स्‍वाइन फ्लू से 36 की मौत, 51 की रिपोर्ट संदिग्‍ध, ऐसे करें बीमारी से बचाव

स्‍वाइन फ्लू से 36 की मौत, 51 की रिपोर्ट संदिग्‍ध, ऐसे करें बीमारी से बचाव

राजस्थान में स्वाइन फ्लू से पिछले 15 दिनों में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मंगलवार को जैसलमेर में स्वाइन फ्लू के एक और मरीज की मौत हो गई और परीक्षण में लिए गए 51 नम

राजस्थान में स्वाइन फ्लू से पिछले 15 दिनों में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मंगलवार को जैसलमेर में स्वाइन फ्लू के एक और मरीज की मौत हो गई और परीक्षण में लिए गए 51 नमूने पॉजिटिव पाए गए। जहां जयपुर में स्वाइन फ्लू के 17 मामले पॉजिटिव पाए गए, वहीं जोधपुर में 13 मामले पॉजिटिव पाए गए। इस वर्ष कुल 905 नमूने पॉजिटिव पाए गए। 

 

स्‍वाइन फ्लू 

स्वाइन फ्लू घातक वायरस है, जो सुअरों से फैलता है। सबसे पहले इस बीमारी के लक्षण मैक्सिको के वेराक्रूज इलाके के एक पिग फॉर्म के आसपास रह रहे लोगों में पाए गए थे। स्वाइन फ्लू दरअसल सुअरों के बुखार को कहते हैं। यह उनकी सांस से जुड़ी बीमारी है। यह बीमारी जुकाम से जुड़े एक वायरस से पैदा होती है। ये वायरस मोटे तौर पर चार तरह के होते हैं। H1N1, H1N2, H3N2 और H3N1। इनमें H1N1 सबसे खतरनाक है और दुनिया भर में यही वायरस सबको अपनी चपेट में ले रहा है।

कैसे फैलता है स्‍वाइन फ्लू 

आमतौर पर यह बीमारी एच1 एन1 वायरस के सहारे फैलती है लेकिन सूअर में इस बीमारी के कुछ और वायरस भी होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सूअर में एक साथ इनमें से कई वायरस सक्रिय होते हैं जिससे उनके जीन में गुणात्मक परिवर्तन हो जाते हैं। दरअसल स्वाइन फ्लू सूअरों में होने वाला सांस संबंधी एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो कई स्वाइन इंफ्लुएंजा वायरसों में से एक से फैलता है। आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में ही होती है लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है।

स्वाइन फ्लू एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से दो तरह से फैलता है। पहला, रोगी को छूने, हाथ-मिलाने या सीधे संपर्क में आने से। दूसरा, रोगी की सांस के जरिए जिसे ड्रॉपलेट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यह वाइरस पीड़ित व्यक्ति के छींकने, खांसने, ‌हाथ मिलाने और गले मिलने से फैलते हैं। वहीं स्वाइन फ्लू का वाइरस स्टील प्लास्टिक में 24 से 48 घंटों तक, कपड़ों में 8 से 12 घंटों तक, टिश्यू पेपर में 15 मिनट तक और हाथों में 30 मिनट तक सक्रिय रहता है। 

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

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स्‍वाइन फ्लू से बचाव कैसे करें 

  • स्वाइन फ्लू से कैसे बचें इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप स्वास्थ्यप्रद आहार की आदतों को अपनाएं। ध्यान रहे कि आपके खाने में सभी विटामिन्स और जस्ता जैसे मिनरल की मात्रा हो।
  • स्वाइन फ्लू से बचने के लिए यह भी बहुत जरूरी है। प्रोबायोटिक्स का मतलब है की आपके शरीर में कुछ अच्छे बैक्टीरिया का प्रवेश हो जिससे कि स्वाइन फ्लू के बैक्टीरिया से लड़ सकें।
  • यह भी बहुत जरूरी है। यदि आप नियमित व्यायाम करते हैं तो शरीर में रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे कि शरीर में स्वाइन फ्लू से लड़ने वाली कोशिकाएं फैलती है। नियमित व्यायाम से एंडोर्फीन निकलता है जिससे कि रक्त कोशिकाओं के निर्वहन के लिए लसिक तंत्र उत्तेजित होता है।
  • हो सकता है यह आपको अजीब लगे लेकिन इसकी भी कोशिश करें। तनाव कम करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर अनेक तरीकों से प्रभाव पड़ता है। यदि आप तनाव में रहते हैं तो स्ट्रैस हार्मोन स्त्रावित होता है और थायमस की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। जिससे इम्यून कोशिकाओं के निर्माण पर प्रभाव पड़ता है।
  • जहां तक स्वाइन फ्लू से लड़ने का सवाल है इस पॉइंट को नकारा नहीं जा सकता है। शरीर के सुचारु कार्य के लिए कम से कम 7 घंटे की नींद जरूरी है। ठीक प्रकार नींद नहीं लेने से स्ट्रैस हार्मोन स्त्रावित होता है जिससे इम्यूनिटी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  • चूंकि स्वाइन फ्लू पूरे देश में फैल रहा है इसलिए बाहर निकलते समय मास्क पहनकर निकलें। गंदे और कचरे वाले रास्तों से नहीं गुजरे, ना सिर्फ अपने घर को बल्कि अपने आस-पास भी साफ-सफाई रखें।

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