एम्स के डॉक्टरों ने 28 साल के युवक के लिवर से निकाला 20 सेंटीमीटर का चाकू, जानें कैसे चाकू पहुंचा लिवर के अंदर

Updated at: Jul 28, 2020
एम्स के डॉक्टरों ने 28 साल के युवक के लिवर से निकाला 20 सेंटीमीटर का चाकू, जानें कैसे चाकू पहुंचा लिवर के अंदर

एम्स के डॉक्टरों ने एक 28 साल के युवक के लिवर से 20 सेंटीमीटर का चाकू निकाला है। हालांकि युवक के किसी अंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। 

Jitendra Gupta
लेटेस्टWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 28, 2020

आपने अक्सर टीवी या अखबारों में विचित्र तरह की खबरों को देखा या फिर पढ़ा होगा कि डॉक्टरों ने किसी के पेट से ये निकाला वो निकाला लेकिन सब चीजें आकार में छोटी होती थीं। लेकिन दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों ने तीन घंटे की एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद 28 साल के एक व्यक्ति के लिवर से 20 सेमी लंबा एक चाकू सफलतापूर्वक निकाला है। ये व्यक्ति मनोविकार के कारण इस चाकू को निगल गया था, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि वे इस बात से हैरान हैं कि कैसे इस व्यक्ति के चाकू निगलने के बाद भी हवा नली, फेफड़े, हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा जबकि चाकू की नोंक निकली हुई थी। 

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डॉक्टरों ने क्या कहा?

एम्स में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट के प्रोफेसर डॉ. निहार रंजन दास ने बताया, "चाकू आसानी से भोजन नलिका को छेदता हुआ श्वासनली, हृदय या फिर मुंह से लिवर तक जा सकता था।" उन्होंने कहा, "हमने पहले के इस तरह के मामलों को खोजने की कोशिश की लेकिन इतने बड़े और तेज चाकू के घुसने की सूचना अभी तक दर्ज नहीं है। हालांकि हम और अधिक इतिहास की खोज रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पहले के दर्ज मामलों में सिर्फ छोटी सुई या फिर मछली की हड्डियों के लिगर में जाने के ही मामले सामने आए थे। 

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कौन है ये शख्स?

ये 28 साल का व्यक्ति हरियाणा के पलवल का रहने वाला है और पेश से एक दिहाड़ी मजदूर है। ये व्यक्ति किसी मनोविकार से ग्रस्त है और इसे नशा करने की आदत है। डॉक्टर ने कहा कि व्यक्ति नशेड़ी नहीं है लेकिन अक्सर नशा किया करता था। डॉक्टर के मुताबिक, उस शख्स ने उन्हें बताया कि डेढ़ महीने पहले कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान एक दिन वह अपने रसोई घर में था, तो उसे चाकू खाने का मन हुआ। उसने उसे चबाने की कोशिश की और आखिरकार उसे पानी से निगल लिया।

उसने बताया कि एक महीने तक उसे किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन बाद में, उसे खाने में कठिनाई होने लगी, वजन घटने लगा, बुखार होने लगा, पेट में दर्द जैसी समस्याएं होने लगी, जो जल्द ही असहनीय हो गई। जिसके बाद उसे स्थानीय अस्पतालों में ले जाया गया और बाद में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया।

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डॉक्टरों के मुताबिक, "अल्ट्रासाउंड और पेट के एक्स-रे में लिवर में फंसा हुआ एक चाकू जैसा ब्लेड दिखाई दिया। इस वस्तु को बाहर निकालने की चुनौतियों को देखते हुए, डॉक्टरों ने मरीज को एम्स में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग में भेजा।

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एम्स में कैसे हुआ मरीज का इलाज 

डॉक्टरों ने कहा कि जब मरीज को इमरजेंसी में दाखिल किया गया था तो एक अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य जांच की गई ताकि चाकू की सही स्थिति, उसके महत्वपूर्ण अंगों को किसी प्रकार के नुकसान का अंदाजा और उसके कारण होने वाली जटिलताओं के बारे में पता चल सके। डॉक्टर के मुताबिक, "सीटी स्कैन से हमने पाया कि चाकू का ब्लेड पूरी तरह से लिवर के अंदर है चाकू का हैंडल छोटी आंत के पहले हिस्से में है।

व्यक्ति को हाई एंटीबायोटिक दवाओं पर रखा गया और उसे क्रीटिकल केयर में रखा गया। सात दिनों के बाद, हालांकि उसकी स्थिति में कुछ हद तक सुधार हुआ, जिसके बाद डॉक्टरों ने सर्जरी करने का फैसला किया। तीन घंटे तक चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी में 19 जुलाई को आंत को खोलकर चाकू निकाल लिया गया था। 

सर्जरी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, रेडियोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की एक टीम भी शामिल थी और अल्ट्रासाउंड टीम के मार्गदर्शन में चाकू निकाला गया था। डॉ. दास का कहना है कि मरीज सात दिनों से आईसीयू में था। वह अब खतरे से बाहर है और आईसीयू केयर से बाहर है।

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