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World Alzheimer's Day 2019: इन 7 कारणों से युवाओं में बढ़ रहा है अल्जाइमर रोग, याददाश्त में कमी है पहला संकेत

अन्य़ बीमारियां By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 20, 2019
World Alzheimer's Day 2019: इन 7 कारणों से युवाओं में बढ़ रहा है अल्जाइमर रोग, याददाश्त में कमी है पहला संकेत

अल्जाइमर दिमाग से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिसका पहला संकेत कमजोर याददाश्त यानी चीजों को भूलने की आदत है। विश्व अल्जाइमर दिवस यानी World Alzheimer's Day पर जानें अल्जाइमर का खतरा बढ़ाने वाले 7 कारण और इसका इलाज।

अल्जाइमर की शुरुआत चीजों को भूलने, लोगों का नाम भूलने आदि से होती है और धीरे-धीरे मस्तिष्क इतना कमजोर हो जाता है कि व्यक्ति घर का रास्ता, लोगों के चेहरे, अपने घर-परिवार के सदस्यों को भी भूलने लगता है। अल्जाइमर धीरे-धीरे दिमाग को खोखला कर देता है। अल्माइमर दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती संकेत बेहद सामान्य होने के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अल्जाइमर के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए दुनियाभर में 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस यानी World Alzheimer's Day के रूप में मनाया जाता है।

आमतौर पर अल्जमाइर को बूढ़ों की बीमारी माना जाता है क्योंकि इसके ज्यादातर शिकार लोग 50 साल की उम्र के बाद वाले होते हैं। मगर पिछले कुछ सालों में युवाओं में भी अल्जाइमर के मामले सामने आने लगे हैं। आइए आपको बताते हैं कि अल्जाइर को बढ़ाने वाले जोखिम कारक और इसके इलाज के बारे में।

क्यों होता है कम उम्र में अल्जाइमर

कम उम्र में अल्जाइमर होने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। हालांकि ये बीमारी युवाओं में भी बढ़ रही है। कम उम्र में अल्जाइमर की बीमारी होने का खतरा तब और बढ़ जाता है, अगर पहले घर में कोई नजदीकी रिश्तेदार (माता-पिता या भाई-बहन) इस बीमारी से पीड़ित हो। सामान्य तौर पर, अल्जाइमर परिवार के इतिहास वाले लोगों में आनुवांशिक परीक्षण की कोई भूमिका नहीं होती है और इसके लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन अगर कोई पारिवारिक इतिहास है, तो लोगों में अल्जाइमर के लक्षण बढ़ जाते है।

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युवाओं में अल्जाइमर का खतरा बढ़ाने वाले 7 कारण

  • नींद की दिनचर्या में बदलाव
  • मोटापे की समस्या
  • शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना या ज्यादातर समय बैठे रहना
  • धूम्रपान करना
  • हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
  • हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या
  • डायबिटीज को कंट्रोल न करना

अल्जाइमर रोग का उपचार

अल्जाइमर रोग के उपचार के लिए कोई निश्चित परीक्षण नहीं है। हालांकि, डॉक्टर कुछ मानसिक, शारीरिक, न्यूरोलॉजिकल और इमेजिंग परीक्षण जैसे कि एमआरआई या सीटी स्कैन कर सकता है, ताकि अन्य स्थितियों का पता लगाकर रोग का निदान किया जा सके। लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, डॉक्टर रोगी के चिकित्सा इतिहास, लक्षण और जीवन शैली के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। ये बड़ा दुर्भाग्य है कि अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, यदि शुरुआती चरण में पता चला है, तो दवाओं द्वारा मस्तिष्क के ऊतकों के डैमेज होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। इसके अलावा, दवाएं लक्षणों से राहत देने में मदद कर सकती हैं। इस क्षेत्र में बहुत सारे शोध चल रहे हैं और उम्मीद है कि निकट भविष्य में बेहतर रणनीति और उपचार के विकल्प सामने आएंगे।

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अल्जाइमर से कैसे बचें युवा

युवाओं को अल्जाइमर रोग से बचाव के लिए जरूरी है कि वो शुरुआत से ही अपने खानपान और अपनी आदतों का ध्यान रखें। धूम्रपान और शराब की लत अगर है, तो इसे कम करें और धीरे-धीरे छोड़ दें। इसके अलावा तमाम तरह के लाइफस्टाइल से जुड़े रोगों जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करके भी अल्जाइमर से बचा जा सकता है।

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