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चोट लगने के बाद हड्डी टूटने के ये हैं 5 संकेत

अन्य़ बीमारियां By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 08, 2018
चोट लगने के बाद हड्डी टूटने के ये हैं 5 संकेत

बहुत बार गिर जाने और चोट लग जाने के कारण हड्डी टूट जाती है जिसके बारे में लोगों को पता नहीं होता है। वे अक्सर दर्द से कहराते रहते हैं लेकिन यह नहीं समझ पाते हैं कि उनकी हड्डी टूट गई है। आइए जानते हैं कुछ संकेतों के बारे में जो बताते हैं कि आपकी हड

हड्डी टूटना या फ्रैक्चर होना कई प्रकार के हो सकते हैं। कई बार हड्डी थोड़ी सी टूटती है तो कभी-कभी उसमें बड़ा फ्रैक्चर आ जाता है। हड्डी में मामूली सी दरार हेयर लाइन फ्रैक्चर कहलाती है। बहुत बार गिर जाने और चोट लग जाने के कारण हड्डी टूट जाती है जिसके बारे में लोगों को पता नहीं होता है। वे अक्सर दर्द से कहराते रहते हैं लेकिन यह नहीं समझ पाते हैं कि उनकी हड्डी टूट गई है। आइए जानते हैं कुछ संकेतों के बारे में जो बताते हैं कि आपकी हड्डी टूट गई है।

 

सूजन

शरीर के किसी भी अंग की हड्डी टूट जाने पर उसमें सूजन आ जाती है। चोट लगने से फ्लूइड और खून रिस कर नरम टिशू में भर जाता है जिससे टिशू में सूजन आ जाती है। चोट लगने के बाद यदि किसी अंग में सूजन आ गई है और वह कम नहीं हो रही है तो समझ जाएं की आपकी हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है।

अंग का मुड़ना

अगर फ्रैक्चर काफी छोटा होता है तो अंग का आकार सामान्य रहता है। लेकिन जब हड्डी पूरी तरह से टूट जाती है तो उस अंग का आकार पूरी तरह विकृत हो जाता है। शरीर के किसी अंग का आकार थोड़ा या पूरी तरह से विकृति हो जाए तो संकेत बताता है कि आपकी हड्डी टूट गई है।

करकराहट की आवाज होना

यदि आप चलते समय पैर में करकराहट की आवाज को महसूस करते हैं तो यह आवाज आपकी हड्डी के टूटे हिस्सों की रगड़क की हो सकती है। ऐसे में चिकित्सक से परामर्श करके निश्चित कर लें की क्या आपकी हड्डी टूट गई है।

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रंग बदलना

जिस अंग की हड्डी टूट जाती है उस स्थान पर केशिकाओं से दूर हो जाता है। टीशू के डैमेज होने से चोट का रंग बदल जाता है। चोट का रंग जितना बदला होता है फ्रैक्चर उतनी हा अधिक गहरी हो सकती है।

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हड्डी टूटने के बाद अगर प्‍लास्‍टर बंध जाए तो क्‍या करें और क्‍या न करें 

  • शरीर के किसी भी अंग पर प्लास्टर बंधा होने पर उस हिस्से को तकिये की मदद से थोड़ा सा ऊपर उठाकर रखना चाहिए। इससे शरीर का रक्त संचालन ठीक बना रहता है।उस अंग को कितने आराम की आवश्यकता है, इसकी भी पूरी जानकारी लें। अधिक हिलाने डुलाने से हड्डी देर से जुड़ सकती है और खिसक भी सकती है।
  • प्लास्टर बंधे रहने के दौरान हमेशा अपनी उंगलियों को घुमाते रहना चाहिए वर्ना अंग के सुन्न पड़ जाने का खतरा रहता है। प्लास्टर लगवाने के बाद डॉक्टर से जानकारी ले लें कि प्लास्टर लगे अंग को कितना हिलाना डुलाना चाहिए, कितना काम उस अंग से लेना चाहिए और कितना वजऩ उस अंग पर डालना चाहिए।
  • प्लास्टर लगने पर कभी भी पेंसिल या किसी नुकीली वस्तु से मत खुजलाएं। इसके अन्दर लगने पर इन्फेक्शन भी हो सकता है। प्लास्टर को पानी से बचा कर रखें।अगर प्लास्टर के दौरान आपकी उँगलियों में दर्द होने लगे या वे सुन्न पड़ जायें और उनमें कालापन आ जायें तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह लें।
  • बिना डॉक्टर की मदद के कभी भी खुद से प्लास्टर को न काटें, न ही छोटा करें।।समय से पहले प्लॉस्टर काट देने से हड्डी मुड़ सकती है और कच्ची भी जुड़ सकती है। मालिश, खींचतान और सिंकाई हड्डी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
  • आमतौर पर प्लास्टर 3 सप्ताह से 6 सप्ताह के लिए हड्डी टूटने वाले स्थान पर लगाए जाते हैं। मल्टीपल बोन्स टूटने या एक ही हड्डी में कई जगह टूटने की स्थिति में प्लॉस्टर 2 माह से 3 माह तक भी लगाना पड़ सकता है।
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