कोरोना ही नहीं इन 4 बड़े इंफेक्शन की अभी तक नहीं बनी वैक्सीन, जानें भारत में कहां-कहां फैली हैं ये 4 बीमारियां

Updated at: Jul 11, 2020
कोरोना ही नहीं इन 4 बड़े इंफेक्शन की अभी तक नहीं बनी वैक्सीन, जानें भारत में कहां-कहां फैली हैं ये 4 बीमारियां

जिस तरह 7 महीने बीत जाने के बाद भी कोरोना की वैक्सीन नहीं बन पाई है ठीक उसी तरह इन 4 संक्रमण की वैक्सीन आज तक नहीं बनी। 

Jitendra Gupta
अन्य़ बीमारियांWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 11, 2020

जिस तरह कोरोनोवायरस खतरनाक तरीके से दुनिया भर में फैल रहा है, इसने पब्लिक स्वास्थ्य अधिकारियों को हिला कर रख दिया है। कोरोना के सिर पर मंडराते खतरे ने डॉक्टर और शोधकर्ताओं को जल्द-जल्द से वैक्सीन बनाने के अपने प्रयासों को पूरा करने की जद्दोजहद में डाल रखा है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि किसी भी निवारक उपाय या एक अच्छी उपचार योजना के बिना हम वास्तव में नहीं जानते हैं कि महामारी कब समाप्त होगी। 

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वैक्सीन तैयार होने में लगता है कितना समय ?

ऐसा पहली बार हुआ है कि इस तरह का टीका विकसित किया जा रहा है या हम इतनी तेज गति से किसी वैक्सीन हो विकसित होते देख रहे हैं। हालांकि अभी भी कुछ संक्रमण ऐसे हैं, जिनसे दुनिया जूझ रही है और इनके लिए अभी तक कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें से कुछ बीमारियां COVID -19 की तुलना में अधिक समय तक फैली रही हैं और अधिक खतरनाक नतीजों और घातक जोखिम को दर्शाती हैं। इस लेख में हम आपको ऐसे 4 संक्रमण के बारे में बता रहे हैं, जिनकी अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है। तो आइए जानते हैं कौन सी हैं ये बीमारियां 

एचआईवी

ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी), जो एड्स का कारण बनता है (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम) वैश्विक स्तर पर 36.9 मिलियन लोगों को प्रभावित करने वाले सबसे घातक वायरस में से एक है, जिसने 1980 के दशक में फैलने के बाद से कभी भी संक्रमण फैलाना शुरू कर दिया था। हालांकि, भारत सहित कई देशों ने कई उपायों के साथ संक्रमण के प्रसार को कम करने में कामयाबी हासिल की है लेकिन दुनिया अभी भी संक्रमण के लिए विकसित होने वाले एक टीके को देखने से दूर है। सबसे हालिया अध्ययन चीन में चल रहे हैं, जहां वैज्ञानिकों ने एक CRISPR तकनीक का उपयोग करके परीक्षण किया, लेकिन उसी पर कोई विकास नहीं हुआ।

एक प्रभावी एचआईवी वैक्सीन विकसित करने के साथ कई चुनौतियां भी हैं। एचआईवी वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली को अलग-अलग तरीकों से लक्षित करता है, इसलिए पूर्ण प्रभावकारिता के साथ इसे विकसित करना पूरी तरह से संभव नहीं है।

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मेरसा (MERSA)

मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS), जो कि COVID-19 की तरह ही फैला था और अभी भी एक घातक महामारी बना हुआ है। 2012 में सामने आने के बाद अभी भी इसे पीड़ित व्यक्तियों की संख्या काफी है।  यह संक्रमण ज्यादातर मध्य पूर्वी देशों में देखा गया था। इसकी वैक्सीन नहीं बनने के पीछे एकमात्र कारण यही है कि अधिकारी समय पर बीमारी के संचरण को रोकने में सक्षम थे। कभी-कभी, केवल कुछ छिटपुट मामलों को देखा गया क्योंकि ये संक्रमण कुछ ही इलाकों में बहुत कम फैला था। दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2020 में MERS वैक्सीन के विकास के संबंध में एक बहुत ही हालिया घोषणा की गई थी जिसे COVID-19 महामारी से निपटने के लिए फिर से तैयार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, वैक्सीन प्रोटोटाइप ने नैदानिक अध्ययनों में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं।

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इंसेफेलाइटिस

एक्यूट इंसेफेलाइटिस, घातक बीमारी जिसने 2008 से 2014 के बीच 44,000 से अधिक लोगों की जान ले ली थी अभी भी बड़े पैमाने पर फैला एक संक्रमण है। एक शोध के अनुसार, इस संक्रमण से मरने वाले लोगों की दर औसतन लगभग 6% है। फिर भी, संक्रमण के लिए कोई टीका नहीं बन पाया है। ये संक्रमण जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस से उत्पन्न होता है। यह बीमारी पिछले साल बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे भारतीय राज्यों में बच्चों और युवा वयस्कों में घातक परिणाम देने के लिए सबसे प्रसिद्ध है। वायरल संक्रमण तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के कामकाज को नुकसान भी पहुंचा सकता है, जिसमें विरोधाभास, प्रलाप, रक्तस्राव और अन्य संबंधित जटिलताओं शामिल हैं।

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सार्स  (SARS)

सीवर एक्यूट रेस्पीरेटरी सिंड्रोम (SARS) एक प्रकोप था, जो 2003 में COVID-19 के समान लक्षणों के साथ चीन में उत्पन्न हुआ था। दोनों वायरस एक ही परिवार से उत्पन्न होते हैं। हालांकि,सार्स का प्रकोप बिना संकेतों या पूर्व-लक्षण के लिए ज्ञात नहीं है। जबकि संक्रमण एक बड़े पैमाने पर फैला था, कई वैज्ञानिकों ने एक टीका विकसित करने और अध्ययन करने की योजना की घोषणा की। हालांकि, वैक्सीन के विकसित होने के बाद फंडिंग बंद कर दी गई और टीके बनने का काम बंद कर दिया गया। 

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