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स्माल सेल लंग कैंसर का निदान

कैंसर By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 25, 2013
स्माल सेल लंग कैंसर का निदान

स्माल सेल लंग कैंसर का निदान : फेफड़ों का स्माल सेल कैंसर का निदान स्पेटम साईटोलॉजी नामक तकनीक से किया जा सकता है जिसमें असामान्य कोशिकाओं के लिए फेफड़ों से बलगम का टेस्‍ट मॉइक्रोस्कोप में किया जाता है। कैंसर की कोशिकाएं फेफड

फेफड़ों के कैंसर की पहचान प्राय: सीने के एक्स‍-रे से की जाती है जब इसमें काला और गेहुंआ क्षेत्र दिखता है। अन्य इमेजिंग स्टरडीज़ जैसे कि सीटी, एमआरआई और पीईटी स्कैनिंग ट्यूमर के आकार, आकृति और लोकेशन का पता लगा सकते हैं और इसके फैलने के हिस्सों की पहचान कर सकते हैं।

इससे ट्यूमर का नमूना लेने के सर्वश्रेष्ठ स्थान की खोज करने में आसानी होती है ताकि यह जाना जा सके कि यह स्माल सेल कैंसर है या फेफड़े के कैंसर का कोई अन्य प्रकार जैसे कि लार्ज सेल या एडेनोकार्सिनोमा है। कैंसर का प्रकार जानकर ही उपचार निर्धारित किया जाता है।

फेफड़ों का स्माल सेल कैंसर का निदान स्पेटम साईटोलॉजी नामक तकनीक से किया जा सकता है जिसमें असामान्य कोशिकाओं के लिए फेफड़ों से बलगम का टेस्‍ट मॉइक्रोस्कोप में किया जाता है। कैंसर की कोशिकाएं फेफड़ों और चेस्ट वॉल या फेफड़ों के पास लिम्फ नोड्स में भी पाई जा सकती हैं।

एक और अन्य निदान तकनीक है जिसे निडल एस्पिरेशन कहते है। इसमें लिम्फे नोड्स या संदिग्ध पदार्थ से तरल या टिश्यू को हटाया जाता है। कोशिकाओं को ब्रांकोस्कोपी के दौरान भी हटाया जा सकता है। इसमें मुंह और श्वांस नलियों के ज़रिए एक फाइबरऑप्टिक व्यूइंग ट्यूब फेफड़ों में डाली जाती है। इससे डॉक्टर ट्यूमर की प्रत्यक्ष जांच कर सकते हैं और परीक्षण के लिए कोशिकाएं निकाल सकते हैं।

उपरोक्त टेस्‍टों के अलावा आपको बोन स्कैन, बोन मैरो बॉयोप्सी, सिर और मस्तिष्क का सीटी और एमआरआई स्कैन कराना पड़ सकता है और ट्यूमर के बढ़ने के स्तर का पता लगाने के लिए दूसरी बॉयोप्सी भी करानी पड़ सकती हैं। सिर और मस्तिष्क का टेस्ट करने का कारण यह है कि इस हिस्से में स्माल सेल कैंसर के फैलने की संभावना होती है। इन परीक्षणों से निदान किया जा सकता है चाहे लक्षण न दिखते हों। फेफड़ों के स्माल सेल कैंसर के दो स्तर होते हैं:

  • सीमित कैंसर- सीमित कैंसर एक फेफड़े और नज़दीकी लिम्फ नोड्स तक सीमित होता है।
  • विस्तृत कैंसर - विस्‍तृत कैंसर सीने के दोनों तरफ या सीने के अलावा भी फैलता है।


इस स्टेजिंग के निर्धारण से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि क्या इसमें कीमोथेरेपी के अतिरिक्‍त रेडिएशन थेरेपी को भी उपचार में शामिल किया जा सकता है जो सीमित स्टेज कैंसर से ग्रस्त फेफड़ों के क्षेत्र को भी समाहित करता हो।

 

 

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