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अरुण जेटली को नाजुक हालत के कारण रखा गया 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' पर, जानें क्यों और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

लेटेस्ट By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 19, 2019
अरुण जेटली को नाजुक हालत के कारण रखा गया 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' पर, जानें क्यों और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

लगातार नाजुक हालत के कारण अरुण जेटली को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। जानें क्या है अरुण जेटली की लेटेस्ट हेल्थ न्यूज और कब किसी व्यक्ति को पड़ती है लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support System) की जरूरत।

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली की हालत नाजुक है और वो पिछले कई दिनों से नई दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल में भर्ती हैं। बेहद गंभीर स्थिति में होने के कारण उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। पिछले दिनों 9 अगस्त को उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी के चलते यहां भर्ती कराया गया था। उनकी हालत के बारे में लगातार एम्स की तरफ से मेडिकल बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं। आमतौर पर किसी मरीज को लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत तब पड़ती है, जब वो उसकी हालत बहुत नाजुक हो और शरीर के सिस्टम को सामान्य रूप से काम करने में परेशानी होने लगे। आइए आपको बताते हैं क्या है लाइफ सपोर्ट सिस्टम और कितना प्रभावी है ये मरीज को बचाने में।

क्या है लाइफ सपोर्ट सिस्टम? (Life Support System)

यह तो आप भी जानते हैं कि एक व्यक्ति तभी तक जीवित रह सकता है जब तक उसके शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग- हृदय, मस्तिष्क, किडनी, लिवर आदि ठीक से काम करें। कई बार मरीज की हालत बहुत ज्यादा नाजुक होने पर बाकी अंग काम करते हैं मगर इनमें से कोई 1/2 अंग काम करना बंद कर देते हैं या धीमा कर देते हैं। ऐसी स्थिति में लाइफ सिस्टम सपोर्ट के द्वारा व्यक्ति के उस अंग को कंट्रोल किया जाता है, ताकि व्यक्ति की हालत में सुधार आने तक उसे जीवित रखा जा सके। इससे डॉक्टरों को इलाज के लिए और हालत स्थिर होने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है। वास्तव में लाइफ सपोर्ट सिस्टम आधुनिक मेडिकल साइंस का एक बड़ा चमत्कार है, जिसके द्वारा कई बार व्यक्ति को मौत के मुंह से भी बाहर निकाल लिया जाता है।

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क्यों रखा जाता है लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर? (Need of Life Support)

आमतौर पर जब व्यक्ति का इलाज संभव हो मगर गंभीर हालत के कारण उसके शरीर का कोई विशेष अंग ठीक से काम न करे या पूरी तरह काम करना बंद कर दे, तो उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा जाता है। इसे वेंटिलेटर भी कहते हैं। ये निम्न स्थितियों में होता है-

  • जब व्यक्ति सांस न ले पा रहा हो या उसके फेफड़े ठीक से काम न कर रहे हों।
  • जब व्यक्ति के दिल की धड़कन बहुत तेज घटे-बढ़े, उसे हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो।
  • जब व्यक्ति की किडनियां काम करना बंद कर दें।
  • जब व्यक्ति के मस्तिष्क में खून की आपूर्ति कम हो जाए या उसे स्ट्रोक हो।

क्या है अरुण जेटली की हालत? (Arun Jaitley Health News Update)

भाजपा नेता अरुण जेटली पिछले 1 साल से ज्यादा समय से बीमार चल रहे हैं। उन्हें किडनी की समस्या तो है, साथ ही सॉफ्ट टिश्यू कैंसर भी है। ऐसी स्थिति में पिछले काफी समय से वो लगातार डायलिसिस पर थे। 9 अगस्त को अचाकन उन्हे बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ के चलते एम्स में भर्ती कराया गया। अरुण जेटली एम्स के कार्डियो न्यूरो सेंटर में भर्ती हैं। फिलहाल वो Extracorporeal Membrane Oxygenation (ECMO) और Intra-Aortic Balloon Pump के सपोर्ट पर हैं।

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क्यों पड़ती है इन इस तरह के सपोर्ट की जरूरत?

आमतौर पर Extracorporeal Membrane Oxygenation (ECMO) की जरूरत तब पड़ती है, जब व्यक्ति के फेफड़े काम करना बंद कर दें। इस स्थिति में सपोर्ट सिस्टम में एक पंप के द्वारा आर्टिफिशियल फेफड़े से बंलड पंप किया जाता है, जिससे कि दिल तक पर्याप्त मात्रा में खून पहुंच सके।
Intra-Aortic Balloon Pump की जरूरत तब पड़ती है, जब दिल पर्याप्त मात्रा में खून को पंप नहीं कर पाता है। इस सिस्टम में एक पतले पाइप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे कैथेटर (Catheter) कहते हैं। इसके साथ एक लंबा बैलून जुड़ा होता है। ये दोनों ही सपोर्ट सिस्टम व्यक्ति के पूरे शरीर में खून ऑक्सीजनयुक्त खून को पहुंचाने के लिए दिए जाते हैं, ताकि मरीज के अंग काम करते रहें और उसकी मौत न हो।

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