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रोजाना 2 चम्मच देसी घी खाना है फायदेमंद, मेटबॉलिज्म और इम्यूनिटी होते हैं बेहतर

स्वस्थ आहार By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 25, 2019
रोजाना 2 चम्मच देसी घी खाना है फायदेमंद, मेटबॉलिज्म और इम्यूनिटी होते हैं बेहतर

अगर आप देसी घी इसलिए नहीं खाते हैं कि इसमें फैट होता जिसकी वजह से आप मोटे हो जाएंगे, तो आप गलत हैं। रोजाना देसी घी खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इसे खाने से आपका वजन बिल्कुल नहीं बढ़ता है। घी में ढेर सारे पोषक तत्व होते हैं जैसे-

अगर आप देसी घी इसलिए नहीं खाते हैं कि इसमें फैट होता जिसकी वजह से आप मोटे हो जाएंगे, तो आप गलत हैं। रोजाना देसी घी खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इसे खाने से आपका वजन बिल्कुल नहीं बढ़ता है। घी में ढेर सारे पोषक तत्व होते हैं जैसे- विटामिन ए, डी और कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम आदि। घी में मौजूद कॉन्जुगेटेड लिनोलेइक एसिड (ओमेगा-6 फैटी एसिड का एक प्रकार) होता है, जो न सिर्फ वजन घटाने में मदद करता है बल्कि कैंसर के खतरे को भी कम करता है। अगर आप रोजाना सिर्फ 2 चम्मच देसी घी खाते हैं, तो आपके शरीर को ढेर सारे फायदे मिलते हैं।

पाचन सुधारता है देसी घी

देसी घी का सेवन उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनका पेट साफ नहीं होता है और जिन्हें कब्ज की समस्या है। रोजाना रात में सोने से पहले एक ग्लास गुनगुने दूध में 2 चम्मच देसी घी डालकर पीने से पेट की सभी समस्याएं दूर होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, देसी घी छोटी आंतों की अवशोषण क्षमता में सुधार करता है और हमारे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के अम्लीय पीएच को कम करता है। इसलिए कब्ज, गैस, मुंह के छाले आदि में देसी घी का प्रयोग कर सकते हैं।

शरीर में बेहतर होता है रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन)

नर्वस सिस्टम के विकास में घी बहुत मदद करता है। ऐसे में रोजाना 2 चम्मच घी का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद है। घी फैट सॉल्युबल विटामिन ए डी, ई और के का मुख्य स्रोत होता है। जो ब्लड सेल में जमा कैल्शियम को हटाने का काम करता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। छोटे बच्चों के लिए देसी घी बहुत फायदेमंद माना जाता है। ये विटामिन बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए अच्छा होता है। साथ ही ये बच्चों के इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है।

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देसी घी जलने के बाद भी नहीं करता नुकसान

आमतौर पर जिस तेल या घी से आप खाना बनाते हैं (सरसों का तेल, सोयाबीन तेल, वनस्पति घी आदि), उन सभी का 'स्मोकिंग प्वाइंट' बहुत कम होता है यानी ये सभी तेल और घी तेजी से जलते हैं इसलिए एक बार से ज्यादा प्रयोग करने पर सेहत के लिए नुकसानदायक होते हैं। मगर देसी घी का 'स्मोकिंग प्वाइंट' बहुत ज्यादा होता है इसलिए ये आसानी से जलता नहीं है। देसी घी में स्थिर सेचुरेटेड बॉण्ड्स बहुत अधिक होते हैं, जिससे फ्री रेडिकल्स निकलने की आशंका कम होती है। फ्री रेडिकल्स अगर ज्यादा हो जाएं, तो आपको कैंसर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मानसिक रोग और अन्य ढेर सारी बीमारियों का खतरा होता है। इसके अलावा फ्री रेडिकल्स की संख्या बढ़ने पर आप जल्दी बूढ़े होने लगते हैं।

यही कारण है कि देसी घी का सेवन आपको कैंसर, डायबिटीज जैसे रोगों से तो बचाता ही है, साथ ही आपको लंबे समय तक जवान बनाए रखता है। गाय के घी में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ता है।

रोगों से लड़न की क्षमता बढ़ाता है घी

देसी घी का सेवन रोजाना करने से आपके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए जो लोग रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं, उनको रोग और इंफेक्शन आसानी से नहीं होते हैं। देसी घी इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है। देसी घी को आप रोटी पर लगाकर खाएं, दाल और सब्जी में डालकर खाएं या दूध में मिलाकर पिएं।

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बाजार से घी खरीदें, तो बरतें सावधानी

भैंस के घी में कैलरीज़ की मात्रा अधिक होती है जबकि गाय के घी में कैलरीज़ कम मात्रा में पाई जाती हैं। इसलिए यह सेहत के लिहाज़ से सही रहता है। गाय का घी घर में बिना प्रिज़र्वेटिव के तैयार किया जाता है तो यह सैचुरेटेड फैट का अच्छा सोर्स होता है। बाजार से घी खरीदते हों तो कुछ बातों का ध्यान रखें। पैक पर हाइड्रोजेनेटेड ऑयल और ट्रांस्फैट लिखा हो तो उसे न खरीदें।

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