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    स्वाइन फ्लू की दवा विटामिन डी

    संक्रामक बीमारियां By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 04, 2009
     स्वाइन फ्लू की दवा विटामिन डी

    स्वाइन फ्लू से बचाव करने का सबसे कारगर तरीका है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और ऐसा विटामिन, प्रोटीन के जरिए किया जा सकता है। स्वाइन फ्लू से बचाव और वायरस के कीटाणुओं को कम करने के लिए असरकारक दवा के रूप में विटाम

    vitamin Dआज के बदलते दौर में बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू और इसके बाद अलग-अलग वायरस के प्रभाव से न जाने और कौन कौन सी बीमारियां पनप रही है। जब तक एक लाइलाज बीमारी के इलाज की खोज की जाती है तब तक दूसरी बीमारी पनपने लगती है। ऐसे में आम व्यक्ति कैसे अपने आपको सुरक्षित रख पाएगा। यदि आमजन स्वाइन फ्लू से अपना बचाव करना चाहता है तो उसका सबसे कारगर तरीका है कि वह अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं और ऐसा विटामिन, प्रोटीन के जरिए किया जा सकता है। आप आप सोचेंगे ऐसा कैसे किया जा सकता हैं तो हम आपको बता दें कि विटामिन डी और उसके पूरक विटामिन इस काम में आपकी मदद करेंगे। असरकारक दवा के रूप में विटामिन डी का प्रयोग किया जाता है। आइए जानें कैसे स्वाइन फ्लू की दवा विटामिन डी है।
    -    विटामिन डी बुखार और संक्रामक बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है। विटामिन डी3 लेने से व्यक्ति का इम्यून सिस्टम संक्रामक बीमारियों से लड़ने की क्षमता पैदा करता है।
    -    विटामिन डी3 के जरिए शरीर में फैलने वाले संक्रमण और परजीवी को रोकने में मदद मिलती है।
    -    विटामिन डी के रूप में न सिर्फ फल और खानपान की चीजें बल्कि विटामिन की गोली भी ली जा सकती है।
    -    प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और स्वस्थ रहने के लिए खानपान में विटामिन डी की माञा बढ़ा देनी चाहिए।
    -    शोधों के मुताबिक विटामिन डी में स्वाइन फ्लू के वायरस से लड़ने की सबसे अधिक क्षमता मौजूद होती है।
    -    विटामिन डी न सिर्फ असरकारक दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है बल्कि तंदरूस्त रहने के लिए भी इसे लिया जा सकता है।
    -    विटामिन डी की कमी से प्रतिरोधक क्षमता कम होने का खतरा बना रहता है।
    -    ऐसा कहा जाता है कि सूरज की रोशनी से भी विटामिन डी लिया जा सकता है। जो व्यक्ति आमतौर पर कम सूरज की रोशनी में रहता है उसकी न सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता कम होने का खतरा रहता है बल्कि उसका बीमार होने का खतरा भी बराबर बना रहता है।
    -    पिछले कुछ सालों में विटामिन डी को स्वाइन फ्लू रोकने के लिए असरकारक दवा के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
    -    विटामिन डी में भी डी 3 लेना सबसे बेहतर रहता है।
    -    विटामिन डी और डी3 जूस, फल और अच्छी डाइट के जरिए भी लिया जा सकता है।
    -    जैसे ही किसी स्वस्थ व्यक्ति में स्वा‍इन फ्लू के लक्षण दिखाई देने लगे या शंका हो तो विटामिन डी की माञा उसके खाने में अधिक कर देनी चाहिए।
    -    जब तक पूरी तरह से स्वाइन फ्लू वायरस का असर खत्म न हो जाए तब तक विटामिन डी और डी3 लेते रहना चाहिए।
    -    विटामिन डी के साथ ही पानी भरपूर माञा में लेना चाहिए साथ ही विटामिन डी के पूरक अन्य विटामिन ए, विटामिन सी, जिंक इत्यादि भी लेने चाहिए। इससे डाइट भी अच्छी होगी, पाचन तंञ में सुधार आएगा साथ ही प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी।

    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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