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कहीं आप भी शापैहोलिक तो नहीं

अवसाद By जया शुक्‍ला , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 10, 2012
कहीं आप भी शापैहोलिक तो नहीं

यह तथ्य शायद आपको चौंका दे, ज़रूरत से ज्यादा शापिंग भी एक प्रकार का नशा है।

Quick Bites
  • शापिंग की आदत बना सकती है आपको बीमार।
  • तनाव और अवसाद में ना करने जाए शापिंग।
  • इंपल्स कंट्रोल डिसॉर्डर बना सकता है शॉपौहॉलिक।
  • एण्टीडिप्रेसेंट ड्रग्स से मिल सकता है आराम।

शापिंग करने के मायने हर किसी के लिए अलग होते हैं, कुछ ज़रूरत के लिए शापिंग करते हैं, कुछ शौक के लिए और कुछ तनावमुक्ति के लिए। ऐसे में अगर आपकी शापिंग का कारण भी तनावमुक्ति जैसा कुछ है, तो इसे बदल डालें और कभी भी तनाव के समय शापिंग ना करें।  ऐसे में आप ना केवल पैसों की बर्बादी करेंगे बल्कि ऐसी चीज़ें भी खरीद लायेंगे जिनका आप कभी प्रयोग नहीं करेंगे।

  • अकसर लोग तनाव दूर करने के लिए शापिंग करते हैं। पुरूषों की तुलना में महिलाओं में इस समस्या के अधिक होने का कारण यह भी है कि उनके पास अधिक समय और तनाव होता है। अगर शापिंग आपके लिए अनिवार्य बनती जा रही है तो आप शापैहालिक्स हो सकते हैं। इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है काउंसलिंग।

 

  • मनोवैज्ञानिकों ककी मानें तो शापिंग करने का नशा भी कुछ अल्कोहल या ड्रग्स की तरह होता है। एक महिला अगर परेशान होती है या उसे अकेलापन महसूस होता है तो शा‍पिंग उसके लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है और वह आपनी शापिंग पर गर्व करती है।

  • शॉपिंग पर जाने से कुछ सवालों को खुद से पूछें जैसे, क्या  शापिंग आपके लिए तनाव मुक्ति का साधन है। क्या आप अपनी जेब से अधिक शापिंग करते हैं।क्या  आप अपनी शापिंग करने की आदत को चाह कर भी नहीं बदल पा रहे हैं। अगर इनमें से कोई भी आप्शन आपको सही लगता है तो सावधान हो जायें, आप भी शॉपौहॉलिक्स हो सकते है।

 

  • अगर आपको लगता है कि आप शापैहोलिक्स बन रहे हैं तो अपने पास कैश रखें। कभी भी कार्ड लेकर ना जायें । अगर आपको डिप्रेशन या ऐसी किसी कोई बिमारी है तो पहले अपनी चिकित्सा करा लें तभी शापिंग करें।

 

  • शापिंग के नाम पर आप स्वयं को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं, तो अपने सारे कार्ड फेंक दें ।  महीने का बजट बना लें और उसपर अडिग रहें।

 

  • अनावश्यक शॉपिंग करना भी एक बीमारी है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी को इंपल्स कंट्रोल डिसॉर्डर कहते हैं। यह क्लिप्टोमेनिया या पाइरोमेनिया जैसी बीमारियों की तरह ही होती है। इस रोग में लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते हैं।


    
कुछ डाक्टर्स का मानना है कि ऐसे में एण्टीडिप्रेसेंट ड्रग्स भी लिया जा सकता है।अगर आपकी समस्या बढ़ रही है तो आप काउंसलर से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

 

Image Source-Getty

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Written by
जया शुक्‍ला
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 10, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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