बालों में डाई लगाने वाले हो जाएं सावधान! नई रिसर्च के मुताबिक डाई से बढ़ता है कैंसर का खतरा

Updated at: Sep 06, 2020
बालों में डाई लगाने वाले हो जाएं सावधान! नई रिसर्च के मुताबिक डाई से बढ़ता है कैंसर का खतरा

सफेद बालों को छिपाने के लिए अगर आप भी करते हैं हेयर डाई का प्रयोग, तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये आपके शरीर में कई तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।

Anurag Anubhav
लेटेस्टWritten by: Anurag AnubhavPublished at: Sep 06, 2020

पहले के समय में माना जाता था कि बाल तभी सफेद होते हैं, जब व्यक्ति पर बुढ़ापा हावी होने लगता है। लेकिन आजकल के संदर्भ में ये बात सही नहीं है। धूल, मिट्टी, धूप, प्रदूषण और खानपान की गलत आदतों के कारण आजकल कम उम्र में ही लोगों के बाल सफेद होने के मामले काफी सामने आने लगे हैं। ऐसे में सफेद बालों को छिपाने के लिए डाई लगाकर इन्हें काला करना लोगों को बहुत आसान तरीका लगता है। कुछ हेयर डाई टेम्प्रेरी होती हैं यानी इन्हें लगाने के बाद इनका प्रभाव कुछ समय तक ही रहता है, जबकि कुछ हेयर डाई परमानेंट होते हैं। ये परमानेंट डाई भले ही आपको एक बार में ही लंबे समय के लिए बालों को रंगने की झंझट से मुक्ति दिला देती है, लेकिन इसका इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

cancer and hair dye

डाई से बढ़ता है कई प्रकार के कैंसर का खतरा

हाल में हुई एक रिसर्च के मुताबिक परमानेंट हेयर डाई का इस्तेमाल करने से कुछ विशेष प्रकार के कैंसरों का खतरा बढ़ता है, जैसे- ब्रेस्ट कैंसर, स्किन कैंसर, ओवरियन कैंसर आदि। चूंकि परमानेंट हेयर डाई का इस्तेमाल ज्यादातर महिलाएं करती हैं, इसलिए इसका खतरा भी उन्हें ही ज्यादा होता है। ये रिसर्च हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है और इसे BMJ नामक जर्नल में छापा गया है।

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36 सालों तक रिसर्च करने के बाद निकाला निष्कर्ष

हेयर डाई का इस्तेमाल आमतौर पर मध्यवर्ती उम्र वाले और बूढ़े लोग ज्यादा करते हैं, जिनमें 40 से 80 साल के लोग आमतौर पर शामिल हैं। चूंकि इस उम्र में वैसे ही कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में हेयर डाई का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने 1,17,200 महिलाओं पर रिसर्च किया। इस रिसर्च के लिए महिलाओं पर 36 साल से ज्यादा समय तक निगरानी रखी गई, जिसके बाद ये निष्कर्ष निकाला गया। रिसर्च की शुरुआत में इनमें से किसी भी महिला को न तो कैंसर था और न ही कैंसर का खतरा था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन महिलाओं ने परमानेंट हेयर डाई का इस्तेमाल किया, उनमें से ज्यादातर कैंसर का शिकार हुईं।

किस तरह के कैंसर का बढ़ता है खतरा?

रिसर्च के अनुसार परमानेंट हेयर डाई के प्रयोग से 3 तरह के ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, ओवरियन कैंसर और स्किन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि महिला कितनी मात्रा में और कितनी बार हेयर डाई का इस्तेमाल करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार हेयर डाई जितनी ज्यादा चटख काली होती है, उसमें केमिकल्स का कंसंट्रेशन उतना ज्यादा होता है, इसलिए खतरा भी उतना ही ज्यादा होता है।

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hair dye risks

अगर आप भी करती हैं हेयर डाई का इस्तेमाल तो इन बातो का रखें ध्यान

  • परमानेंट के बजाय टेम्पोरेरी या होममेड हेयर डाई का इस्तेमाल करें।
  • हेयर डाई को हाथ से न छुएं। इसे घोलने, लगाने और छुड़ाने से पहले हाथों में पॉलीथीन वाले ग्लव्स जरूर पहनें।
  • पैकेट पर जितनी देर लगाने के निर्देश दिए गए हैं, उससे ज्यादा समय तक इसे त्वचा पर लगा हुआ न छोड़ें।
  • दो अलग ब्रांड्स या दो अलग तरह के डाई को आपस में मिलाकर नया प्रयोग न करें क्योंकि ये खतरनाक हो सकता है।
  • अगर हेयर डाई लगाने के बाद त्वचा पर जलन, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ या अन्य कोई समस्या होती है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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