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जन्म के बाद पहले 28 दिन हैं शिशु के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण, ऐसे करें देखभाल

परवरिश के तरीके By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 09, 2018
जन्म के बाद पहले 28 दिन हैं शिशु के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण, ऐसे करें देखभाल

मां को हमेशा अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता होती है। वहीं अगर शिशु ने अभी-अभी जन्म लिया हो, तो मां की चिंता और बढ़ जाती है क्योंकि शुरुआती कुछ महीनों में शिशु को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। 

मां को हमेशा अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता होती है। वहीं अगर शिशु ने अभी-अभी जन्म लिया हो, तो मां की चिंता और बढ़ जाती है क्योंकि शुरुआती कुछ महीनों में शिशु को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। दरअसल शिशु के स्वास्थ्य के लिए जन्म के बाद के पहले 28 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि मां के गर्भ में शिशु को जैसी व्यवस्थाएं मिलती हैं, गर्भ से बाहर यानि दुनिया में आने के बाद वो शुरुआत में उतनी सुरक्षा नहीं महसूस करता है। शुरुआत के इस एक महीने में की गई देखभाल ही शिशु का संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य निर्धारित करती है।

कमजोर बच्चों की देखभाल है जरूरी

जो बच्चे जन्‍म के समय कमजोर होते हैं, उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। खासकर वो बच्‍चे जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनको संक्रमण होने की अधिक संभावना होती है, इसलिए उन्हें शुरू के 28 दिन के दौरान अधिक से अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। संक्रमण से बचाने और शिशु को अपने आस-पास के माहौल को समझने में ये शुरुआती दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

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थोड़ी भी लापरवाही हो सकती है घातक

जन्म के बाद के शुरुआती दिनों में बच्चे के स्वास्थ्य के साथ थोड़ी भी लापरवाही घातक हो सकती है। ऐसी समस्याएं उन बच्चों को साथ ज्यादा आती हैं जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, जिनका वजन कम होता है या जो बच्चे अपने नियत तारीख से पहले पैदा होते हैं। अगर बच्चा कमजोर है या उसकी चिकित्‍सा चल रही है, तो उसे सुरक्षा के लिए नवजात देखभाल में रखा जाता है। मूल रूप से बच्चे के स्वास्थ्य और आवश्यकताओं के अनुसार अस्पताल के विभागों को कुछ श्रेणियों में बांटा जाता है।

बच्चों को छूने-उठाने में बरतें सावधानी

श्वास लेने में समस्या, अविकसित, कम वजन का, प्रतिरक्षा प्रणाली विकार जैसी समस्या के साथ पैदा हुए शिशुओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसको गहन देखभाल भी कहा जाता है। बच्चे के स्वास्थ्य की स्थिति पर नव प्रसव देखभाल कुछ दिनो से कुछ हफ्तों तक रहना निर्भर कर सकता हैं। जिन बच्चों को इन्क्युबेटर मशीन पर रखा जाता है, उनको विशेष देखभाल की जरूरत है और उनको रोगाणुहीन दस्ताने पहने बिना स्पर्श की अनुमति नहीं होती. क्योकि उनमें संक्रमण की अधिक संभावना होती है। नवजात देखभाल के कुछ चरणों में मां को अपने बच्चे को स्तनपान कराने की अनुमति दी जाती है। नर्स को भी नवजात देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यह बच्चे को किसी भी संक्रमण से पूर्ण रुप से सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है।

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नवजात देखभाल क्यों है महत्वपूर्ण 

सभी नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत है, चाहे वह स्वस्थ हो या अस्वस्थ। हर मां को अपने बच्चे को स्तनपान ज़रूर कराना चाहिये क्योंकि एक नवजात शिशु के लिए यह पोषक तत्वों का सबसे अच्‍छा स्रोत है, जो बच्चे के विकास में मदद करता है। नवजात देखभाल का यह पहला पहलू है। यह बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए और भविष्य में सभी संक्रमणों से लड़ने में सहायक होता है। स्तनपान के विभिन्न फायदे हैं। वो माताओं जो पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित है या जिन्हें लगता है कि बीमारी की अवस्था में स्तनपान उनके शिशु के स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा या नहीं, तो उन्हें चिकित्सक से इस बारे में जरूर पूछ लेना चाहिए।

शिशु के साथ मां की देखभाल भी जरूरी

कुछ मामलों में, माता-पिता को नव प्रसव देखभाल के दौरान कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। एक शिशु के माँ और पिता को अपने नवजात देखभाल से संबंधित सभी संदेह स्पष्ट करने चाहिए। नवजात देखभाल के दौरान एक माँ को भी पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी जाती है, जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। नवजात देखभाल में एक माँ को बच्चे की आवश्यकता पर ध्यान देना पडेगा। साथ ही एक माँ को ये भी पता होना चाहिये कि किन परिस्थितियों में उसको तुरंत एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए।

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