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अस्‍थमा के कारण फेफड़ों पर होता है ये असर

अस्‍थमा By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 28, 2012
अस्‍थमा के कारण फेफड़ों पर होता है ये असर

अस्थमा में श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। जब एलर्जन्स या इरिटेंट्स श्वासनली के संपर्क में आते हैं तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है। अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती

अस्थमा यूनानी शब्द है, जिसका अर्थ है- ‘जल्दी-जल्दी सांस लेना’। जब अस्थमा का दौरा पड़ता है, तो सामान्य सांस के लिए भी गहरी-गहरी या लंबी-लंबी सांस लेनी पड़ती है। पूरी दुनिया में तीस करोड़ से ज्यादा लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। सर्दियों में इस बीमारी से परेशान लोगों की तकलीफ बढ़ जाती है। अस्थमा यानी दमा के रोगियों को कई बार सर्दियों के मौसम में समझ नहीं आता कि अपनी इस बीमारी पर काबू पाने के लिए क्या करें।

अस्‍थमा का असर फेफड़ों पर


1. अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें श्वासनली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा हो जाती है। जब एलर्जन्स या इरिटेंट्स श्वासनली के संपर्क में आते हैं तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

2. अस्थमा फेफड़ों की एक साधारण बीमारी है, जिसमें सांस की नली सामान्य से अधिक संवेदनशील होती है और इनमें सूजन आ जाती है। इस वजह से सांस की नलियों में सिकुड़न और रुकावट आ जाती है।

3. कुछ विशेष परिस्थितियों में अस्थमा का अटैक पड़ सकता है, जैसे धुआं, धूल, पौधे के परागकण, मौसम में बदलाव, पशु-पक्षियों के बाल एवं पंख, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, तीव्र गंध, ठंडी हवा, मानसिक चिंता, ऊन व रुई के रेशे आदि।



4. अस्थमा एक आदमी से दूसरे आदमी को लगने वाली संक्रामक बीमारी नहीं है, बल्कि जीन्स के जरिए माता-पिता से बच्चे में आ जाती है। धूल या ठंड के कारण बलगम या बिना बलगम की खांसी आना, आराम के समय या शारीरिक थकान के समय सांस फूलना, छाती में कसाव महसूस करना, रात को खांसी आना एवं सांस फूलना, सांस की घरघराहट या सांस लेते समय बांसुरी जैसी आवाज आना, नाक बहना व लगातार छींके आना आदि है।

5. अस्थमा में श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपू‍र्ति बंद हो सकती है।

 

साथ ही ये आम समस्‍याएं भी होती है



जल्दी-जल्दी सांस लेना।

सांस लेने में तकलीफ और खांसी के कारण नींद में रुकावट।

सीने में दर्द या कसाव।


इलाज

अस्थमा की शिकायत होने पर नियमित इलाज कराकर इससे बचा जा सकता है। डॉक्टर की सलाह व इलाज से रोगी पूरी तरह सामान्य व चुस्त रह सकता है। वर्तमान में अस्थमा का इलाज बहुत आसान एवं असरदार है। विज्ञान के इस युग में अस्थमा के इलाज में भी काफी खोज हुई है, जिनकी मुख्य देन सांस के जरिए लेने वाली दवाओं की खोज है। इनमें गोली, कैप्सूल या पीने वाली दवाई की तुलना में केवल पांच से 10 प्रतिशत मात्रा की आवश्यकता होती है। ये दवाएं जल्दी असर दिखाती है, इसलिए सांस लेने से ली जाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट या दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं होते, जिस प्रकार घाव या चोट पर लगने वाली मलहम अपना असर केवल वहीं करती है, जहां उसे लगाया जाता है। ठीक उसी प्रकार सांस के जरिए लेने वाली दवा अपना असर केवल फेफड़ों पर दिखाती है।

 

एक और बात, इससे दवाओं की मात्रा घट जाती है और इसका असर जल्दी एवं अधिक होता है। सांस के जरिए लेने वाली दवाएं स्ट्रांग नहीं होती और न ही अंतिम इलाज के तौर पर देखी जानी चाहिए बल्कि पहली च्वाइस होनी चाहिए। इनके इस्तेमाल से रोगी एक सामान्य, सुखी तथा सफल जीवन जी सकता है।

 

 

Image Source - Getty Images

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