बच्चों के दोस्त नहीं चुन सकते आप, लेकिन इन 5 टिप्स की मदद से बच्चों को सिखा सकते हैं अच्छे दोस्त कैसे चुनें

Updated at: Jul 27, 2020
बच्चों के दोस्त नहीं चुन सकते आप, लेकिन इन 5 टिप्स की मदद से बच्चों को सिखा सकते हैं अच्छे दोस्त कैसे चुनें

बचपन के दोस्तों का असर उम्रभर रहता है। ये 5 टिप्स छोटे बच्चों के मां-बाप के लिए हैं, जिससे वो अपने बच्चों को सही और अच्छे दोस्त चुनना सिखा सकते हैं।

Anurag Anubhav
परवरिश के तरीकेWritten by: Anurag AnubhavPublished at: Jul 27, 2020

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जो जीवन को सुगम और आसान बना देता है। छोटे बच्चे अपने घर-परिवार के बाद सबसे ज्यादा अपने दोस्तों के करीब होते हैं। ये दोस्त आस-पड़ोस के भी हो सकते हैं और स्कूल या कोचिंग के भी हो सकते हैं। टीनएज यानी किशोरावस्था में तो कई बार घर परिवार से भी ज्यादा भरोसा बच्चे अपने दोस्तों पर करते हैं। लंबे समय में बच्चों के दोस्तों का असर उसके व्यवहार और जीवन पर भी पड़ता है। अच्छे दोस्त जहां उम्रभर साथ निभाते हैं और गलत कामों से रोकते हैं, वहीं बुरे दोस्तों की संगत में बच्चे बिगड़ भी जाते हैं। मां-बाप की मुश्किल ये होती है कि वो अपने बच्चों को दोस्त नहीं चुन सकते हैं। मगर यह जरूर संभव है कि आप अपने बच्चों को सही और अच्छे दोस्त चुनना सिखाएं। बच्चा जब छोटा हो, तभी से अगर आप उसे इन बातों की ट्रेनिंग देगें, तो बच्चा अच्छे बच्चों की संगत करेगा और अच्छे दोस्त चुनेगा।

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बच्चे को अच्छे माहौल की आदत डालें

ध्यान रखें कि आपका बच्चा अंजाने में ही अपने आसपास के लोगों और समाज से बहुत कुछ सीखता है, जिसका प्रभाव उस पर लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए भले ही आप अपने घर का माहौल बहुत अच्छा रखें, लेकिन अगर आपके आस-पड़ोस का माहौल गंदा है, तो बच्चा दोहरे व्यक्तिव वाला बनने लगता है। यानी वो घर में अच्छा व्यवहार करेगा मगर घर के बाहर वैसा व्यवहार करेगा, जिससे कि पड़ोस के दोस्तों के साथ एडजस्ट हो पाए। इसलिए बतौर मां-बाप आपको अपने बच्चे को अच्छा माहौल देना है। शुरुआती दिनों में इस बात पर नजर रखें कि बच्चा किससे मिलता है, किससे दोस्ती करता है और कौन-कौन से खेल खेलता है।

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आप स्वयं बच्चों से दोस्ती कर लें

मां-बाप अक्सर बच्चों को अनुशासन और प्रतिंबंधों में रखने के कारण बच्चे का विश्वास खो देते हैं, जिससे बच्चा घर के बाहर की बातें उनसे शेयर करने में संकोच करता है और कई मौकों पर झूठ भी बोलने लगता है। मां-बाप को लगता है कि अगर वो बच्चे से ज्यादा घुले-मिलेंगे, तो बच्चा बिगड़ जाएगा। मगर ऐसा हमेशा सही नहीं है। ज्यादातर मामलों में अगर मां-बाप बच्चे से बचपन से ही दोस्ती वाला रिश्ता रखते हैं, तो बच्चे उन्हें अपने पर्सनल और घर के बाहर की सभी बातें बताते हैं। इससे बच्चे को सही दिशा में बढ़ने, उसके विचारो और स्वभाव को गढ़ने और बच्चे की परवरिश पर नजर रखने में मां-बाप को मदद मिलती है।

बच्चों को बताएं दोस्तों के दबाव में न करें कोई गलत काम

हमारी सोसायटी में कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को कभी भी पीयर प्रेशर के बारे में नहीं बताते हैं। जबकि 5 साल से अधिक उम्र के 98% बच्चे पीयर प्रेशर का शिकार होते हैं। पीयर प्रेशर मतलब दोस्तों के दबाव में कोई काम करना। बच्चे सभी गलत आदतें पीयर प्रेशर में ही सीखते हैं। इसलिए अपने बच्चों को सिखाएं कि उन्हें अगर कोई गलत काम करने के लिए मजबूर करे या दबाव बनाए, तो वो आकर आपसे बताएं। बच्चों को इस बात का भरोसा दिलाएं कि वो कोई भी गलत काम करके अगर आपके पास आते हैं, तो आप उन्हें मारेंगे, डाटेंगे नहीं, बल्कि सही रास्ता दिखाएंगे।

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बच्चों को अपनी कहानी बताकर समझाएं

अगर आप बच्चों को ये बताना चाहते हैं कि कोई चीज उनके लिए कैसे बुरी है या कैसे अच्छी है, तो इसका सबसे आसान तरीका है कि आप अपने जीवन की सच्ची कहानी से जोड़कर उन्हें वो बात बताएं। अगर आपके जीवन में वैसा कुछ नहीं घटित हुआ है, तो काल्पनिक कहानी से खुद को जोड़ते हुए वो बात समझाएं। इस तरह समझाने से बच्चे पर उस बात का असर लंबे समय तक रहता है और गलत काम करने से पहले उन्हें वो बातें याद भी आ जाती हैं। अगर आपने बचपन में कोई गलती की थी, तो उसे भी बताएं ताकि बच्चे वो गलती न दोहरा सकें।

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बच्चों के दोस्तों को घर पर इनवाइट करते रहें

आपको अपने बच्चे के हर दोस्त के बारे में पता होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप घर में थोड़े-थोड़े दिनों में छोटी-मोटी पार्टी कर सकते हैं, जिसमें बच्चे से कहें कि वो अपने सभी दोस्तों को घर पर इनवाइट करे। इस दौरान आप बच्चों के साथ खेलें और उसके दोस्तों से बातें करें। इससे बच्चे को भी अच्छा लगेगा और उसके दोस्तों से घुलना-मिलना आगे आपके कई तरह से काम आएगा, जब बच्चा आपसे कोई बात छिपाएगा तब।

इस तरह से अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देने, अच्छे दोस्त चुनने और सकारात्मक माहौल देने में आप उनकी मदद कर सकते हैं।

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