कोरोना के इस लक्षण के कारण बहुत से मामलों को पहचानने में हुई चूक! एम्स ने माना इस गलती से छूट गए बहुत से मरीज

Updated at: Jul 27, 2020
कोरोना के इस लक्षण के कारण बहुत से मामलों को पहचानने में हुई चूक! एम्स ने माना इस गलती से छूट गए बहुत से मरीज

दिल्ली एम्स ने हाल ही में एक अध्ययन में ये बताया है कि कोरोना के एक प्रमुख लक्षण पर जोर देने के कारण बहुत से मामले छूट गए, जानें कौन सा है ये लक्षण। 

Jitendra Gupta
विविधWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 27, 2020

भारत में कोरोना की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है और लगातार हजारों नए मामले सामने आ रहे हैं। बीते रविवार को एक दिन में कोरोना के 50 हजार से अधिक पॉजिटिव मामले सामने आए, जिसके बाद कोरोना के मामलों की संख्या 14 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। हालांकि राहत की खबर ये है कि कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने के आंकड़ों में भी काफी सुधार देखने को मिल रहा है। भारत में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत 64 फीसदी के करीब है। बता दें कि रविवार तक देश में कुल 9,16,505 मरीज ठीक हो चुके हैंय़ साथ ही कोरोना से मरने वाली की संख्या 32,811 हो गई है। 

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कोरोना के मामलों की बढ़ती संख्या के बीच इसके संकेतों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है। हालांकि महामारी फैलने के बाद से बुखार को कोरोनोवायरस के प्रमुख लक्षण के रूप में देखा गया है। यही कारण है कि किसी भी स्थान या भवन में प्रवेश करने पर बॉडी टेम्परेचर की जांच करना अब काफी आम चुका है। लेकिन दिल्ली के एम्स द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इस कदम का विरोध जताया गया है। क्लिनिको-डेमोग्राफिक प्रोफाइल और उत्तर भारत स्थित एक कोरोना देखभाल केंद्र में भर्ती कोरोना मरीजों के परिणामों से ये सामने आया हैं कि 144 में से केवल 17 प्रतिशत कोरोनोवायरस पॉजिटिव रोगियों में ही बुखार एक लक्षण के रूप में दिखाई दिया।

सिर्फ इतना ही नहीं इस अध्ययन ने उन अन्य वैश्विक रिपोर्टों का भी समर्थन किया है, जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि केवल कोरोना से पीड़ित 44 प्रतिशत लोगों में ही शुरुआत में बुखार जैसा संकेत देखा गया जबकि 88 प्रतिशत ने अस्पताल में भर्ती होने के दौरान बुखार जैसे संकेत को महसूस किया। 

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44.4 फीसदी रोगियों में कोई लक्षण नहीं 

अध्ययन के मुताबिक, कोरोना के एक प्रमुख लक्षण के रूप में बुखार पर अनावश्यक रूप से जोर देने की चेतावनी के कारण कई मामलों में चूक हुई है और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अध्ययन में इसके अलावा, ये भी कहा गया कि 44.4 प्रतिशत रोगियों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिखा, जबकि 34.7 प्रतिशत ने खांसी की सूचना दी, जिसमें 17.4 प्रतिशत को बुखार था। अध्ययन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। कोरोना के सबसे लंबे समय तक प्राथमिक क्लिनिकल संकेतों में लगातार बुखार, खांसी, थकान और सांस लेने में कठिनाई जैसे संकेतों को माना जाता है। हालांकि, जून माह में स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंध व स्वाद में हानि, दस्त के साथ-साथ मांसपेशियों में दर्द के लक्षणों को भी कोरोना का संकेत बताया था। 

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क्यों है ऐसा खतरनाक ?

दुनिया भर के चिकित्सा विशेषज्ञ बॉडी टेम्परेचर पर कम जोर देने को कह रहे हैं। मेडिकल एक्सपर्ट का ये तर्क है कि कोरोना पॉजिटिव रोगियों का पता लगाने के लिए बॉडी टेम्परेचर चेक करना कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि इससे ज्यादा खराब और क्या हो सकता है? बॉडी टेम्परेचर की जांच लोगों के भीतर सुरक्षा की नकली भावना को जन्म देता है। शरीर में वायरस बढ़ने के कारण कई बार बुखार या गले में खराश जैसे लक्षण बाद में दिखाई देते हैं लेकिन मरीज फिर भी अपने आसपास के लोगों में संक्रमण फैलाने में सक्षम होता है, जो कम्युनिटी स्प्रेड का सबसे बड़ा कारण है। 

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कोरोना का पल-पल बदलता स्वरूप

चीन के वुहान से पिछले साल फैला कोरोना वायरस अब लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। जी हां, हर दिन इसके लक्षणों में बदलाव से ये पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि किसे कोरोना है और किसे नहीं। हाल ही में हुए एक अध्ययन में ये सामने आया है कि  कोरोनावायरस आपके कान में भी हो सकता है। अध्ययन में  ये कहा गया है कि कोरोनावायरस आपके कान और उसके पीछे वाली मेस्टॉयड हड्डी को भी संक्रमित कर सकता है। अमेरिका में ऐसे 2 मामले सामने आए हैं, जिसके बारे में शोधकर्ताओं ने अपनी राय जाहिर की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शोध के दौरान कोरोना से हुई मौत के 3 में से 2 शवों के कान और इसके पीछे वाले हिस्से में वायरस मिला है। इससे ये साफ हो गया है कि कोरोनावायरस शरीर के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है। कोरोना सिर्फ नाक, गला और फेफड़ों को ही नहीं बल्कि हमारे शरीर के कान जैसे अंग को भी संक्रमित कर सकता है। 

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