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वायु प्रदूषण से हर साल मरते हैं 13 लाख भारतीय, इस तरह रखें खुद को सुरक्षित

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 27, 2018
वायु प्रदूषण से हर साल मरते हैं 13 लाख भारतीय, इस तरह रखें खुद को सुरक्षित

घर के अंदर का वायु प्रदूषण दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है, जो भारत में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है। 

घर के अंदर का वायु प्रदूषण दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है, जो भारत में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है, और भारत जैसे देश में, जहां घर के अंदर खाना पकाने से लेकर हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण मकान के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है और यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में 10 गुना अधिक नुकसान कर सकती है। खराब वेंटिलेशन से फेफड़ों के कामकाज में कठिनाई सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

स्थिति इस नाते और खराब हो रही है, क्योंकि भारत में घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर कोई पुख्ता नीति नहीं है, जिस कारण इसके वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, लोग अपने जीवन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मकानों के अंदर बिताते हैं। 50 प्रतिशत से अधिक कामकाजी वयस्क कार्यालयों या समान गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं। यह बड़े पैमाने पर प्रदूषण के कारण इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है।

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उन्होंने कहा कि कुछ अन्य कारकों में विषैले रसायनों, जैसे सफाई उत्पादों, अस्थिर कार्बनिक यौगिकों, धूल, एलर्जेंस, संक्रामक एजेंट, सुगंध, तंबाकू का धुआं, अत्यधिक तापमान और आद्र्रता शामिल हैं। वर्तमान में, भारत में घर के अंदर वायु की गुणवत्ता के लिए कोई औपचारिक मानक नहीं है। ऐसे में इनडोर वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का अनुभव वर्षो बाद ही किया जा सकता है।

घर के अंदर प्रदूषण के कुछ दुष्प्रभावों में आंखों, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकान शामिल है। इसके अलावा, यह लंबी अवधि में हृदय रोग और कैंसर का कारण बन सकता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा, इनडोर वायु प्रदूषण की समस्या हल करने में एक मुश्किल आड़े आ सकती है। आदर्श समाधान तो यही है कि सभी खिड़कियों को खोला जाए और इनडोर प्रदूषकों से बचने की सलाह दी जाए। हालांकि, प्रदूषित शहरों में यह मुश्किल है, क्योंकि बाहरी प्रदूषक घर में भी प्रवेश कर सकते हैं।उन्होंने बताया कि हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने 25वें एमटीएनएल परफेक्ट हेल्थ मेला के एक हिस्से के रूप में 'इनडोर एयर पॉल्यूशन इज स्लो पॉयजन' नामक एक अभियान चलाया है। यह मेला नई दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में 24 से 28 अक्टूबर, 2018 तक चलेगा।

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एचसीएफआई के कुछ सुझाव

  • घरेलू सजावट में पौधों को अधिक से अधिक पौधे शामिल करें और अपने घर में होने वाले प्रदूषण पर निगाह रखें। अरेका पाम, मदर-इन-लॉज टंग और मनी प्लांट जैसे पौधे ताजा हवा का अच्छा स्रोत हो सकते हैं।
  • घर के अंदर धूम्रपान से बचें और सुनिश्चित करें कि जहरीली गैसों और पदार्थों को घर के अंदर सर्द-गर्म मौसम में न छोड़ा जाए।
  • रिसाव को ठीक करके और गर्मी व ठंड के दौरान अंदरूनी कमियों को दुरुस्त करने तथा उचित रखरखाव व मरम्मत से हवा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है।
  • आपके रेफ्रिजरेटर और ओवन जैसे उपकरण नियमित रखरखाव के बिना हानिकारक गैसों को उत्सर्जित कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि आप नियमित अंतराल पर उनकी सर्विस करवाते हैं।
  • नियमित रूप से डस्टिंग का अपना ही महत्व है। हर घर धूल और गंदगी को अंदर खींच सकता है। जबकि आप नियमित रूप से अपने फर्श और सामान को साफ करते हैं, लेकिन घर के कई सारे कोने और फर्नीचर सेट के नीचे अक्सर सफाई नहीं हो पाती है।
  • घर पर कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करें। इसके बजाय जैव-अनुकूल उत्पादों का उपयोग करें। वायु में घुले जहरीले रसायनों की संख्या सीमित करने से घर के अंदर प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

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