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सिर्फ 'पढ़ाई-पढ़ाई' रटने से बच्चे नहीं बनेंगे सेल्फ इंडिपेंडेंट, बचपन से जरूरी है ये 5 लाइफ स्किल्स सिखाना

Updated at: Feb 14, 2020
सिर्फ 'पढ़ाई-पढ़ाई' रटने से बच्चे नहीं बनेंगे सेल्फ इंडिपेंडेंट, बचपन से जरूरी है ये 5 लाइफ स्किल्स सिखाना

बच्चे सिर्फ पढ़ाई से ही सेल्फ इंडिपेंडेंट नहीं बनते हैं, बल्कि इसके लिए उन्हें कुछ लाइफ स्किल्स सिखाना भी बहुत जरूरी है, जो करियर में उनकी मदद करे।

Written by: Anurag AnubhavPublished at: Feb 14, 2020

हर मां-बाप अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सपने देखते हैं। इसके लिए वे जितना संभव हो सकता है, उतनी सुविधाएं बच्चों को देते हैं। बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए और उन्हें सेल्फ इंडिपेंडेंट बनाने के लिए अच्छा स्कूल, अच्छा खान-पान, अच्छा माहौल, कोचिंग, ट्यूशन आदि न जाने कितना कुछ इंतजाम किया जाता है। मगर इसी बीच अगर बच्चे की परफॉर्मेंस स्कूल में खराब हो जाए या किसी साल का रिजल्ट थोड़ा गड़बड़ हो जाए, तो वे निराश होते हैं और कई बार बच्चे से अच्छे भविष्य की आशा छोड़ देते हैं। मगर क्या बच्चों को सेल्फ इंडिपेंडेंट (स्वावलंबी) बनाने के लिए सिर्फ अच्छा एकेडमिक एजुकेशन ही जरूर है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे को भविष्य में अपने पांव पर खड़ा होने में उसके कॉलेज की डिग्री और मार्क्स कुछ हद तक तो मदद करते हैं, मगर ये बिल्कुल जरूरी हैं- ऐसा नहीं है। बच्चे अगर पढ़ाई में एवरेज से बेहतर या एवरेज भी हैं, तो अच्छी लाइफ स्किल्स सिखाकर आप उन्हें सेल्फ इंडिपेंडेंट बना सकते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही 5 लाइफ स्किल्स।

एक्स्ट्रा को-करिकुलर एक्टिविटीज के लिए इंस्पायर करें

कुछ मां-बाप को ये बात बुरी लगती है कि उनके बच्चे पढ़ाई से ज्यादा खेल-कूद में ध्यान लगाते हैं। मगर आपको बता दें कि हर समय पढ़ाई-पढ़ाई रटने से न तो बच्चे को आप पढ़ने के लिए इंस्पायर कर पाते हैं और न ही उसकी दूसरी स्किल्स को उभरने का मौका देते हैं। आजकल स्कूलों में एक्स्ट्रा को-करिकुलर एक्टिविटीज इसीलिए कराई जाती हैं। दरअसल आपको ये बात समझनी होगी कि हर बच्चा एकेडमिक्स में ही अपना करियर नहीं बना सकता है। इसके अलावा खेल-कूद से बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे वो कम समय में पढ़ाई करके भी अच्छे मार्क्स ला सकते हैं। इसलिए बच्चों को इन एक्टिविटीज में पार्ट लेने से कभी न रोकें।

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'पढ़कर' सीखने से बेहतर है 'करके' सीखना

वैसे तो आजकल के कुछ स्कूल इस बात पर ध्यान दे रहे हैं, मगर अब भी बहुत सारे स्कूलों में बच्चों को सिर्फ और सिर्फ किताबी ज्ञान सिखा दिया जाता है। इससे बच्चे एकेडमिक इम्तिहान तो पास कर लेते हैं, मगर असल में उनकी समझ विकसित नहीं होती है। इसलिए आप बचपन से ही बच्चे में ये आदत डालें कि वो चीजों को पढ़कर समझने के बजाय प्रयोग करके या देखकर अपने खुद के अनुभव से सीखे। शुरू से ही इस बात पर ध्यान देने से बच्चे की ऑब्जर्वेशन स्किल्स बहुत अच्छी हो जाती हैं, जो आगे चलकर उसकी करियर में काफी मदद करती हैं।

दूसरों का सम्मान करना सिखाएं

बच्चे पढ़ाई के दौरान तमाम फैक्ट्स और थ्योरी रटकर भले ही इंटेलिजेंट हो जाते हैं, मगर अगर उनमें कुछ व्यावहारिक बातें नहीं हैं, तो जीवन में सफलता उनके लिए मुश्किल हो सकती है। इन व्यावहारिक ज्ञान में सबसे अहम है दूसरों का सम्मान करना। बच्चों को बचपन से ही मां-बाप का, अपने से बड़ों का, छोटों का, टीचर्स का और भाई-बहनों का सम्मान करना सिखाएं। इसके अलावा एक जरूरी बात जो आपको अपने बच्चों को हमेशा सिखानी चाहिए, वो ये है कि अपोजिट सेक्स का सम्मान करें और उन्हें अपनी तरह ही समझें। ये स्किल्स बच्चे को भविष्य में लोगों से घुलने-मिलने और अपने लिए सफलता के रास्ते बनाने में काफी मददगार साबित होंगी।

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रिलैक्स होना सिखाएं

मैंने आज तक मां-बाप को बच्चों को- पढ़ना कैसे है-ये सिखाते हुए तो देखा है, मगर ये सिखाते नहीं देखा है कि उन्हें आराम कैसे करना चाहिए और कैसे खुश रहना चाहिए। तमाम रिसर्च बताती हैं कि छोटी उम्र में जो बच्चे स्ट्रेस, डिप्रेशन आदि का शिकार होते हैं, उनमें से ज्यादातर का कारण उनका अपना ही परिवार होता है। इसलिए बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रिलैक्स रहने के तरीके और खुश रहने की टिप्स भी बताएं। उन्हें संगीत सुनने, कहानियां पढ़ने, आउटडोर गेम्स खेलने और लोगों से घुलने-मिलने के लिए इंस्पायर करें।

हॉबी को सपोर्ट करें

अगर आपका बच्चा पढ़ाई में थोड़ा पीछे हैं मगर उसका मन किसी और एक्टिविटी में लगता है, जिसे वो अपनी हॉबी बनाना चाहता है, तो आपको उसका सपोर्ट करना चाहिए। आज के समय में एकेडमिक्स के बल पर जितनी सफलता मिलती है, उससे कहीं ज्यादा सफलता लोगों को उनकी हॉबीज फॉलो करके मिल सकती है। करियर के नए विकल्प तेजी से खुल रहे हैं, जैसे- सिंगिंग, डांसिंग, पेंटिंग, एक्टिंग, पोएट्री, राइटिंग, स्पोर्ट्स, क्रिकेट, एथलीटिक्स आदि। अगर बच्चा अपने पैशन को फॉलो करना चाहता है, तो आप उसकी हॉबी पर भी थोड़ा पैसा खर्च करें।

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