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हकलाहट से निजात दिलाएंगे ये अचूक आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 24, 2011
हकलाहट से निजात दिलाएंगे ये अचूक आयुर्वेदिक उपाय

क्‍या आप भी हकलाकर या अटक-अटक कर बोलने की समस्‍या से परेशान है? और इसके लिए उपायों की खोज कर रहे हैं तो आप आयुर्वेदिक के जरिये इसका उपचार कर सकते हैं, आइए हकलाने की आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे में जानें।

हकलाकर बोलना और अटक-अटक कर बोलना, दोनों का मतलब एक ही है - वाक शक्ति में गड़बड़ी, जिसमें बोलनेवाला, बोले हुए शब्दों को दोहराता है या उन्हें लंबा करके बोलता है। हकलाने वाला या अटक कर बोलने वाला, बोलते-बोलते रुक सकता है या कुछेक शब्दांशों की कुछ आवाज़ ही नहीं निकाल पाता।
 
stammering problem in hindi

हकलाने और अटककर बोलने की बीमारी अधिकतर बच्चों में पाई जाती है और हकलाने वाले बच्चों के माता पिता को बच्चों की यह बीमारी असीमित परेशानी में डाल देती है, और बच्चों को निराशा से भर देती है और फिर, आजकल के मशीनी युग में बच्चों में यह बीमारी इतनी गहन भावनाएं पैदा करती है, कि विचारों और अनुभवों को शब्दों में परिवर्तित करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन आप घबराइए नहीं क्‍योंकि आयुर्वेद की मदद से आप हकलाने की समस्‍या का इलाज कर सकते हैं।


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हकलाने के लक्षण और संकेत

किसी शब्द, वाक्य, पंक्ति को शुरू करने में समस्या, कुछ शब्दों को बोलने से पहले हिचकिचाहट महसूस करना, किसी शब्द, आवाज़ या शब्दांश को दोहराना, वाक्य तेज़ गति से निकलना इत्यादि। बोलते समय तेज़ गति से आँखें भीचना, होठों में कंपकंपाहट, पैरों को ज़मीन पर थपथपाना, जबड़े का हिलना इत्यादि। कुछ आवाज़ निकालने से पहले 'उहं' जैसा विस्मयबोधक शब्द का बार बार इस्तेमाल करना।

हकलाहट के आयुर्वेदिक उपचार

  • गुनगुने ब्राह्मी तेल से सिर पर 30 से 40 मिनट तक मालिश करें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहा लें। इससे स्मरण शक्ति में सुधार होता है और अटककर और हकलाकर बोलने का दोष मिट जाता है।
  • एक चम्मच सारस्वत चूर्ण और 1/2  चम्मच ब्राह्मी किरुथम शहद में मिला दें। इस मिश्रण को चावल के गोलों में मिलाकर मुंह में रखकर अच्छी तरह से चबाने से हकलाहट में लाभ मिलता है। बेहतर होगा अगर आप इसका सेवन नाश्ते के रूप में चटनी जैसा करें। नाश्ते के बाद 30 मिलीलीटर सारस्वतारिष्ट लेने से हकलाहट में लाभ मिलेगा।  
  • गाय का घी हकलाहट को दूर करने का एक उम्दा उपचार माना जाता है।
  • कुछ कोथमीर के बीज और पाम कैंडी वल्लाराई के पत्तों में रखकर चबाने से हकलाहट दूर हो जाती है। वल्लाराई के पत्तों को धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और इस पाउडर का नियमित रूप से सेवन करने से भी हकलाहट दूर हो जाती है।
  • नियमित रूप से एक आँवले का सेवन करने से हकलाहट कम होती है । सुबह सवेरे एक चम्मच सूखे आँवले का पाउडर और एक चम्मच देसी घी का सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।
  • 12 बादाम पूरी रात पानी में सोख कर रखें, और सुबह उनके छिलके उतार कर पीस लें, और उन्हें 30 ग्राम मक्खन के साथ सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।
  • हकलाहट दूर करने के लिए 10 बादाम और 10 काली मिर्च मिश्री के साथ पीस कर दस दिन तक सेवन करें।
  • सोने से पहले छुआरों का सेवन करें पर कम से कम 2 घंटों तक पानी न पीयें। इससे आवाज़ भी साफ़ हो जायेगी और हकलाहट भी दूर हो जायेगी।
  • सूर्य की तरफ पीठ करके एक आईना पकड़कर और मुंह खोलकर ऐसी स्थिति में बैठें ताकि सूर्य की रोशनी आईने से प्रतिम्बिबित होकर आपके खुले मुंह में प्रवेश करे। गहरी सांस लें और धीरे-धीरे अपना मुंह खोलें, और आईने को अपनी जीभ पर प्रतिम्बिबित करें। जीभ आपके मुंह के निचले भाग की तरफ होनी चाहिए अगर आपने सही तरह से निर्देशों का पालन किया है। अपनी जीभ को ढीला छोड़ दें, उसे कभी भी कड़ा न करें, क्योंकि ऐसा करने से हकलाहट बनी रहेगी। स्पष्ट रूप से 'क्या हो' शब्द का बार बार उच्चारण करें। आपकी जीभ को सुचारू रूप से कार्यशील करने के लिए यह एक उत्तम उपाय माना जाता है।

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अगर आपके बच्चे की हकलाने की आदत 6 महीने से ज़्यादा और 5 वर्ष की उम्र से ज़्यादा तक जारी रहती है तो तुरंत किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।

Image Source : Getty & cloudfront.net

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