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मॉनसून सीजन में छोटे बच्चों को कैसे रखें स्वस्थ और सुरक्षित, जानें 5 मॉनसून पैरेंटिग टिप्स

नवजात की देखभाल By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 13, 2019
मॉनसून सीजन में छोटे बच्चों को कैसे रखें स्वस्थ और सुरक्षित, जानें 5 मॉनसून पैरेंटिग टिप्स

बरसात यानी मॉनसून के मौसम में शिशु को की तरह की बीमारियों का खतरा होता है, जैसे- खांसी, जुकाम, बुखार, त्वचा पर दाने, त्वचा पर रैशेज, चकत्ते, इंफेक्शन आदि। इन सभी से बचाव के लिए जरूरी हैं कुछ मॉनसून स्पेशल बेबी केयर टिप्स, जानें इन्हें।

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बारिश के मौसम (मॉनसून) में छोटे बच्चे बहुत ज्यादा बीमार होते हैं। इस मौसम में शिशुओं को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। दरअसल तेज गर्मी के बीच अचानक बारिश के कारण तापमान जल्दी-जल्दी कम-ज्यादा होता रहता है और मौसम में नमी आ जाती है, जिसके कारण छोटे बच्चों में बुखार, खांसी, जुकाम, बैक्टीरियल एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, दाद-खाज आदि का खतरा बढ़ जाता है। आइए आपको बताते हैं मॉनसून सीजन में छोटे बच्चों की देखभाल के लिए जरूरी टिप्स।

बच्चे को गीला न होने दें

मॉनसून के मौसम में बैक्टीरिया और वायरस बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, इसलिए जरूरी है कि आप बच्चों को गीला न होने दें। शिशु को बरसात के पानी में भीगने से बचाएं। इसके अलावा घर के बिस्तर, कपड़े, फर्श आदि को भी गीला होने से बचाएं। थोड़े-थोड़े समय में शिशु की नैपी/लंगोट चेक करते रहें। शिशु के पेशाब या पॉटी करने के बाद थोड़े समय में ही बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं और शिशु की नाजुक त्वचा पर हमला कर सकते हैं। कई बार गीलेपन के कारण बच्चों को जुकाम-बुखार जैसी समस्या भी हो जाती है। इसके अलावा अगर आपका बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो उसे पानी में खेलने, कपड़े गीले करने, पांव और सिर गीला करने से रोकें। कुल मिलाकर कोशिश करें कि आपका बच्चा हमेशा सूखा रहे।

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मच्छरों से बचाएं

बारिश के मौसम में शाम से ही मच्छर एक्टिव हो जाते हैं। ऐसे में शिशु को मच्छरों से बचाने के लिए दिन से ही घर के खिड़की-दरवाजों को बंद रखें और घर में पानी न जमा होने दें। अगर आपके आसपास मच्छर हैं, तो शिशु के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि शिशु के कमरे में कॉइल या मॉस्कीटो रिपलेंट का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे निकलने वाले धुंए शिशु के नाजुक फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। अगर लगा भी रहे हैं, कोशिश करें कि धुंए वाले ये प्रोडक्ट शिशु से अधिकतम दूरी पर हों और उसका धुंआ सीधे शिशु के नाक या मुंह के संपर्क में न आए।

शिशु के आसपास सफाई रखें

बारिश के मौसम में शिशु के शरीर के अलावा उसके आसपास सफाई रखना भी बहुत जरूरी है। दरअसल मौसम में नमी होने के कारण बैक्टीरिया की प्रजनन क्षमता काफी तेज हो जाती है। इसलिए उन्हें पनपने से रोकने के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है। शिशु के कमरे में दिन में 2-3 बार पोछा लगाएं, ताकि मच्छर और दूसरे कीट-पतंग वहां न आएं। घर के कूड़ेदान, कूलर, किचन का सिंक, गैस आदि को अच्छी तरह साफ करें। इसके अलावा ध्यान रखें कि बचे हुए खाने को घर में जमा करके न रखें, बल्कि तुरंत बाहर फेंक दें या जानवर को खिला दें। घर के आसपास और घर के अंदर पानी न जमा होने दें, वर्ना डेंगू-मलेरिया फैलाने वाले मच्छर पनप जाएंगे।

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घर की दीवार, खिड़कियां चेक कर लें

मॉनसून से पहले ही घर की दीवार और खिड़कियां जरूर चेक कर लें। दीवारों या छत पर आने वाली सीलन से भी कई तरह की बीमारियां फैलती हैं। बरसात के बाद यदि दीवारों में फफूंद और फंगस लग रही है, तो इसे तुरंत हटाएं और दीवार की मरम्मत करवाएं। गीले माहौल में रहने के कारण शिशु को सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों का खतरा तो होता ही है। इसके साथ ही कई बार वे किसी गंभीर बीमारी का भी शिकार हो सकते हैं।

एलर्जी चेक करते रहें

बारिश के मौसम में एलर्जी होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए बच्चों के शरीर पर दिखने वाले छोटे मोटे रैशेज, दाद, खुजली आदि को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये तेजी से फैल सकता है। एलर्जी होने पर अपने मन से या मेडिकल स्टोर से खुद ही कोई क्रीम खरीदकर न लगाएं, क्योंकि शिशु की त्वचा वयस्कों से बहुत अलग और सेंसिटिव होती है। वयस्कों की क्रीम शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

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