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हार्ट मर्मर क्‍या है

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 10, 2013
हार्ट मर्मर क्‍या है

हृदय के मर्मर की ध्वनि वॉल्व या हृदय के कोष्ठकों की असामान्यता का सूचक हो सकती है। यह हृदय के दो भागों के बीच असामान्य जुड़ाव के कारण भी हो सकती है।

हार्ट मर्मर एक प्रकार की हृदय की असमान्य ध्वनि है, जो हृदय के भीतर विक्षोभकारी रक्त प्रवाह के कारण उत्पन्न होती है। मर्मर एक सामान्य ध्वनि हो सकती है या हो सकता है कि यह किसी गंभीर समस्या का सूचक भी हो।

heart murmur kya haiअधिकांश मामलों में, विक्षोभ सामान्य होता है और इसे बेनाइंग फ्लो मर्मर कहते हैं। यह तब होता है जब हृदय से तेज रक्त प्रवाह होता है, उदाहरण के लिए, यह ऐसे व्यक्ति में हो सकता है जो क्रोधित हो, या जिसने अभी-अभी व्यायाम किया हो, जिसे तेज बुखार हो या गंभीर एनीमिया हो। लगभग दस प्रतिशत वयस्कों और तीस प्रतिशत बच्चों को हानि रहित मर्मर होता है। इस प्रकार के मर्मर को इन्नोसेंट मर्मर भी कहते हैं।

हृदय के मर्मर की ध्वनि वॉल्व या हृदय के कोष्ठकों की असामान्यता का सूचक हो सकती है। यह हृदय के दो भागों के बीच असामान्य जुड़ाव के कारण भी हो सकती है। हृदय की मर्मर उत्पन्न करने वाली कुछ असामान्यताएं इस प्रकार हैं-

हृदय के वॉल्व की असामान्यता-

हृदय में चार प्रकार के वॉल्व होते हैं-  एओर्टिक वॉल्व, मिट्रल वॉल्व, ट्राईकस्पिड वॉल्व औऱ पल्मोनरी वॉल्व। इनमें से किसी भी वॉल्व का मुंह संकरा (स्टेनोसिस) हो तो बाहर की ओर रक्त प्रवाह में अवरोध उत्पन्न होता है या फिर अगर वॉल्व लीक (रिगजिटेशन या अपर्याप्तता) हो तो रक्त का पीछे की ओर प्रवाह होने लगता है।


मिट्रल वॉल्व प्रोलैप्सः
इस स्थिति में मिट्रल वॉल्व को बंद करने वाली पत्तियां ठीक से बंद नहीं हो पाती, जिससे रक्त हृदय के निचले बांये प्रकोष्ठ(बांये निलय) से ऊपर के बांये आलिंद में लीक हो सकता है या इसका निलय से आलिंद की ओर, अर्थात पीछे की ओर प्रवाह हो सकता है।


जन्मजात हृदय रोगः
इसका अर्थ है हृदय की वे समस्याएं, जो जन्म से ही हों। इसमें शामिल हैं-


सेप्टल डिफैक्ट्सः

इन्हें दिल में छेद के नाम से भी जाना जाता है। यह हृदय के सेप्टम (दाएं औऱ बाएं हिस्से के बीच की दीवार) में एक प्रकार का असामान्य छिद्र है।


पैटेंट डक्टस आर्टेरिओससः
जन्म से पहले पल्मोनरी आर्टरी और एओर्टा (जिसे डक्टस आर्टेरिओसस कहते हैं) से होकर खून भ्रूण के फेफड़े में जाता है, क्योंकि भ्रूण सांस नहीं लेता है। बच्चे के जन्म के बाद उसके फेफड़े काम करने लगते हैं, और डक्टस आर्टेरिओसस सामान्यतः बंद हो जाते हैं। पैटेंट डक्टस आर्टेरिओसस तब होता है, जब जन्म के बाद भी डक्टस आर्टेरिओसस से होकर रक्त का प्रवाह जारी रहता है।


एंडोकार्डिटिसः
एंडोकार्डिटिस हृदय के वॉल्व और एंडोकार्डियम(हृदय के कोष्ठकों का आंतरिक आवरण) का संक्रमण औऱ शोथ है। हृदय के वॉल्व के संक्रमण के कारण खून को पीछे की ओर लौट सकता है या संक्रमित वॉल्व रक्त के प्रवाह में आंशिक तौर पर अवरोध डालता है, जिन कारणों से हार्ट मर्मर सुनाई देता है।


कार्डियक मिक्सोमाः
कार्डियक मिक्सोमा का मामला बहुत कम देखने में आता है, यह एक बेनाइंग(ननकैंसरस) ट्यूमर है, जो हृदय के भीतर बढता है और रक्त प्रवाह में आंशिक रूप से अवरोध डालता है।


एसिमेट्रिक सेप्टल हायपरट्रोफीः
यह हृदय के निचले बांये प्रकोष्ठ(बांये निलय) के भीतर मांसपेशियों का असामान्य तौर पर मोटा होना है। मोटी मांसपेशियां एओर्टिक वॉल्व के ठीक नीचे रक्त प्रवाह के रास्ते को संकरा बना सकती हैं। इस स्थिति को आइडियोपैथिक हायपरट्रॉफिक सबएओर्टिक स्टेनोसिस कहते हैं, जो उन लोगों में देखा जाता है, जिन्हें हायपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी है।

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