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फेफड़ों के कैंसर से हर साल मरते हैं 60 लाख लोग, वजह है तम्‍बाकू! एक्‍सपर्ट से जानिए कैंसर के बचाव

कैंसर By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 26, 2019
फेफड़ों के कैंसर से हर साल मरते हैं 60 लाख लोग, वजह है तम्‍बाकू! एक्‍सपर्ट से जानिए कैंसर के बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत विश्व में तम्बाकू की खपत करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है! जहां हर साल 1.35 मिलियन लोग तम्बाकू से हो

भारत में ख़ास तौर से गैर-संक्रामक रोग (एनसीडी) का दबाव ज्यादा है। डब्लूएचओ के अनुमानों (सितम्बर 2017) के अनुसार में भारत में होने वाली कुल मौतों में से 61% मौतें हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह सहित अन्य असंक्रामक रोगों से होती है कैंसर आज भी दूसरी सबसे बड़ी बीमारी और मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनी हुयी है।  दुनिया भर में होने वाले कुल मौतों में कैंसरजनित मृत्यु का अनुपात 8% से अधिक है.  भारत में फेफड़े का कैंसर (स्रोत) सबसे आम है और जो नए कैंसर के मामले देश में पहचाने गए हैं उनमें 5.9% मरीज़ फेफड़े के कैंसर के हैं (स्रोत)। कैंसर में वृद्धि का कारण सीधे तौर पर हानिकारक जीवनशैली, तम्बाकू सेवन, शराब सेवन और मोटापे से सम्बंधित है। फेफड़े के कैंसर के लगभग 95% प्रतिशत मामले तम्बाकू सेवन के कारण होते हैं और इससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा होती हैं। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी द्वारा किये गए अध्ययन विस्तृत रूप से यह सिद्ध करते हैं कि ज्वलनशील तम्बाकू उत्पाद कैंसर का एकमात्र सबसे बड़ा कारण है।

   

डब्लूएचओ और यूएस नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट द्वारा किये अध्ययनों में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2030 के आते-आते विश्व स्तर पर तम्बाकू के कारण होने वाली मौतों की वार्षिक संख्या 6 मिलियन से बढ़कर 8 मिलियन सालाना हो जायेगी (स्रोत)। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत विश्व में तम्बाकू की खपत करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहां 2018 में लगभग 28.6% वयस्कों और 15% बच्चों ने तम्बाकू का सेवन किया और देश में हर साल 1.35 मिलियन लोग तम्बाकू से होने वाली बीमारियों मरते हैं। कहना न होगा कि कैंसर के खतरे को कम करने के लिए तम्बाकू सेवन पर नियंत्रण करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 

कैसे कर सकते हैं बचाव  

डॉ के.के. अग्रवाल का कहना है कि, "लोगों को इस विषय में जानकारी देना जरूरी है कि तम्बाकू का उपयोग हानिकारक प्रभाव पैदा करता है और उन्हें इस बात के लिए भी प्रेरित करना होगा कि वह सिगरेट और तम्बाकू के किसी भी प्रकार के उपयोग से बचें। लम्बे समय से धूम्रपान कर रहे लोगों के मामले में, जहां निकोटीन पर निर्भरता है और उसे छोड़ना सदैव बहुत प्रभावकारी नहीं होता और ऐसे में कम नुकसान करने वाले विकल्प तलाशे जा सकते हैं। कई विकसित/ विकासशील देश, जैसे कि ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, नॉर्वे और कनाडा धूम्रपान के बजाय कम नुकसानदेह विकल्प दे रहे हैं ताकि तम्बाकू के उपयोग से होने वाली हानियों को रोका जा सके।"  

डॉ अनूप मिश्रा कहते हैं कि, "भारत की तात्कालिक आवश्यकता, हानि को कम करने की रणनीति अपनाकर कैंसर जैसी बिमारियों को कम करना है। चिकित्सकों को सत्यापित निकोटीन स्थानापन्न थेरेपी उत्पादों के सहयोग से मरीजों को धूम्रपान छोड़ने की सलाह देनी चाहिए और अगर धूम्रपान करने वाला अपनी आदत पूर्णतया नहीं छोड़ पाता, तो उसे कम नुकसानदेह विकल्प तलाशने की सलाह दी जानी चाहिए जो उसके परिवर्तनकाल में सहायक हो सके। इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम्स या एंड्स, निकोटीन के वैकल्पिक स्रोत पदान करता है और इस्तेमाल करने वाले को टार, कार्सिनोजेन्स और टॉक्सिन (तारकोल, कैंसरकारक तत्त्व और विषैले पदार्थ) से बचाता है जो सिगरेट के धुंए में पाया जाते हैं। इस बात के तमाम प्रमाण हैं जो बताते हैं कि  सिगरेट की तुलना में 'एंड्स' कम नुकसानदेह होता है।"   

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तम्बाकू की तुलना में वैपिंग कम हानिकारक है और इसमें सिगरेट छुड़वाने की क्षमता होती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन द्वारा प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि सिगरेट पीने वालों के संक्रमण काल में वैपिंग एक कारगार विकल्प हो सकता है जो उन्हें ज्वलनशील सिगरेट से दूर करने में मदद करता है। हाल ही में 80 चिकित्सकों के एक समूह ने भारत के प्रधानमंत्री को लिखकर 'एंड्स' के लिए नियम बनाने का आग्रह किया है जिसका उद्देश्य वयस्क स्मोकरों को कम हानिकारक विकल्प उपलब्ध कराना है, साथ ही इन उत्पादों को धूम्रपान नहीं करने वालों के लिए निषिद्ध करना है।

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'हार्म रिडक्शन' (हानि न्यूनीकरण) की अवधारणा यह बताती है की सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा अक्सर मरीज के लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक और जीवनशैली में बदलाव की मांग करती है और कभी इनमें, खासकर व्यसनी की निर्भरता वाले मामलों में सिर्फ आत्मबल के अतिरिक्त अन्य बातों की भी आवश्यकता पड़ती है। वयस्क धूम्रपान करने वालों को कम हानिकारक विकल्प उपलब्ध कराने का अर्थ है उन्हें तीसरा विकल्प उपलब्ध कराना जो छोड़ने या मरने के अतिरिक्त है। 

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नीति आयोग के हालिया स्ट्रेटेजी डॉक्यूमेंट फॉर ए न्यू इंडिया ऐट 75 में यह स्वीकार किया एक सुदृढ़ लोक स्वास्थ्य व्यवस्था एनसीडी की रोकथाम पर जोर देगी। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, बेहतर, ज्यादा स्वस्थ भारत के लिए मौजूदा कोशिशें, जैसे की स्वास्थ्य अवसंरचना का उन्नयन, स्वास्थ्यसेवा कर्मियों की संख्या बढ़ाना, और स्वास्थ्यसेवा की सर्वव्यापी सुलभता भर पर्याप्त नहीं होगी। अपने देश के लोगों के लिए लोक स्वास्थ्य के बेहतर नतीजे सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपर्युक्त कदमों के साथ-साथ पूरक के रूप माय कार्यपद्धतियों और प्रौद्योगिकियों को भी शामिल करना होगा जो दुसरे देशों में  तम्बाकू के स्वास्थ्य और आर्थिक भार को कम करने के लिए सफलतापूर्वक आजमाए जा चुकी हैं।

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