• shareIcon

    अस्‍थमा पीडि़त बच्‍चों को स्‍कूल में होने वाली दिक्‍कतें

    अस्‍थमा By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 10, 2015
    अस्‍थमा पीडि़त बच्‍चों को स्‍कूल में होने वाली दिक्‍कतें

    स्‍कूल बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वातावरण में से एक है। अस्‍थमा पीडि़त बच्‍चों को स्‍कूल में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानें बच्‍चों को स्‍कूल में क्‍या-क्‍या दिक्‍कतें आती है।

    आज की लाइफ स्‍टाइल के चलते अस्‍थमा न केवल बड़ो को परेशान कर रहा है, बल्कि बच्‍चे भी इसकी गिरफ्त में आ गए है। बच्‍चों को अस्‍थमा होने पर देखभाल की जरूरत ज्‍यादा होती है क्‍योकि बच्‍चों की प्रतिरक्षा प्रणाली बड़ों की अपेक्षा कमजोर होती है। उन्‍हें देखभाल की जरूरत घर में ही नहीं बल्कि स्‍कूल में भी होती है। घर के बाद स्‍कूल ही ऐसा होता है जहां पर वह सबसे ज्‍यादा समय बिताते हैं। स्‍कूल बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वातावरण में से एक है। अस्‍थमा पीडि़त बच्‍चों को स्‍कूल में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानें बच्‍चों को स्‍कूल में क्‍या-क्‍या दिक्‍कतें आती है।

    Asthma in Hindi

    उचित वेंटिलेशन

    कक्षा में उचित वेंटिलेशन आवश्यक है खासकर जब रसायनों के साथ काम हो रहा है। कला परियोजनाओं, विज्ञान परियोजनाओं, आदि में। कभी कभी परिहार कक्षाओं में परिवर्तन की आवश्यकता भी होती है। अस्थमैंटिक बच्चें जो भोजन या खाद्य परिरक्षकों के प्रति संवेदनशील होते हैं। उनको बाहर का भोजन नही खाना चाहिए। इसलिए बच्‍चों को स्‍कूल में ले जाने के लिए घर का खाना देना चाहिए और ध्‍यान रखें कि वह कैंटीन से ले कर न खाएं।

    शारीरिक गतिविधियां

    बच्चों में अस्थमा उनकी शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर देता है। उनके लिए भारी खेल और भागना गंभीर रूप से मुश्किल हो जाता है। उन्‍हें इस बात की इजाजत भी नहीं होती। इसलिए बच्‍चों के माता-पिता को चाहिए कि वह स्‍कूल जाकर उनके अध्‍यापक से इस बारे में बात करें।
    अस्‍थमै‍टिक बच्चों को ऐसी गतिविधियों का प्रदर्शन करने के लिए दबाव नही डालना चाहिए जिनसे उन्‍हें मुश्किल हो। यहां तक ​​कि अस्‍‍थमा बच्चे की दैनिक गतिविधियों को भी प्रतिबंधित कर देता है। वह ऐसे खेल खेलने में कठिनाई पाते है जिनमें शारीरिक श्रम शामिल हो। छोटे से शारीरिक श्रम से बच्चे थक जाते है, जिससे उनके फेफड़ों को पर्याप्‍त हवा नही मिलती और उन्‍हें अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। कभी-कभी, अस्थमैटिक बच्चे अस्थमा को बहाने के रूप में उपयोग करते है, और स्कूल में उपस्थित नहीं होते है या स्कूल की विशिष्ट गतिविधियों में भाग नही लेते। अभिभावकों और शिक्षकों को इसपर नजर रखने की जरूरत है और साथ ही इस व्यवहार को हतोत्साहित करने की भी।
    Asthma in Hindi

    दवा का दुष्प्रभाव

    अस्‍थमा में दवा से साइड इफेक्ट होना वास्तविक समस्या है। साइड इफेक्ट में सिरदर्द, हाथ कांपना, पेट में दर्द, सुस्ती आदि शामिल है, जो बच्चे की सीखने की क्षमता को बदल सकता है। दवाओं से कई बच्चे का एकाग्रता का स्तर तो प्रभावित होता है। इसका असर उनकी लिखावट पर भी पड़ता है। शिक्षकों को बच्‍चे के अस्‍थमा उपचार के बारे में पता होना चाहिए।स्कूल में अस्‍थमैंटिक बच्‍चों को एलर्जी का सामना करना पड़ सकता हैं यह परेशानी उन्‍हे धूल भरे गलीचे, पुराने ब्लैकबोर्ड या मोल्ड की उपस्थिति से हो सकती है। इसलिए इसका ध्‍यान रखना चाहिए।

    इस प्रकार, अस्‍थमा पीडि़त बच्चे स्कूल में सामान्य रूप से कार्य करें, इसके लिए एक साथ काम करना आवश्यक है। परिवार, स्कूल के अधिकारियों और अस्थमैंटिक बच्चे सभी को एक साथ काम करना चाहिए। यह टीम प्रयास बच्‍चे के लिए स्‍कूल में सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण बनाने में मदद करेगा।

     

    Image Source- Getty

    Read More Article on Asthma in hindi.

    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

    This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK