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    गठिया रोग के प्रकार और लक्षण

    अर्थराइटिस By Shabnam Khan , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 09, 2014
    गठिया रोग के प्रकार और लक्षण

    अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं।

    अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं। अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढ़ने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देते हैं।

    अर्थराइटिस के प्रकार


    रूमेटॉयड अर्थराइटिस : यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो जाता है।

    सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है। समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।

    ओस्टियोसोराइसिस : इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है। यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले अंगों पीठ, कमर, घुटना और पांव को प्रभावित करता है ।

     

    Arthritis in Hindi

     

    पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घुमाने में कठिनाई होती है। अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है।

    एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होती है। इसमें दर्द हल्‍का होता है लेकिन लगातार बना रहता है। इसका उपचार संभव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए जा सकता है।


    रिएक्टिव अर्थराइटिस : शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद रिएक्टिव अर्थराइटिस होने का खतरा रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।

    गाउट या गांठ : गांठ वाला अर्थराइटिस जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल के समाप्‍त होने पर होता है। भोजन में बदलाव और कुछ सहायक दवाओं के कुछ दिन तक सेवन करने से यह बीमारी ठीक हो जाती है।


    सिडडोगाउट : यह रूमेटायड और गाउट वाले अर्थराइटिस से मिलता जुलता है। सिडडोगाउट में जोडों में दर्द कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल के जोड़ों में जमा होने से होता है।


    सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस : यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जो जोड़ों के अलावा शरीर के त्वचा और अन्य अंगों को प्रभावित करती है। यह बच्चे पैदा करने वाली उम्र में महिलाओं को होती है। वैसे तो यह जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारी है लेकिन समय पर इसकी पहचान कर इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है।

     

    arthritis pain in Hindi

     

    अर्थराइटिस के लक्षण

     

    •     जोड़ों में सूजन आ जाना।
    •     जोड़ों में दर्द रहना।
    •     घुमाने या मूव करने में परेशानी होना।
    •     जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।
    •     जोड़ों में भारीपन आ जाना।


    अर्थराइटिस की बीमारी समय के साथ-साथ अधिक तकलीफदेह होती जाती है। इसलिए, इसके लक्षण पता चलते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। इस समस्या में दवाओं के साथ साथ व्यायाम और योग से भी काफी लाभ मिलता है।

    Image Source - Getty Images

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