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माइग्रेन को लेकर आपके मन में भी हैं ये भ्रम? तो जानें इनके पीछे की सच्चाई

तन मन By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 23, 2019
माइग्रेन को लेकर आपके मन में भी हैं ये भ्रम? तो जानें इनके पीछे की सच्चाई

आम लोगों में माइग्रेन को लेकर कई गलतफहमियां भी हैं, जिस पर भरोसा करने से पहले आप उसके पीछे के साइंस और अपने डॉक्टर की राय जरूर जान लें।

माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों में गंभीर सिरदर्द के साथ-साथ मतली, उल्टी और लाइट के प्रति सेंसिटिविटी के साथ इसे संदर्भित किया जाता है। औसतन लोगों में माइग्रेन का दर्द 4 घंटे से 3 दिनों तक रहता है और कभी-कभी अधिक समय तक के लिए भी बढ़ सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में माइग्रेन आम तौर पर अधिक पाया जाता है। माइग्रेन के कारणों में लाइस्टाइल के अलावा भी कई और वजह हैं। वहीं माइग्रेन के कारण मस्तिष्क में परिवर्तन के साथ-साथ परिवारों में चलने वाले जीन से संबंधित भी हो सकते हैं। आप इसे इनहेरीटेड ट्रिगर भी कर सकते हैं, जो आपको थकान, तेज रोशनी, सिरदर्द, मौसम परिवर्तन और अन्य जैसे कई कारणों से माइग्रेन देता है। पर आम लोगों में माइग्रेन से जुड़े कुछ मिथक या कहें कि भ्रम भी हैं। आइए आज हम आपको इन मिथकों से जुड़े कुछ तथ्य भी बताते हैं। 

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माइग्रेन के जुड़े 4 मिथक और उनके पीछे के तथ्य-

मिथक 1: माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द है

अक्सर लोगों को लगता है कि माइग्रेन सिर्फ एक सिरदर्द है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। दरअसल बहुत से लोगों को लगता है कि माइग्रेन एक तरह का तेज सिरदर्द होता है। जबकि साइंस की मानें, तो माइग्रेन में सिरदर्द सिर्फ एक लक्षण है, जबकि इसके कई और भी लक्षण हैं। सिरदर्द के साथ-साथ, माइग्रेन में मतली, लाइट के प्रति सेंसिटिविटी, एकाग्रता में कठिनाई, चक्कर, कमजोरी, उल्टी और चेतना की हानि का कारण बनता है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क में कभी-कभी कार्यात्मक और संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं। इसके अलावा, माइग्रेन की कई और विशेषताएं भी हैं। सिरदर्द विकारों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण ढांचा है, जिसका उपयोग डॉक्टर सिरदर्द के दर्द को मापने के लिए कर सकते हैं और अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन ने माइग्रेन से पीड़ित लोगों को इसे निर्धारित करने में कई मापदंड बनाए हैं। माइग्रेन सिर दर्द से अलग है क्योंकि इसकी अवधि, गंभीरता और लक्षण इसे कई और तरह से अलग करते हैं।

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मिथक 2 : कैफीन ही माइग्रेन का कारण है

हमेशा कैफीन माइग्रेन का कारण नहीं होता है, बल्कि कैफीन कुछ सबसे प्रभावी सिरदर्द दवाओं में पाया जाता है। कई रोगियों के लिए, कॉफी या सोडा जैसे कैफीनयुक्त पेय सिर दर्द को कम करने में मदद करता है। आपके लिए कैफीन   दैनिक सिरदर्द में भी कारगार साबित हो सकता है। इसके अलावा भी कैफीन के कई और नुकसान हो सकते हैं, माइग्रेन ही अकेला क्यो? दरअसल बात ये है कि सभी को कैफीन ये कोई भी चीज एक नियमित मात्रा में ही लेनी चाहिए। इसके अलावा अपने बाकी जीवनशैली का ख्याल रखें क्योंकि कुछ प्रमाण हैं कि बार-बार माइग्रेन होने के पीछे न्यूट्रास्युटिकल कारण हो सकते हैं। इसके अलावा आपके खाने से मिलने वाले कुछ पदार्थों में राइबोफ्लेविन (विटामिन -बी 2) कोएंजाइम (Q-10) और मैग्नीशियम भी कारण हो सकते हैं। इसके लिए किसी भी डॉक्टर या सिरदर्द विशेषज्ञ से पूछें और वे आपको बताएंगे कि इसके इलाज में पूरक आहार को सर्वोत्तम रूप से कैसे और किस तरह से लें।

मिथक 3: केवल महिलाओं और वयस्कों को माइग्रेन होता है

माइग्रेन बच्चों को भी हो सकता है। वास्तव में, पांच साल से छोटे बच्चे माइग्रेन के सिरदर्द का अनुभव कर सकते हैं। वे पेट में दर्द, चिड़चिड़ापन, एपिसोडिक भ्रम, गंभीर चक्कर आना, एकाग्रता में कठिनाई और अत्यधिक थकान महसूस कर सकते हैं। महिलाओं को माइग्रेन होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, लेकिन पुरुष भी माइग्रेन से पीड़ित होते हैं। जैसे कि 18-20% महिलाएं, तो 8-10% पुरुष भी माइग्रेन से पीड़ित हैं। इसलिए किसी विशेष आयु वर्ग और लिंग को किसी भी बीमारी से जोड़ना गलत है।

मिथक4 : माइग्रेन को ठीक करने के लिए लें ज्यादा से ज्यादा दवाइयां

दुर्भाग्य से, व्यक्तिगत तौर पर लोग माइग्रेन के इलाज के लिए लोग ज्यादा से ज्यादा दवाइयों की मदद लेने के बारे में सोचते हैं। पर ये गलत है। यह वास्तव में इसे बदतर बना सकता है। माइग्रेन के साथ रहने वाले कुछ लोग "रिबाउंड सिरदर्द" की शिकायत करते हैं, लेकिन उस घटना के लिए चिकित्सा शब्द 'मेडिकेशन ओवर्यूज सिरदर्द' है। तीव्र माइग्रेन के दर्द का इलाज करने के लिए बहुत अधिक दवा लेने से भविष्य में अधिक लगातार और अधिक गंभीर माइग्रेन के होने का खतरा पैदा हो सकता है। यहां तक कि इसका इलाज करना और अधिक कठिन हो सकता है। 

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माइग्रेन से बचने का उपाय-

आमतौर पर माइग्रेन को ट्रिगर में अल्कोहल, ग्लूटेन, मोनोसोडियम ग्लूटामेट और हिस्टामाइन युक्त खाद्य पदार्थ, डार्क चॉकलेट आदि शामिल हैं। तो इसे ठीक करने के लिए इन चीजों का सेवन कम करें या बंद करें।  क्योंकि हर रोगी के शरीर में भोजन की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। माइग्रेन से पीड़ित लोग के लिए सबसे अच्छा उपाय ये है अपने माइग्रेन को ट्रिगर्स करने वाले कारणों को जानें और ज्यादा से ज्यादा उससे बचने की कोशिश करें। साथ ही स्ट्रेस, गलत जीवनशैली और देर रात कर जागने की आदत पर कंट्रोल करने की कोशिश करें।

Source: American Migraine Foundation.Org

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