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महिलाओं में प्रसव के बाद बढ़ जाता है किडनी के संक्रमण का खतरा, ये हैं 9 लक्षण

महिला स्‍वास्थ्‍य By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 16, 2019
महिलाओं में प्रसव के बाद बढ़ जाता है किडनी के संक्रमण का खतरा, ये हैं 9 लक्षण

जब शिशु का जन्म होता है तो संक्रमण का जितना खतरा बच्चे को होता है उतना ही खतरा मां को भी होता है। डिलीवरी के बाद, खासकर नॉर्मल डिलीवरी के बाद, महिलाओं में कई तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर महिलाओं में डिलीवरी के बाद मूत्रमार्ग के सं

जब शिशु का जन्म होता है तो संक्रमण का जितना खतरा बच्चे को होता है उतना ही खतरा मां को भी होता है। डिलीवरी के बाद, खासकर नॉर्मल डिलीवरी के बाद, महिलाओं में कई तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर महिलाओं में डिलीवरी के बाद मूत्रमार्ग के संक्रमण या किडनी के संक्रमण के मामले देखे गए हैं। प्रसव के बाद वजाइना (योनि) की ठीक तरह से साफ-सफाई न करने से मूत्राशय का संक्रमण हो जाता है, जो धीरे-धीरे किडनी तक पहुंच जाता है। आइए आपको बताते हैं क्या हैं डिलीवरी के बाद किडनी के संक्रमण के लक्षण।

डिलीवरी के बाद किडनी इंफेक्शन के लक्षण

डिलीवरी के बाद महिला को अगर किडनी का इंफेक्शन हो जाए, तो आमतौर पर ये लक्षण दिख सकते हैं-

  • जल्दी-जल्दी पेशान जाना पड़े।
  • पेशाब को रोक पाने में दिक्कत महसूस होती है।
  • पेशाब करते समय दर्द या जलन हो।
  • पेशाब से तेज गंध या इसका रंग भूरा, धुंधला, रक्तरंजित या तेज दुर्गंध आना।
  • तेज बुखार आना जो दवाएं लेने पर भी ठीक न हो रहा हो।  
  • अगर बहुत कमजोर आने लगे और बीमार होने जैसा महसूस हो रहा हो।
  • अगर पीठ के निचले हिस्से या कमर के ऊपरी भाग में दर्द हो रहा हो। 
  • कब्ज की शिकायद लंबे समय तक रहे।
  • अगर पेट में दर्द हो तो।

क्यों होता है प्रसव के बाद संक्रमण

गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन मूत्रमार्ग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं। ऐसे में प्रोजेस्टेरॉन मूत्रवाहिनियों की मांसपेशियों को शिथिल कर देता है। जिससे गुर्दों से मूत्राशय में जाने वाला पेशाब का प्रवाह बाधित होता है। बढ़ते हुए गर्भाशय का भी यही असर होता है। और इसके चलते जीवाणुओं को बाहर निकलने से पहले ही वहां बढ़ने का समय मिल जाता है और संक्रमण हो जाता है। यदि किसी महिला को प्रसव पश्चात, खुद में ये असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हों, तो उसे तत्काल प्रभाव से डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये, क्योंकि यदि संक्रमण यदि बढ़ जाए तो गंभार रूप ले सकता है और शरीर को हानि पहुंचा सकता है।

क्या है संक्रमण का इलाज

आमतौर पर इंफेक्शन के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर मूत्र परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। अगर जांच में इस संक्रमण की पुष्टि होती है, तो आमतौर पर डॉक्टर इंजैक्शन या ओरल दवाई देकर उपचार करते हैं। अगर एंटिबायटिक्स से आराम ना मिले तो ऐसे में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन कर सकता है, ताकि आपके मूत्राशय और गुर्दों को ठीक से देखा जा सके।

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कैसे हो सकता है इंफेक्शन से बचाव

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। साथ ही अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने का प्रयास करें।
  • चाहे घर हो या बाहर, बाथरूम को साफ रखें, अधोवस्त्रों की सफाई का ध्यान रखें और अपने प्राइवेट पार्ट की भी।
  • घर से बाहर गंदे बाथरूम या यूरिनल्स का प्रयोग करने से बचें।
  • इन्फेक्शन की स्थिति में खास सतर्क रहें और दवाइयों का नियमित सेवन करें।

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