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    आयुर्वेद में हायपरथायराइडिज्म का इलाज

    हाइपरथायरायडिज्‍़म By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 08, 2013
    आयुर्वेद में हायपरथायराइडिज्म का इलाज

    आयुर्वेद में हायपरथायराइडिज्म का इलाज: आइए हम आपको बताते हैं कि ओवरएक्टिव थायराइड ग्रंथि को आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    ओवरएक्टिव थायराइड को हायपरथायराइडिज्म कहते हैं। इसके इलाज के लिए सर्जरी, रेडियोएक्टिव थेरेपी और एंटीथायराइड ड्रग का प्रयोग होता है। लेकिन आयुर्वेद पद्धति के जरिए भी इसका इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेद से इलाज करने पर हायपरथायराइडिज्म के लिए जिम्मेदार ऊतकों को नियंत्रित किया जाता है। आयुर्वेदिक दवाइयां थायराइड ग्रंथि से हो रहे हार्मोन के ज्यादा निर्माण को नियंत्रित करती हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि ओवरएक्टिव थायराइड ग्रंथि को आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    [इसे भी पढ़ें : हायपरथायराइडिज्‍म के लक्षण]

     

    आयुर्वेद से हायपरथायराइडिज्म की चिकित्सा –

    •    कामदूधा रस – यह औषधि हायपरथायराइडिज्म‍ के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका सेवन करने से ज्यादा मात्रा में पसीना आना बंद हो जाता है।
        
    •    चंद्रकला रस – हायपरथायराइडिज्म के कारण गर्मी ज्यादा लगती है। अक्सर इस गर्मी को सहना मुश्किल होता है। चंद्रकला रस का प्रयोग करने से इस समस्या से कुछ हद तक निजात पाया जा सकता है।
        
    •    सूतशेखर रस – थायराइड ग्रंथि से ज्यादा मात्रा में निर्मित हो रहे हार्मोन को नियंत्रित करता है। इसका प्रयोग करने से पसीना और गर्मी को भी नियंत्रित करता है।
        
    •    प्रवल पंचामृत - यह औषधि पसीने और थकान को नियंत्रित करती है। ज्यादा मात्रा में आ रहे पसीने को रोकने में यह औषधि बहुत ही गुणकारी है।
        
    •    कुतज परपाटी – हायपरथायराइडिज्म के लिए यह औषधि बहुत ही फायदेमंद है। जो ग्रंथियां हायपरथायराइडिज्म के कारण कम काम करती हैं उनमें ऊर्जा देने के लिए यह औषधि बहुत कारगर है।
        
    •    सुवर्ण मालिनी वसंत – हायपरथायराइडिज्म के मरीजों को थकान लगती है। यह औषधि थकान को कम करती है।
        
    •    खर्जुर मंथ – यह औषधि में फायदा करती है। ज्यादा हार्मोन के निर्माण के कारण जब मरीज को थकान लगती है तो इस औषधि शरीर से थकान को कम कर ऊर्जा का संचार करती है।

    •    द्रक्षासव और लोहासव – हायपरथायराइडिज्म में थकान के प्रभाव को कम करने के लिए इस औषधि का प्रयोग किया जा सकता है।

    [इसे भी पढ़ें : हायपरथायराइडिज्‍म में व्‍यायाम]

     

    •    योगराज गुग्गलू – यह औषधि महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। हायपरथायराइडिज्म के कारण महिलाओं का मासिक धर्म अनियमित हो जाता है, यह उसमें फायदा करती है।
        
    •    गंधर्व हरीतकी – थायराइड ग्रंथि जब ओवर एक्टिव होता है तो महिलाओं मीनोपॉज पर भी असर करता है। यह औषधि उसको सामान्य करती है।
        
    •    शंखपुष्पी – घबराहट, कंपन और उत्तेजना को नियंत्रित करने के लिए यह औषधि बहुत फायदेमंद है।
        
    •    जटमानसी – हायपरथायराइडिज्म के कारण बढ़ी हुई उत्ते‍जना और कंपन को कम करने के लिए जटमानसी का प्रयोग किया जाता है।
        
    •    दसमूलरिष्‍ट – उत्तेजना, कंपन और अनिद्रा के लिए यह औषधि फायदेमंद है।


    हायपरथायराइडिज्म‍ के लिए और भी आयुर्वेदिक औषधियां प्रयोग की जा सकती हैं। लेकिन इनका प्रयोग करने से पहले आयुर्वेद चिकित्‍सक से परामर्श अवश्य लीजिए।

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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