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गर्भ में शिशु क्यों लेता है हिचकी? क्या ये शिशु के अस्वस्थ होने का है संकेत

महिला स्‍वास्थ्‍य
By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 07, 2019
गर्भ में शिशु क्यों लेता है हिचकी? क्या ये शिशु के अस्वस्थ होने का है संकेत

प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही के दौरान महिला को शिशु की तमाम गतिविधियां जैसे- गर्भ के अंदर हिलना, लात मारना और हिचकी लेना आदि महसूस होने लगता है। कई बार महिलाओं को ऐसा लगता है कि शिशु का हिचकी लेना उसके अस्वस्थ होने का संकेत होता है जबकि ऐसा नहीं है

Quick Bites
  • गर्भ में शिशु आमतौर पर दूसरी तिमाही से हिचकी लेने लगता है।
  • कई बार शिशु का हिचकी लेना असामान्य और खतरनाक संकेत होता है।
  • जानें क्या क्या शिशु का हिलना-डुलना और हिचकी लेना एक बात है?

प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही (2nd Trimester) के दौरान महिला को शिशु की तमाम गतिविधियां जैसे- गर्भ के अंदर हिलना, लात मारना और हिचकी लेना आदि महसूस होने लगता है। कई बार महिलाओं को ऐसा लगता है कि शिशु का हिचकी लेना उसके अस्वस्थ होने का संकेत होता है जबकि ऐसा नहीं है। शिशु की हिचकी का संकेत हाथ-पैर चलाने से थोड़ा अलग होता है। ज्यादातर महिलाओं का मानना है कि शिशु के हिचकी लेने पर ऐसा महसूस होता है जैसे शिशु पेट को चूम रहा हो। एक बार जब शिशु का तंत्रिका तंत्र (नर्व सिस्टम) पूरी तरह विकसित हो जाए, तो वह सांस लेना शुरू कर देता है और पेट में हिलने-डुलने लगता है।

शिशु के स्वस्थ होने का संकेत है हिचकी लेना

शिशु का गर्भ में हिचकी लेना उसके स्वस्थ होने का संकेत होता है। आमतौर पर पेट में होने वाली ये हलचल महिलाओं को 6ठें महीने में महसूस होती है जबकि शिशु के हाथ-पैर की हलचल18 से 20 सप्ताह बाद महसूस होना शुरू हो जाती है। कुछ महिलाओं को 27 सप्ताह के बाद ये लक्षण महसूस होते हैं। कुछ शिशु दिन में कई बार हिचकी लेते हैं जबकि कुछ शिशु एक या दो बार। ये शिशु के विकास का एक चरण है इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

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क्या हिचकी कोई बुरा संकेत भी हो सकता है?

आमतौर पर शिशु की हिचकी कोई बुरा संकेत नहीं है। मगर 32वें सप्ताह के बाद रोज-रोज हिचकी आना आमतौर पर बंद हो जाता है। अगर इस समय के बाद भी आपके शिशु को लगातार 15-20 मिनट के अंतराल पर हिचकी आ रही है या दिन में 7-8 बार से ज्यादा हिचकी महसूस होती है, तो एक बार चिकित्सक से संपर्क जरूर करें क्योंकि ये शिशु की किसी समस्या का भी संकेत हो सकता है।

क्या शिशु का हिलना-डुलना और हिचकी लेना एक बात है?

अगर आप इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं कि आपका शिशु हिचकी ले रहा है या हिल-डुल रहा है, तो अपनी पोजीशन बदलकर इस बात का पता लगाया जा सकता है। कई बार आप जिस पोजीशन में लेटी या बैठी होती हैं, उस पोजीशन में शिशु को परेशानी महसूस होती है, जिसके कारण वो थोड़ा हिलता-डुलता है। इसके अलावा कई बार जब आप कुछ गर्म, ठंडा या मीठा खाती हैं, तो शिशु की तंत्रिकाएं स्टिमुलेट होती हैं, जिसके कारण वो हिलता-डुलता है। हिचकी को पहचानने का सबसे आसान तरीका ये है कि आप बिल्कुल शांत और सीधी होतकर बैठ जाएं। अब अगर आपको अपने पेट में कोई नब्ज चलती हुई या घड़ी के टिक-टिक जैसी हलचल महसूस होती है, तो इसका अर्थ है कि शिशु हिचकी ले रहा है।

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जल्दी-जल्दी हिचकी ले शिशु, तो हो जाएं सावधान

अगर आपका शिशु बहुत जल्दी-जल्दी हिचकी ले रहा है, तो सावधान होने की जरूरत है। कई बार बच्चे को सांस लेने के लिए हवा नहीं मिल पाती है जिसकी वजह से अंबिलिकल कॉर्ड भ्रूण की गर्दन पर लिपट जाती है। जिससे हार्ट रेट बढ़ जाता है और शिशु के विकसित होते अंगों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इसके कारण शिशु जल्दी-जल्दी हिचकी लेने लगता है या बिलकुल हिचकी लेना बंद कर देता है। अगर दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान बच्चे की हिचकी लेने की संख्या कम हो जाए या बहुत ज्यादा हो जाए, तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

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Written by
Anurag Gupta
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 07, 2019

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