अस्‍थमा का अटैक आने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण, जानिए अटैक आने पर क्‍या करना चाहिए?

Updated at: Aug 07, 2020
अस्‍थमा का अटैक आने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण, जानिए अटैक आने पर क्‍या करना चाहिए?

Symptoms of Asthma Attack: अस्‍थमा के लक्षण कई हैं। गभीर स्थिति में अस्‍थमा का अटैक आना स्‍वाभाविक है। जानिए लक्षण और बचाव।

Atul Modi
अन्य़ बीमारियांWritten by: Atul ModiPublished at: Aug 07, 2020

अस्‍थमा (दमा) फेफड़ों से जुड़ी एक सामान्‍य स्थिति है, जिसमें श्‍वसन संबंधी समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है। अस्‍थमा का उपचार नहीं है मगर इसका प्रबंधन किया जा सकता है। यह बच्‍चों से लेकर वयस्‍कों तक किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। अस्‍थमा के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, अस्थमा फेफड़ों से हवा बाहर ले जाने वाली नलियों की सूजन और सिकुड़न के कारण होता है। गंभीर स्थिति में अस्‍थमा के अटैक आने लगते हैं। अस्थमा का दौरा (Asthma Attack) घातक हो सकते हैं लेकिन काफी हद तक रोके भी जा सकते हैं या इनका प्रबंधन किया जा सकता है।

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अस्‍थमा अटैक क्‍या होता है? 

जब अस्‍थमा के लक्षण बढ़ने लगते हैं या खराब हो जाते हैं तो इस स्थिति को अस्‍थमा का अटैक (Asthma Attack) आना कहा जाता है। इस स्थिति में फेफड़ों की नलियां व मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। ऐसी स्थिति में व्‍यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। अस्‍थमा का अटैक कई बार अकारण होता है तो वहीं इसके पीछे कुछ कारण भी हो सकते हैं जैसे प्रदूषण, सिगरेट का धुंआ और जुकाम इत्‍यादि।

अस्‍थमा अटैक आने के लक्षण क्‍या हैं?

अस्‍थमा का दौरा अस्‍थमा अटैक के लक्षण और संकेत व्‍यक्ति और उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसके 10 लक्षण हैं जो प्रमुखता से दिखाई देते हैं। जो निम्‍नलिखित हैं। आइए जानते हैं:

  • सांस लेने में तकलीफ
  • खांसी आना 
  • गले में घरघराहट की आवाज आना
  • रोगी बोलने, खाने या सोने में दिक्‍कत
  • गले और चेस्‍ट की मसल्‍स का सिकुड़ना
  • इनहेलर का इस्‍तेमाल करने के बाद भी समस्‍या का समाधान न होना
  • नाखूनों और होंठ का नीला पड़ जाना
  • छाती में दबाव महसूस होना
  • सीने में दर्द और अकड़न
  • अस्‍थमा के लक्षणों के चलते रात में नींद न आना

अस्‍थमा का अटैक आने पर क्‍या करना चाहिए? 

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा का दौरा (Asthma Attack) पड़ता है, तो उन्हें अपने ट्रीटमेंट प्‍लान के निर्देशों के तहत सीधे बैठना चाहिए और धीमी, लगातार सांसे लेनी चाहिए और इनहेलर से लगातार सांस लेना चाहिए। यदि संभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्‍सक से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए। नियमित जांच और सही उपचार अस्थमा के दौरे को रोकने में मदद करेगा।

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अस्‍थमा से जुड़े वैश्विक आंकड़े

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक, अस्‍थमा पूरी दुनिया में बच्चों में सबसे आम जीर्ण रोग है। लगभग 339 मिलियन से ज्‍यादा लोग पूरी दुनिया में लोग अस्थमा के साथ जी रहे हैं। कम और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में 80% से अधिक मौतें अस्थमा से होती हैं। अस्थमा का उपचार और सही प्रबंधन कर जीवन को बचाया जा सकता है।

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