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धुंध के नकारात्मक प्रभावों से बचने में मदद कर सकते हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

आयुर्वेद By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 28, 2018
धुंध के नकारात्मक प्रभावों से बचने में मदद कर सकते हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

इसमें कोई संदेह नहीं है कि डब्ल्यूएचओ सर्वेक्षण के मुताबिक भारत सबसे प्रदूषित देशों की सूची में शीर्ष पर है। 

इसमें कोई संदेह नहीं है कि डब्ल्यूएचओ सर्वेक्षण के मुताबिक भारत सबसे प्रदूषित देशों की सूची में शीर्ष पर है। यातायात, उद्योगों और कारखानों के धूम्र उत्सर्जन, कृषि अपशिष्ट जलाने के कारण होने वाला धुआं भारतीयों को जहरीले हवा में सांस लेने के लिए मजबूर करता है, जिसमें ऐसे तत्वों का उच्च स्तर होता है जो इस तरह आसानी से शरीर में प्रवेश कर विभिन्न जान लेवा स्वास्थ्य समस्याओं का एक कारण बनते हैं। दशकों से, भारत में लाखों लोग हृदयाघात, फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, पुरानी श्वसन समस्याओं और अन्य वायु रोगों से ग्रसित हैं। यह बाहरी वायु प्रदूषण हो या घरेलू, सीओ 2, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, वीओसी, और एरोसोल जैसे सैकड़ों हजार प्रदूषक वायुमंडलीय सूक्ष्मजीवों का प्रजनन करते हैं जो ठंड और फ्लू जैसे एलर्जी का कारण बनते हैं।

हालांकि घातक वायु प्रदूषण भारत में वर्ष-भर बना रहता है, सर्दी का मौसम स्थिति खराब कर देता है। पीएम 2.5 स्तर और हवा में अन्य प्रदूषकों में वृद्धि के कारण वाहन और औद्योगिक धुआं सर्दियों के दौरान कोहरे के साथ मिलकर धुंध बन जाता है। यह जहरीला धुआं, जो एक दिन में 48 सिगरेट के बराबर है, लोगों में मौजूदा श्वसन और ह्रदय संबंधित बीमारियों में वृद्धि के साथ गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। सर्दियों के दौरान, यह धुआं चरम सीमा तक पहुंच जाता है और भारत में रहने वाले सभी लोगों के लिए चिंता का विषय है। ठंडी हवा धीमी रफ्तार से चलती है और यह धुएं और कोहरे के मिश्रण से प्रदूषकों को जमीन के स्तर पर एकत्र रखती है जिससे धुंध छाने लगती है।

श्री मोहम्मद यूसुफ एन शेख, संस्थापक कुदरती आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र द्वारा कहना है कि हालांकि धुंध में हो रही इस अभूतपूर्व वृद्धि को आसानी से खत्म नहीं किया जा सकता है, लोग आयुर्वेद की मदद से अपने परिवार और दोस्तों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। जीवन के प्राचीनतम विज्ञान, आयुर्वेद, मे लगभग हर बीमारी के लिए समाधान निर्धारित है-चाहे वह शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, पर्यावरणीय या कोई ओर हो। पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए, आयुर्वेद में निर्धारित घरेलू उपचार और सावधानी के उपाय प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आस-पास की हवा में मिश्रित अंतर्निहित विषाक्तता को दूर करने में मदद कर सकते हैं। 

नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जो आप इस सर्दी के दौरान धुंध के दुष्प्रभावों से बचने के लिए अपना सकते हैं:

1. अपने आस-पास वायु शुद्धिकरण पौधे लगाएं

एलोवेरा, स्पाइडर प्लांट, नीम (अज़ादिराचा इंडिका) जैसे पौधे प्राकृतिक वायु फिल्टर के रूप में कार्य करते हैं जो सीओ 2, कण धूल, नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड जैसे गैसीय प्रदूषक को अवशोषित करते हैं। न केवल वे उच्च मात्रा में सीओ 2 अवशोषित करते हैं, बल्कि पर्याप्त ताजा ऑक्सीजन भी पैदा करते हैं। लोगों को अपने घरों और कार्यस्थल के आस-पास चारों ओर ताजा हवा फैलाने के लिए अंदर और बाहर इन पौधों को रखना चाहिए।

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2. स्वच्छता पहली प्राथमिकता होनी चाहिए

लोगों को वायु जनित रोगों से बचने के लिए अपने आसपास की सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए। अदृश्य वायु प्रदूषक आसानी से पर्दे, खिड़कियों, कपड़ों और घर के कोनों में बस जाते हैं। इसके अलावा, व्यक्तिगत स्वच्छता और सफाई समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। तेल में नीम जैसे हल्के औषध तत्व मिलाकर बालों और त्वचा को धोना, संक्रमण को रोकने में बहुत प्रभावी तरीका हो सकता है। ताजा तोड़ी हुई नीम की पत्तियां रक्त को शुद्ध करती हैं और शरीर को भीतर से विषमुक्त बनाती हैं।

3. प्राकृतिक प्रतिरक्षा बढ़ाना

धुआं हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रभाव डालता है जिससे विभिन्न अंतःस्रावी विकारों, एलर्जी और प्रतिरक्षा रोग निर्मित होते हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद सभी आवश्यक विटामिन को नष्ट कर देता है और इसे घातक बीमारियों के प्रति कमजोर बनाता है। अच्छा पाचन, स्वस्थ्य यकृत, और एक संतुलित अंतःस्रावी तंत्र प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है। आपको अपनी चयापचय अग्नि में सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए,विटामिन ए, सी, डी, और ई लेने और ताजा फल और सब्जियों के सेवन में वृद्धि करना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, त्रिफला और तुलसी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और शरीर में वायरल गतिविधियों को रोकने में प्रभावी साबित हुए हैं। गुड ऊर्जा का एक और समृद्ध स्रोत है। लौह के साथ समृद्ध, यह न केवल रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है, लेकिन रक्त को भी शुद्ध करता है और शरीर पर धुंध के हानिकारक प्रभावों को रोकता है।

4. स्वास्थ्य समस्याओं से निपटना

धुंध बंद नाक, सांस की तकलीफ, फेफड़ों के संक्रमण, और अन्य श्वसन संबंधी मुद्दों का कारण बनती है। इनसे निपटने के लिए, श्वसन संक्रमण और सांस की तकलीफ से निपटने के लिए आप कच्चा अदरक खा सकते हैं। यदि कच्चा अदरक खाना संभव नहीं है, तो अदरक के अर्क को गर्म पानी में मिलाकर स्वस्थ पेय बना सकता है।वास्तव में, एक अध्ययन से यह भी पता चला है कि अदरक प्रभावी ढंग से आरएसवी वायरस से लड़ता है, जो श्वसन संक्रमण का एक बहुत ही आम कारण है। नाश्या कर्म बंद नाक से छुटकारा पाने की एक बहुत अच्छी आयुर्वेदिक थेरेपी है, जो कि धुंध के दौरान होने वाली एक आम समस्या है। घी को नाक में डाल कर हल्की मालिश करने और सुड़कने से घी नासिका मार्ग से जाकर इसे बाहर और अंदर से साफ करता है।

5. लक्ष्याहरिदी के साथ हवा को शुद्ध करना

घर के अंदर वायु प्रदूषण को मिटाने के लिए, लक्ष्याहरिती योग किया जा सकता है। घर के अंदर की विषैली हवा और धुएं के अवशेषों को शुद्ध करने के लिए लक्षा, अतीविशा, अभय और हरिद्र जैसे सूखे जड़ी बूटियों के धुएं को फैलाया जा सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले उचित वेंटिलेशन सुविधाएं सुनिश्चित कर लेना चाहिए।

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