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शिशु को जन्म के बाद बीमारियों से बचाना है, तो ध्यान रखें ये 5 बातें

परवरिश के तरीके By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 19, 2019
शिशु को जन्म के बाद बीमारियों से बचाना है, तो ध्यान रखें ये 5 बातें

घर में नन्हे शिशु का जन्म हो, तो घर खुशियों से भर जाता है। शिशु के पैदा होने के साथ ही उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जन्म के कुछ समय बाद तक शिशु की विशेष देखभाल करनी पड़ती है क्योंकि उसे कई तरह के रोगों का खतरा होता है। विश्व स्वा

Quick Bites
  • WHO के अनुसार 5 साल की उम्र के 50 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत प्रतिवर्ष होती है।
  • शिशु की स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन स्थिति के लिए इन 5 बातों को याद रखें।
  • ऐसी स्थिति के लिए आपको अभी से पैसों की बचत शुरू कर देनी चाहिए।

घर में नन्हे शिशु का जन्म हो, तो घर खुशियों से भर जाता है। शिशु के पैदा होने के साथ ही उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जन्म के कुछ समय बाद तक शिशु की विशेष देखभाल करनी पड़ती है क्योंकि उसे कई तरह के रोगों का खतरा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 50 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत 5 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है। इसका कारण ज्यादातर मां-बाप की परवरिश में लापरवाही या अनुवांशिक रोग होते हैं। अगर आपने भी हाल में ही शिशु को जन्म दिया है या मां बनने की सोच रही हैं, तो शिशु को इमरजेन्सी (आपातकालीन) स्थिति से बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।

शिशु को सभी जरूरी टीके (वैक्सीन) लगवाएं

बच्‍चों को बीमारियों से बचाने के लिए उनका नियमित टीकाकरण अनिवार्य है। टीकाकरण से बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वे कई घातक बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। सरकारी अस्‍पतालों और चिकित्‍सा केंद्रों में बच्‍चों को ये टीके निःशुल्‍क लगाए जाते हैं। बच्चों के लिए सभी जरूरी टीकों की जानकारी के लिए आप बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

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अचानक लगने वाली चोटों के लिए रहें तैयार

बच्चे जब चलने लगते हैं या दौड़ना शुरू कर देते हैं, तो उनकी ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है। कई बार किसी बड़े के न होने पर या ध्यान न दिए जाने पर बच्चे खुद को मुसीबत में डाल लेते हैं जैसे- चोट लगना, करंट लगना, गिर जाना या कोई गलत चीज निगल जाना आदि। रिपोर्ट्स के अनुसार अचानक लगने वाली चोटों से बड़ी संख्‍या में बच्‍चे अपनी जान गंवाते हैं। यह जरूरी है कि आप उसके लिए तैयार रहें। घर पर छोटी-मोटी चोट से निपटने के लिए फर्स्ट एड किट जरूर रखें। इसके साथ ही अपने आसपास के अस्पताल का नंबर, शिशु रोग विशेषज्ञ का संपर्क, इमरजेन्सी एंबुलेंस और केमिस्ट शॉप की भी जानकारी जरूर रखें।

बीमारी या लक्षण समझ न आने पर चिकित्सक की राय लें

कई छोटी चोटें और बीमारियां, जैसे थोड़ा सा कट जाना, रैश, खांसी, ठण्‍ड लगना और आम घावों को घर पर ही ठीक किया जा सकता है। अगर आप स्‍पष्‍ट रूप से अपने बच्‍चे की सेहत की गंभीरता से परिचित नहीं हैं, तो आपको डॉक्‍टर को फोन करने में देरी नहीं करनी चाहिए। चाहें तो उनसे फोन पर ही राय लें। डॉक्‍टर आपको बच्‍चे की सेहत के बारे में सही राय देगा।

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समय रहते अस्पताल पहुंचने की व्यवस्था रखें

अगर किसी वजह से डॉक्‍टर से बात न हो पाए तो नजदीकी अस्‍पताल या नर्सिंग होम में जाएं। यहां सभी जरूरी चिकित्‍सीय मदद उपलब्‍ध होती है। यहां आपके बच्‍चे का सही उपचार किया जा सकेगा। अगर जरूरी हो तो एक्‍स-रे और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य मदद भी यहां उपलब्‍ध होती है।

थोड़े पैसे बचा कर रखें

घर में शिशु के जन्म के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि आपको पैसों की बचत शुरू कर देनी चाहिए। शिशु के लालन-पालन, पढ़ाई आदि के खर्चों के साथ-साथ आपको उसके स्वास्थ्य से जुड़ी आपातकालीन स्थिति के लिए भी थोड़े पैसे बचाकर रखने चाहिए। आजकल निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य खर्चे एक बड़ी चुनौती बनते हैं क्योंकि गंभीर रोग बढ़ रहे हैं और इलाज भी दिनोंदिन मंहगा हो रहा है। हर माता पिता को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिसुसीटेशन) के बारे में सही जानकारी होनी चाहिए।

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Written by
Anurag Gupta
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 19, 2019

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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