ़ गई है।

शुष्क त्वचा

वर्निक्स, एक मोमी सफेद पदार्थ जो जन्म से पहले बच्चे की त्वचा को कोट करता है, एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र के रूप में कार्य करता है और इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण हो सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के अनुसार, अपनी नाजुक त्वचा को सूखने से बचाने में थोड़ी देर के लिए नवजात शिशु की त्वचा पर वर्निक्स को छोड़ना सबसे अच्छा है। यह विशेष रूप से बैक्टीरिया या वायरस से बच्चे को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी त्वचा पर चोट लगने की संभावना अधिक होती है।

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बच्चे को कब सिंक में नहलाएं और कब बाथ टब में?

एक नवजात शिशु को स्नान करने के लिए सिंक आवेषण उपलब्ध हैं। अगर आप यात्रा कर रहे हैं या आपके घर में जगह कम है तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अपने बच्चे को सिंक में नहलाके वक्त इस बात का ध्यान रखें कि सिंक नल से आने वाला पानी बहुत गर्म न हो। जब आपका बच्चा अपने दम पर बैठने में सक्षम हो जाता है (आमतौर पर लगभग 6 महीने), तो आप पूर्ण बाथटब का उपयोग कर सकते हैं। टब को केवल कुछ इंच पानी से भरें और हर समय उनकी देखरेख करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनका सिर और गर्दन पानी से ऊपर रहे।

क्या आपको साबुन की आवश्यकता है?

आप अपने नवजात शिशु को नहलाते समय माइल्ड बेबी सोप या बेबी वाश का उपयोग कर सकते हैं। पर नियमित साबुन का उपयोग करने से बचें क्योंकि यह बहुत कठोर हो सकता है और आपके बच्चे की नाजुक त्वचा को सुखा सकता है। साथ ही आपके नवजात शिशु की त्वचा को भी मॉइस्चराइजर की आवश्यकता नहीं होती है।

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शिशु का नहलाते वक्त किन बातों का रखें ख्याल

  • - शिशु को नहलाने के लिए एक शिशु टब या सिंक का उपयोग करें।
  • -नहाने की सीटों के उपयोग से बचें।
  • -पानी की टेंप्रेचर की जांच करें।
  • - फिर एक सपाट सतह पर बच्चे को लेटाएं जो आप दोनों के लिए आरामदायक हो
  • -बच्चे को हल्के हाथो से नहलाएं।
  • -पहले चेहरा धोना शुरू करें फिर शरीर। हो सके तो नहलाने के लिए गीले कपड़े का प्रयोग करें।
  • -स्पंज बाछ के दौरान, अपने बच्चे को एक सूखे तौलिया में लपेटें और उसके शरीर के केवल उन हिस्सों को निकालें, जिन्हें आप सक्रिय रूप से धो रहे हैं। बाहों के नीचे, कानों के पीछे, गर्दन के चारों ओर और विशेष रुप से जननांग क्षेत्र की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

Source: American Academy of Pediatrics

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