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सेहत का साथ स्तनपान करने वाले बच्चे बनते हैं तंदरुस्त वयस्क

परवरिश के तरीके By अन्‍य , दैनिक जागरण / Jun 02, 2010
सेहत का साथ स्तनपान करने वाले बच्चे बनते हैं तंदरुस्त वयस्क

एक ब्रिटिश अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों को मां का दूध पीने का मौका मिलता है, वे बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में कहीं अधिक स्वस्थ और तंदुरुस्त वयस्क बनते हैं।

एक ब्रिटिश अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों को मां का दूध पीने का मौका मिलता है, वे बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में कहीं अधिक स्वस्थ और तंदुरुस्त वयस्क बनते हैं। मां का दूध बच्चों के लिए उत्कृष्ट पोषाहार का स्त्रोत माना जाता है। अध्ययन में कहा गया है कि जब तक बच्चे ठोस आहार लेना शुरू नहीं कर दें, तब तक उन्हें मां का दूध दिए जाने की कोशिश की जानी चाहिए। इससे बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास संतुलित होता है। इंग्लैंड में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रिचर्ड मार्टिन और दूसरे शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया है कि स्तनपान करने वाले बच्चे समाज में कहीं अधिक सफल होते हैं। इसकी वजह यह है कि उनके अध्ययन की क्षमता बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक होती है।
1937 में शुरू हुए एक अध्ययन की एक कड़ी के तौर पर यह शोध पूरा किया गया है। इसके तहत 1414 ब्रिटिश शिशुओं के वयस्क के रूप में विकसित होने का गहन जायजा लिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक जिन बच्चों ने स्तनपान किया था, उनके सेकेंडरी स्कूल में सफल होने की दर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में कहीं अधिक थी। रिपोर्ट के अनुसार मां का दूध पीने वाले बच्चे अपने पेशे में भी कहीं अधिक सफल होते हैं। इसकी वजह यह है कि बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में स्तनपान करने वाले बच्चों की शारीरिक और मानसिक सक्रियता अधिक होती है। अगर स्तनपान करने वाले बच्चों की सामाजिक सफलता दर 59 फीसदी थी तो बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की सफलता दर 50 फीसदी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले किए गएअध्ययन में कहा जा चुका है कि स्तनपान करने वाले बच्चों के संक्रामक रोगों की चपेट में आने का खतरा कम होता है।

Written by
अन्‍य
Source: दैनिक जागरणJun 02, 2010

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