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Nutritional Myths: फूड्स और न्यूट्रीशन से जुड़े ये 5 मिथक खराब कर सकते हैं आपकी फिटनेस, जानें इनका सच

स्वस्थ आहार By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 22, 2019
Nutritional Myths: फूड्स और न्यूट्रीशन से जुड़े ये 5 मिथक खराब कर सकते हैं आपकी फिटनेस, जानें इनका सच

न्यूट्रिशनल मिथकों के बारे में जानना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है। आइए हम आपको बताते हैं इनसे जुड़े तथ्यों के बारे में। 

लोगों में हेल्थ को लेकर अवेयरनेस फैल रहा है। इस अवेयरनेस के कारण हम अब हर चीज को खाने से पहले उसके फायदे और नुकसान के बारे में सोचते हैं। ज्यादा ये ज्यादा लोगों का कोशिश होती है वो जो भी खाएं हेल्दी और न्यूट्रिशनल हो। पर इसी बीच लोगों के भीतर कई चीजों को लेकर कुछ मिथ्स भी पलने लगते हैं। किसी को लगता है पोट्रीन को खाने का कोई खास वक्त है, तो कोई अनसेचुरेटेड और सेचुरेटेड फैट्स के बारे में ही सोचता रहता है। वहीं ऐसे मिथ्, से बचने का पहला उपाय को ये है कि कुछ भी ज्यादा न खाएं और दूसरा ये कि अपने लिए एक डाइट चार्ट जरूर बनवाएं। इन दोनों का ही आपको हमेशा फायदा मिलेगा। आज हम लोगों में न्यूट्रिशन से जुड़े आम मिथकों की बात करेंगे, जिस पर बहुत से लोग लंबे समय से यकीन करते हैं। आइए हम आपको बताते हैं ऐसे ही 5 न्यूट्रिशनल मिथकों के पीछे के तथ्य।

Inside_nutritional myths

मिथक 1- ब्राउन कार्ब्स सफेद कार्ब्स से बेहतर होते हैं

जब कार्ब्स चुनने की बात आती है, तो भूरे रंग के कार्ब्स को आमतौर पर स्वास्थ्यप्रद विकल्प माना जाता है। माना जाता है कि ब्राउन कार्ब्स अधिक आसानी से पचने वाले होते हैं और सफेद कार्ब्स जटिल होते हैं। उदहारण के जैसे सफेद कार्ब्स शरीर का ग्लूकोज लेवल बड़ी तेजी से बढ़ा देता है, वहीं वाइट कार्ब्स में ऐसा कुछ नहीं होता। डायबिटीक लोगों के लिए अक्सर कहा जाता है वे ब्राउन कार्ब्स ही लें। पर ये हमेशा सही नहीं होता। जबकि व्हाइट राइस में दाने का बाहरी भूरा हिस्सा होता है, जिसमें वास्तव में इतना पोषण नहीं होता है। यह ध्यान देने योग्य है, जो ब्राउन कार्ब्स की वकालत करते हैं, वे इस बात को सोचते नहीं कि ब्राउन कार्ब एनर्जी रिलीज करने में वक्त लेता है, वहीं सफेद धीरे-धीरे ये काम करता है। साथ ही सफेद कार्ब्स में अधिक पोषक तत्व और फाइबर होते हैं।

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मिथक 2- सेचुरेटेड फैट्स हेल्दी होते हैं

पिछले कुछ वर्षों से सुस्त पाचन क्रिया को सही करने के लिए और तेजी से वजन कम करने के लिए लोग अनसेचुरेटेड फैट्स को खाना बंद कर रहे हैं। सेचुरेटेड फैट्स में दूध, पनीर, मक्खन और दही के साथ-साथ रेड मीट जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, जिनमें फैट की एक अच्छी मात्रा होती है। जबकि वैज्ञानिकों ने हाल ही में पता लगाया है कि दूध से सेचुरेटेड फैट्स ब्लड कोलेस्ट्रॉल को उसी तरह से प्रभावित नहीं करता है जैसा कि लोगों को लगता है। यह अभी भी हृदय रोग से बचने के लिए एक स्वस्थ आहार का एक हिस्सा है पर अनसेचुरेटेड फैट भी जरूरी है। इसलिए अपने आहार में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स के प्रकार का भी इस्तेमाल करें। मोनोअनसैचुरेटेड फैट में जैतून का तेल, मूंगफली का तेल, कैनोला ऑयल, सूरजमुखी का तेल, एवोकैडो, अधिकांश नट्स आदि शामिल है। पॉलीअनसेचुरेटेड फैट मछली में पाया जाता है।

मिथक 3-स्नैक्स खाना खराब है

यदि आप स्नैक्स खाना चाहते हैं और सोचते हैं कि ये हेल्दी नहीं है, तो ये पूरी तरह से सही भी नहीं है। आप ग्लूटेन फ्री स्नैक्स भी खा सकतें हैं। स्नैक्स की बात करें, तो आप होममेड स्नैक्स भी खा सकते हैं। स्नैक्स के रूप में  आप मैक्रोन्यूट्रिएंट्स खा सकते हैं। इसके अलावा आप उबला हुआ अंडा, पालक, एक मुट्ठी काजू, एक सेब और पीनट बटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। ग्रीक योगर्ट भी भूख के स्तर को संतुलित करने के लिए अच्छी तरह से काम करता है।

मिथक 4 -शाकाहारी भोजन करने वालों में प्रोटीन की कमी

अगर आप मीट-मछली नहीं खाते हैं और शाकाहारी आहार ग्रहण करते हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि आपमें प्रोटीन की कमी हो जाएगी। ऐसा कुछ भी नहीं है। शाकाहारी आहार ग्रहण करने से भी आपको हाई प्रोटीन डाइट मिल सकती है। ऑस्ट्रेलियाई संस्थापक एम्मा टेलर के अनुसार अधिक मांस खाना भी शरीर के लिए फायदेमंद नहीं है और मांसपेशियों के विकास के लिए आवश्यक प्रोटीन शाकाहारी खाने से भी मिल सकता है। अधिकांश प्रमुख खाद्य समूहों में कुछ स्तर के प्रोटीन होते हैं और हाई प्रोटीन के लिए आप फलियां और पत्तेदार साग इत्यादि खा सकते हैं।

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मिथक 5-वर्कआउट करने के 45 मिनट बाद प्रोटीन खाना चाहिए

फिटनेस ट्रेनर्स कह सकते हैं कि मांसपेशियों के निर्माण के लिए, वर्कआउट करने के 45 मिनट के भीतर प्रोटीन खाना आवश्यक है। यह एक सिद्धांत है जिसने 2000 के दशक की शुरुआत में रिसर्च के बाद पता लगाया गया था, जिसमें मांसपेशियों के प्रोटीन संश्लेषण (शरीर का द्रव्यमान कैसे बनता है) को वर्कआउट करने के एक घंटे के भीतर मट्ठा प्रोटीन का सेवन करके उत्तेजित किया गया था। हालांकि यह एक हद तक सही है, पर पूरी तरह से नहीं। आप प्रोटीन को वर्कआउट के बाद भी ले सकते हैं और इससे 1 घंटे पहले भी। बस ध्यान इस बात का रखना है कि वो प्रोटीन ऐसा न हो जो पचने में समय ले।

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