धूप में ही नहीं घर के अंदर भी जरूरी है सनस्क्रीन का प्रयोग, जानें कारण

धूप में ही नहीं घर के अंदर भी जरूरी है सनस्क्रीन का प्रयोग, जानें कारण

अगर आप घर के अंदर हैं फिर भी आपको सनस्क्रीन का प्रयोग करना चाहिए। दरअसल मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि स्क्रीन वाले गैजेट्स से निकलने वाली नीली किरणें (Blue Rays) त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं, जिनसे बचाव के लिए सनसक्रीन लगाना जरूरी है। इसका प्रयोग न करन

यह तो आप सभी जानते हैं कि धूप के हानिकारक प्रभाव से बचाव के लिए सनस्क्रीन का प्रयोग बहुत जरूरी है। सनस्क्रीन धूप की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाते हैं। यही कारण है कि स्किन डॉक्टर्स हमेशा सलाह देते हैं कि घर से बाहर निकलें, तो सनस्क्रीन जरूर लगाएं। मगर क्या आप जानते हैं कि घर के अंदर रहने के दौरान भी आपको सनस्क्रीन का प्रयोग जरूर करना चाहिए? जी हां, एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपको हर मौसम में, घर के बाहर रहें या अंदर, सनस्क्रीन का प्रयोग करना चाहिए।

स्क्रीन वाले गैजेट्स भी त्वचा को पहुंचाते हैं नुकसान

आजकल स्क्रीन वाले गैजेट्स जैसे- टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर आदि हर घर में मौजूद हैं। इन गैजेट्स की स्क्रीन से निकलने वाली नीली किरणें (Blue Rays) भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। सनस्क्रीन आपको और आपके बच्चों को इन नीली किरणों से प्रभाव से बचाता है। आपको जानकर हैरानी होगी मगर हाल में हुए कई शोध बताते हैं कि मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि से निकलने वाली नीली किरणें आपकी त्वचा को जल्दी बूढ़ा और कमजोर बना सकती हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण इससे कई तरह के त्वचा रोग भी हो सकते हैं।

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बच्चों की त्वचा को ज्यादा खतरा

आजकल छोटे बच्चे टीवी, मोबाइल आदि स्क्रीन वाले गैजेट्स के सामने बहुत ज्यादा समय बिताते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की त्वचा को हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भी घर के अंदर और बाहर सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। दरअसल बच्चों की त्वचा आमतौर पर ज्यादा सेंसिटिव (संवेदनशील) और मुलायम होती है। ऐसे में त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन बहुत जरूरी है।

केमिकलयुक्त नहीं आर्गेनिक होना चाहिए सनस्क्रीन

आजकल बाजार में मिलने वाले ज्यादातर सनस्क्रीन केमिकलयुक्त होते हैं। इनमें मौजूद केमिकल्स के कारण लंबे समय तक त्वचा पर इनका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। आपको केमिकलयुक्त सनस्क्रीन की जगह ऑर्गेनिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। ऑर्गेनिक सनस्क्रीन प्राकृतिक चीजों से बने रहते हैं, इसलिए इनका प्रयोग त्वचा के लिए सुरक्षित होता है। ऑर्गेनिक सनस्क्रीन में काओलिन क्ले (चीनी मिट्टी), एलोवेरा, नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल, बादाम के तेल आदि का प्रयोग किया जाता है।

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धूप में हर 3 घंटे में लगाएं सनस्क्रीन

अगर आप घर के अंदर हैं और बाहर नहीं निकल रहे हैं, तो आपका सनस्क्रीन आपको एक बार लगाने पर 5-6 घंटे की सुरक्षा दे सकता है। मगर यदि आप धूप में बाहर निकल रहे हैं, तो ज्यादा सुरक्षा के लिए आप हर 3-4 घंटे में एक बार सनस्क्रीन जरूर लगाएं। दरअसल सनस्क्रीन को इस तरह बनाया जाता है कि ये त्वचा में समा जाएं। ऐसे में धूप में रहने पर पसीना और प्रदूषण के कारण 3-4 घंटे में त्वचा की ऊपरी पर्त से सनस्क्रीन हट जाती है। इसलिए इसे दोबारा लगाना चाहिए।

गर्मियों में वाटर बेस्ड होना चाहिए सनस्क्रीन

गर्मियों में आपका सनस्क्रीन वाटर बेस्ड होना चाहिए। दरअसल सनस्क्रीन 2 तरह के आते हैं, पहला ऑयल बेस्ड और दूसरा वाटर बेस्ड। ऑयल बेस्ड सनस्क्रीन में तेलों का प्रयोग किया जाता है। ये सनस्क्रीन सर्दियों में फायदेमंद होते हैं क्योंकि उस समय त्वचा ज्यादा रूखी होती है और धूप हल्की होती है। जबकि ऑयल बेस्ड सनस्क्रीन का प्रयोग गर्मयों में करना चाहिए, इससे पसीना आने पर त्वचा पर चिपचिपापन नहीं होता है।

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