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क्या एक वायरस खत्म कर देगा सभी प्रकार के कैंसर? यूएस के वैज्ञानिक का दावा कितना सही, जानें डॉक्टर की राय

लेटेस्ट By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 10, 2019
क्या एक वायरस खत्म कर देगा सभी प्रकार के कैंसर? यूएस के वैज्ञानिक का दावा कितना सही, जानें डॉक्टर की राय

यूएस के एक वैज्ञानिक ने एक ऐसे वायरस को खोज निकालने का दावा किया है, जो कई तरह के कैंसर को खत्म कर सकता है। जानें इस बारे में एक्सपर्ट की राय।

कैंसर के इलाज के मामले में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। यूएस के वैज्ञानिक ने एक ऐसा वायरस खोज लिया है, जो रिपोर्ट के अनुसार, कई तरह के कैंसरों का खात्मा करने में सक्षम है। मेडिकल के क्षेत्र में इसे एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। इस वायरस को वैक्सीनिया CF33 (Vaxinia CF33) नाम दिया गया है। फिलहाल इस वायरस को चूहों पर टेस्ट किया गया है, लेकिन जल्द ही वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे जल्द ही इसे इंसानों पर भी टेस्ट करेंगे।

पिछले 2-3 दशकों में कैंसर महामारी की तरह फैला है, जिसके कारण हर साल करोड़ों लोगों की मौत होती है। इस समय दुनियाभर में 100 से भी ज्यादा प्रकार के कैंसर लोगों को गंभीर रूप से बीमार बना रहे हैं। हालांकि ज्यादातर प्रकार के कैंसरों का इलाज आज दुनियाभर में सफलतापूर्वक किया जा रहा है, मगर यदि किसी मरीज को कैंसर होने का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चले, तो इलाज मुश्किल और खर्चीला हो जाता है। इसीलिए वैज्ञानिकों के इस दावे के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कैंसर को खत्म करने में काफी हद तक सफलता मिल जाएगी।

टेस्ट के दौरान दिखे हैरान करने वाले परिणाम

रिपोर्ट के अनुसार वैक्सीनिया CF33 एक ऐसा वायरस है, जो शरीर में कॉमन कोल्ड (सर्दी-जुकाम) का कारण बनता है। मगर इसे कैंसर सेल्स के साथ इन्फ्यूज कराने के बाद वैज्ञानिक हैरान थे। टेस्ट के दौरान इस वायरस ने पेट्री डिश में रखे सभी प्रकार के कैंसर को खत्म कर दिया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस टेस्ट को चूहों पर किया और पाया कि इस वायरस ने कैंसर के ट्यूमर को सिकोड़ कर काफी छोटा कर दिया।

इस वायरस को ऑस्ट्रेलियन बायोटेक कंपनी इम्यूजीन (Imugene) ने बनाया है, और इसे बनाने का श्रेय यूएस के वैज्ञानिक और कैंसर स्पेशलिस्ट प्रोफेसर युमान फॉन्ग (Yuman Fong) को जाता है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल ही इसे दवा के तौर पर ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों पर टेस्ट किया जाएगा।

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19वीं सदी से खोजा जा रहा था इलाज

19वी सदीं शुरुआत में जब मरीजों को रेबीज का टीका देने के बाद उनके कैंसर में कमी देखी गई, तभी इस बात के परिणाम मिल गए थे कि ये वायरस कैंसर को खत्म करने का दम रखता है। मगर समस्या ये थी कि अगर इस वायरस को और अधिक पावरफुल बना दिया जाए, तो ये वायरस कैंसर के साथ-साथ व्यक्ति को भी मार सकता था। इसी समस्या का हल निकालने में प्रोफेसर फॉन्ग को सफलता मिली है।

दरअसल काउपॉक्स नाम का एक वायरस होता है, जो पिछले 200 सालों से छोटीमाता (Small Pox) को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका इंसानों के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है। प्रोफेसर फॉन्ग ने काउपाक्स नाम के इसी वायरस को कुछ अन्य वायरसों के साथ मिलाकर चूहों के ट्यूमर पर इसका ट्रायल किया है। ट्रायल में देखा गया कि चूहों के शरीर में मौजूद कैंसर सेल्स सिकुड़कर काफी छोटी हो गईं और उनका बढ़ना भी बंद हो गया।

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ट्रिपल निगेटिव कैंसर के मरीजों पर किया जाएगा ट्रायल

फिलहाल प्रोफेसर फॉन्ग ऑस्ट्रेलिया में इस वायरस के क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं। बाद में इसे अन्य देशों में भी टेस्ट किया जाएगा। इस ट्रायल के दौरान ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर, मेलानोमा, फेफड़ों के कैंसर, ब्लैडर कैंसर, पेट के कैंसर के मरीजों पर टेस्ट किया जाएगा। हालांकि चूहों पर हुए इस शोध की सफलता इस बात को पूरी तरह आश्वस्त नहीं करती है कि इंसानों में भी इसके परिणाम वैसे ही देखने को मिलेंगे। अभी इंसानों पर इस वायरस का टेस्ट होना बाकी है, जिसके दौरान इसके दुष्प्रभावों की भी जांच करनी पड़ेगी। फिर भी प्रोफेसर फॉन्ग और मेडिकल साइंस से जुड़े सभी वैज्ञानिक इस शोध को लेकर काफी उत्साहित हैं और इसे बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।

रिसर्च के दावे पर क्या कहते हैं डॉक्टर?

इस रिसर्च में किए गए दावे के बारे में ओनलीमायहेल्थ ने डॉ. मृदुल मल्होत्रा (Consultant, Medical Oncology, Aakash Healthcare Super Speciality Hospital) से बात की, तो उन्होंने कहा, "रिसर्च में किया गया दावा लैब और जानवरों पर प्रयोग के आधार पर किया गया है। पेट्री डिश और चूहों पर हुए शोध में कथित तौर पर इस वायरस ने कैंसर सेल्स को मार दिया है। मगर अभी क्लीनिकल स्टडी नहीं की गई है, इसलिए ये कहना जल्दबाजी होगी कि एक वायरस हर तरह के कैंसर को खत्म कर देगा। ह्यूमन टेस्ट में अगर वैज्ञानिकों को कोई बड़ी सफलता मिलती है, तो जाहिर तौर पर ये एक बड़ी खोज साबित होगी। मगर फिलहाल के लिए यही कहा जा सकता है कि क्लीनिकल स्टडी और लैब स्टडी या एनिमल स्टडी में काफी फर्क होता है। वैज्ञानिकों ने इसके बास्टेक टेस्ट की प्लानिंग कर ली है। बास्केट टेस्ट आजकल नए प्रकार का टेस्ट है, जिसमें एक साथ कई तरह के वायरस पर दवा का टेस्ट किया जाता है। हालांकि कैंसर में ऐसा नया ट्रीटमेंट आ रहा है, इस बात का हमें स्वागत करना चाहिए, हमें इसे ऐसे ही खारिज नहीं करना चाहिए।"

Source: The Asian Age

सूचना: पूर्व प्रकाशित लेख में कुछ बातों की अस्पष्टता थी, जिन्हें स्पष्ट करने के लिए हमने एक्सपर्ट से बातचीत के आधार पर, ओनलीमायहेल्थ की संपादकीय नीतियों के अनुसार लेख को संशोधित किया है।

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